जयपुर।

राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार से शुरू होने जा रहा है, उससे पहले राजस्थान विधानसभा की कार्रवाई को कवर करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के लिए बुरी खबर सामने आई है।

राजस्थान विधानसभा के द्वारा नए नियम जारी किए गए हैं, जिसके मुताबिक स्वतंत्र पत्रकारों को अब नियमित तौर पर दिए जाने वाले कवरेज पास नहीं मिलेंगे।

अब केवल उन्हीं पत्रकारों को कवरेज के लिए पास दिए जाएंगे, जो किसी मीडिया संस्थान से जुड़े हुए हैं। यानी यदि कोई स्वतंत्र पत्रकार है, तो उसकी विधानसभा में एंट्री बन्द हो गई है।

इससे विधानसभा में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में विधानसभा की कार्रवाई कवर करने और कार्यवाही को विश्लेषण करने का अधिकार समाप्त हो गया है।

बताया जा रहा है कि पत्रकारों के पत्रकारों की विधानसभा वाली कमेटी की अनुशंसा के बाद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने यह दिशा निर्देश जारी किया है।

जिसके अनुसार राज्य के किसी भी स्वतंत्र पत्रकार को विधानसभा की कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा, यानी किसी भी स्वतंत्र पत्रकार को विधानसभा पास करने के लिए कवरेज पास जारी नहीं किए गए हैं।

हालांकि, अभी तक इस बात की पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है कि विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने यह दिशा निर्देश जारी किया है।

बताया यह भी जा रहा है कि विधानसभा सचिव और डीआईपीआर के माध्यम से पत्रकारों को निष्पक्ष खबरें लिखने से रोकने के लिए अधिकारियों ने ही निचले स्तर पर यह निर्णय ले लिया गया है।

उल्लेखनीय बात यह भी है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्रकारों के साथ अच्छे व्यवहार के लिए जाना जाता है, गहलोत हमेशा पत्रकारों के साथ मिलनसार रहे हैं।

उनके द्वारा बार-बार पत्रकारों की आजादी की बात कही जाती है, लेकिन राज्य में उनकी सरकार होने और विधानसभा अध्यक्ष भी कांग्रेस पार्टी के होने के बावजूद पत्रकारों की आजादी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

एक तरह से प्रेस की स्वतंत्रता पर ताला जड़ दिया गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछली सरकार में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के द्वारा बिना अनुमति के किसी भी आरोपी अधिकारी के खिलाफ सरकार की अनुमति के बिना खबर लिखने को लेकर “काला कानून” लाया गया था।

तब विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी ने सरकार को घेरने का काम किया था, लेकिन अब कांग्रेस पार्टी की सरकार होने के बावजूद विधानसभा की कार्रवाई कवरेज करने से रोकने की प्रक्रिया के बाद उन्हीं विधायकों और मंत्रियों के द्वारा इस मुद्दे को लेकर कुछ नहीं कहना काफी निराशाजनक है।

बताया जा रहा है कि विधानसभा की कार्रवाई करने वाले पत्रकारों को अब केवल पत्रकार दीर्घा और पत्रकारों के लिए बनाए गए एक हॉल में बैठने के अलावा विधानसभा में कहीं भी आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है।

अब तक पत्रकार मंत्रियों के कमरों में और आफत वरना पक्ष में बैठे विधायकों और मंत्रियों से खबरों के सिलसिले में बात कर कई समाचार निकालने में कामयाब हो जाया करते थे, किन्तु इस निर्णय के बाद यह प्रक्रिया बंद हो जाएगी।