घनश्याम तिवाड़ी: 5 साल का बोल्ड चेहरा 6 बार की विधायकी पर भारी

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

घनश्याम तिवाड़ी। (जन्म: 1947) 25 जून तक घनश्याम तिवाड़ी भरतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। तिवाड़ी राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार (2003 से 2008) में वे शिक्षा मंत्री रहे। 71 साल के तिवाड़ी ने राजनीति में सफलतापूर्वक 45 साल पूरे कर लिए हैं। वर्तमान में वे सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर जीतकर आए हुए विधायक हैं।

घनश्याम तिवाड़ी सांगानेर से 2013 में लगातार तीसरी बार (2003, 2008 और 2013) विधायक बने थे। तिवाड़ी के नाम साल 2013 में विधानसभा में राजस्थान के सबसे अधिक मतों से जीतने वाले विधायक के तौर पर रिकॉर्ड दर्ज है।

तिवाड़ी के दो पुत्र व एक पुत्री हैं। एक पुत्र (अखिलेश तिवाड़ी) उनके द्वारा बनाये गए भारत वाहिनी पार्टी नामक राजनीतिक दल में सक्रिय हैं, जबकि दूसरे (आशीष तिवाड़ी) उनके परिवार का व्यापार सम्भालने का काम करते हैं। पत्नी ऊषा तिवाड़ी गृहणी हैं।

घनश्याम तिवाड़ी को भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता रहे भैरों सिंह शेखावत का राजनीतिक शिष्य कहा जाता है। वह खुद भी हमेशा भैरो सिंह शेखावत के आदर्शों की बात कहकर इस बात को पुख्ता करते हैं।

सीएम वसुंधरा राजे की खिलाफत के कारण उनको मंत्री नहीं बनाए जाने की बात होती रहीं हैं, जबकि वो खुद राजे के नेतृत्व में मंत्री नहीं बनने के दावे किए जाते रहे हैं। यह बात और है कि 2003 से 2008 तक बनी बीजेपी की सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।

उसके बाद विपक्ष में रहते बीजेपी की ओर से विपक्ष की नेता की मुखालफत करने वाले गुट का तिवाड़ी नेतृत्व कर चुके हैं। गुट में उनके अलावा गुलाब चंद कटारिया, कैलाश चंद मेघवाल, राव राजेंद्र सिंह, नरपत सिंह राजवी और नंदलाल मीणा जैसे लोगों के होने की बात कही जाती थी।

बाद में 2013 के दौरान जब बीजेपी की सरकार बनी, तब धीरे धीरे सभी नेता वसुंधरा राजे के खेमे में चले गए। तिवाड़ी अकेले रह गए और उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया।

बीते 5 साल के दौरान विधानसभा के अंदर और प्रदेश की जनता के बीच तिवाड़ी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राज्य की अपनी ही पार्टी, बीजेपी सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद किया।

कैलाश चंद मेघवाल विधानसभा अध्यक्ष बन गए, राव राजेंद्र सिंह उपाध्यक्ष बन गए, नंदलाल मीणा को जनजाति मंत्री बना दिया गया, और गुलाबचंद कटारिया राज्य के गृह मंत्री बन कर बैठ गए। नरपत सिंह राजवी बिना किसी पद के रहे। सरकार के अंतिम दिनों में उन्होंने बगावत करने का प्रयास किया, लेकिन कर नहीं पाए।

सांसद और विधायक रहने के बावजूद घनश्याम तिवाड़ी द्वारा बीते 5 साल में अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ बगावत करने के कारण उनको विद्रोही नेता के रूप में माना जाने लगा है।

बहरहाल, घनश्याम तिवाड़ी ने भारत वाहिनी पार्टी नाम से अपना नया राजनीतिक दल बना लिया है। 29 अक्टूबर को उन्होंने निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की रैली में शामिल होकर उनकी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को समर्थन देकर गठबंधन की तीसरे मोर्चे वाली सरकार बनाने का दावा किया है।

लंबे समय तक अपनी सरकार के खिलाफ बागी होने के कारण घनश्याम तिवाड़ी को विपक्ष का बड़ा नेता बना दिया, लेकिन करीब 1 महीने से उनकी सियासी निष्क्रियता ने फिर से बीजेपी में शामिल होने के कयासबाजी शुरू कर दिया।