तमिलनाडु।

भारत देश विभिन्न नेताओं में एकता लिए हुए हैं इसके अलग-अलग कोनों में अलग-अलग भाषाएं और रिती रिवाज है, लेकिन सबसे अद्भुत बात यह है कि यहां पर एक से बढ़कर एक मंदिर है, जो सदियों पुराने होने के बावजूद देश दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

ताज महल, हवा महल, सोमनाथ मंदिर और जगह-जगह बने से वाले विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं। इनमें पंजाब के अमृतसर में बना स्वर्ण मंदिर बेहद खास है जहां पर हर साल लाखों पर्यटक दर्शनार्थ आते हैं।

आगरा के ताजमहल को भले ही दुनिया में सात अजूबों में शामिल किया गया हो, लेकिन दुनिया के सात अजूबों में जिस मंदिर को शामिल किया जा सकता है। इस खबर में हम उसके बारे में जिक्र करेंगे। यह मंदिर तमिलनाडु में स्थित है और 15 टन सोने से बनाया गया है।

तमिलनाडु के वेल्लोर में 15 टन अर्थात, 15 हजार किलो सोने से यह महालक्ष्मी मंदिर बना हुआ है। प्रसिद्ध विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि मुगलों के भारत में आने के बाद केवल मुगल संस्कृति को ही प्रमुखता से दिखाया गया है, ताकि हिंदुत्व को मिटाया जा सके।

यही कारण है कि वामपंथी विचारकों ने कभी जनता को ऐसे मंदिरों के विषय में नहीं बताया.. क्योंकि “उनके” लिए तो सम्पूर्ण भारत में बस एक ही खूबसूरत मकबरा है…. मुमताज का मकबरा – ताजमहल।

तमिलनाडु के वेल्लोर नगर के मलाईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित महालक्ष्मी मंदिर 15 हजार किलो सोने से बना है। इस तरह से बनाया हुआ दुनिया का यह एकमात्र मंदिर है।

यह मंदिर 100 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में फैला है और इस महालक्ष्मी मंदिर में हर एक कलाकृति हाथों से बनाई गई है, जिसके चलते यह मंदिर खास बन जाता है।

यह विश्व का एकलौता ऐसा मंदिर है जिसमें इतने सोने का प्रयोग हुआ है। किस मंदिर को बनाने में 15 टन सोने का प्रयोग किया गया है।

अमृतसर के गोल्डन टेम्पल में भी सिर्फ 750 किलो की सोने की ही छतरी लगी हुई है। लेकिन महालक्ष्मी का यह मंदिर 15000 किलो सोने से बनाया हुआ है।

इस मंदिर को भक्तों के लिए 2007 में खोला गया था और, रात के समय यहां भक्तों की संख्या ज़्यादा रहती है।

रात मे सोने से बने पूरे मंदिर को रोशनी से जगमगाया जाता है, जो अद्भुत ही नज़ारा होता है। रात के समय चंद्रमा की रोशनी में इस मंदिर के अद्भुत दर्शन होने के कारण पर्यटकों की संख्या काफी ज्यादा होती है।