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जयपुर।

साल 2008 से 2013 की अशोक गहलोत सरकार द्वारा साल 2011 में शुरू की गई मुख्यमंत्री मुफ्त दवा एवं जांच योजना के एक बार फिर से पंखे लगेंगे।

तत्कालीन एनएचएम निदेशक आईएएस अफसर डॉ. समित शर्मा को इस योजना की कमान देने के बाद साफ हो गया है कि इस योजना को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा, बल्कि विस्तार करने की भी तैयारी है।

निदेशक डॉ. शर्मा का कहना है कि अभी एक सप्ताह तक इस योजना में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देकर ठीक से काम करने का मौका दिया जा रहा है, इसके बाद अगले चरण में काम करने में कोताही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्ती दिखाई जााएगी।

योजना के साथ भामाशाह योजना को भी आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर डॉ. शर्मा का कहना है कि किसी योजना को बंद करने का इरादा नहीं है, जिस योजना से भी मरीजों को लाभ मिलेगा, उसको जारी रखा जाएगा, बशर्ते उस योजना की खामियां दूर की जाएगी।

दरअसल, डॉ. शर्मा ही थे जिनकी सोच के कारण प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री फ्री दवा एवं जांच योजना शुरू की गई थी।

अब एक बार फिर से इस योजना की कमान उनके हाथ में आ गई है, जिसके बाद लोगों को फिर से उम्मीद जगी है।

आपको बता दें कि प्रदेश में 25 साल से एक बार भाजपा एक बार कांग्रेस की सरकारें बनती रही हैं। ऐसे में सरकार बदलने के साथ ही सरकारी योजनाओं की तासीर भी बदल जाती है।

फ्री दवा और जांच योजना को लेकर सरकार ने 2011 से 2013 के दौरान जो भी संसाधन और मैन पावर लगाया था, उसको बीते पांच साल में गर्त में डाल दिया गया।

नतीजा यह निकला कि दवा कांउटरों पर 10-12 दवाइयों में से केवल 2 या मुश्किल से तीन दवा ही मिल पाती थी।

वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने लगातार इस योजना में बजट बढ़ाने दावा किया, लेकिन योजना को पूरी तरह से ठंड़े बस्ते में डाल दिया गया।

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