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जयपुर।

राज्य में सरकार बदलने के साथ ही प्राथमिकताएं भी बदलती हुई नजर आ रही है। जो योजनाएं राज्य में वसुंधरा राजे सरकार ने 2013 से 2018 के बीच संचालित की या शुरू की, उनको लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनाव से पहले ही कहते रहे हैं कि बदले की भावना से बंद नहीं किया जाएगा।

लेकिन सीएम बदलते ही एक बार फिर उन योजनाओं को खंगालना शुरू कर दिया गया है, जो बंद कर दी थी या ठंडे बस्ते में चली गई थीं।

अशोक गहलोत की पूर्ववत्ति सरकार द्वारा शुरू की गई फ्लैगशिप योजनाओं को फिर से जिंदा करने की कवायद शुरू हो गई है।

जिस तरह से आईएएस अधिकारियों को लगाया गया है, उससे साफ है कि राज्य की अशोक गहलोत सरकार अपने पूर्ववत्ति सरकार की योजनाओं को उसी जोश के साथ संचालित करने जा रहे हैं। एनएचएम निदेशक के पद पर आए डॉ. समित शर्मा ने एक्शन लेना शुरू भी कर दिया है। इन योजनाओं पर है सबका ध्यान—

मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना

10 मई 2010 को शुरू की गई मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना के तहत 1 रुपए प्रतिकिलो की दर (2 रुपए प्रतिकिलो की दर से घटाकर) से लगभग 38.83 लाख (एएवाई सहित) गरीब परिवारों को प्रभावी प्रबन्धन के साथ प्रतिमाह 25 किलो गेहूं मिलना शुरू हुआ था। अन्न सुरक्षा योजना अब भी अपने विस्तार की बाट जोह रही है।
मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना

2 अक्टूबर 2011 से राजकीय चिकित्सा संस्थानों, जैसे-मेडिकल कॉलेज सम्बद्ध अस्पताल, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र इत्यादि पर में सभी मरीजों को आवश्यक दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना शुरू की गई थी।

मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के अन्तर्गत मेडीकल कॉलेज से संबंधित अस्पताल में 400-450, जिला अस्पताल में 325-400, सीएचसी में 150-250, पीएचसी में 100-150 एवं उप केन्द्र में 20-30 दवाइयां, सर्जिकल्स एवं सूचर्स 16,053 वितरण केन्द्रों के माध्यम से नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे थे।

बाद में नि:शुल्क दवाईयों व सर्जिकल्स की संख्या 400 से बढ़ाकर 600 की की गई थी, जो आज भी इतनी ही संख्या है। इस योजना के तहत राज्य सरकार ने दावा किया था कि 1 वर्ष में इस योजना के क्रियान्वयन से गरीब जनता के 1591.9 करोड़ रुपए की शुद्ध बचत हुई।

अब सरकार बदलते ही इसको दिल्ली सरकारक की मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर बड़े पैमाने पर शुरू करने की संभावना है।
राजस्थान जननी शिशु सुरक्षा योजना

राजस्थान सरकार ने 12 सितम्बर 2011 से केन्द्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना को राजस्थान सरकार ने पूर्ण तैयारी के साथ राजस्थान जननी-शिशु सुरक्षा योजना के रूप में शुरू की गई थी।

यह योजना केंद्र सरकार की जनननी सुरक्षा योजना में शामिल कर ली गई है।
मुख्यमंत्री पशुधन नि:शुल्क दवा योजना

राजस्थान के 1.21 करोड़ गायों, 1.11 करोड़ भैंसों, 2.15 करोड़ बकरियों, 1.11 करोड़ भेडों, 4.22 लाख ऊंटों एवं अन्य पशुओं के साथ कुल 5.67 करोड़ पशुधन हैं। जिनको भी मुख्यमंत्री मुफ्त दवा योजना में शामिल किया गया।

इस योजना की ऐसी दुर्गति हुई कि बेहद कम लोगों को इसका पता है, गहलोत सरकार द्वारा इसके विस्तार की संभावना है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना

मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना में 2013 तक 3 वर्षो में 10 लाख ग्रामीण बीपीएल परिवारों को आवासीय सुविधा उपलब्ध करावाने की योजना थी।

बीपीएल आवास योजना 2013 में सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब फिर से इस योजना के दिन फिरने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री शहरी बीपीएल आवास योजना

31 अगस्त 2012 से लागू की गई इस योजना के अर्न्तगत क्षतिग्रस्त मकान के पुनर्निर्माण के लिए 55 हजार रूपए (शौचालय के निर्माण सहित) एवं मरम्मत के लिए 25 हजार रुपए की सहायता दी जा रही थी।

यह योजना की जगह मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत काम किया जा रहा है। साथ ही शौचालय के तहत हर परिवार को 12000 रुपए मिलते हैं, जो केंद्र सरकार संचालित करती है।
राजस्‍थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012

14 नवम्बर 2011 से राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान करने की गारन्टी अधिनियम-2011 लागू किया गया था। इसी अधिनियम के तहत आम जनता से जुडे 18 विभागों की 153 सेवाओं को समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराने की गारन्टी दी गई थी। सिंगल विंडों के नाम से ही काम किया जा रहा है।

राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2011
राजस्थान सरकार द्वारा सुनवाई का अधिकार-2012 लाया गया। इसे 1 अगस्त 2012 में लागू कर दिया गया था। यह योजना भी वर्तमान में एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। एक भी कर्मचारी को इसके तहत दंडित करने का मामला सामने नहीं आया है।

मुख्यमंत्री ब्याज मुक्त फसली ऋण योजना
केन्द्रीय सहकारी बैकों/प्राथमिक भूमि विकास बैकों/ग्राम सेवा सहकारी समितियों/ लैम्पस द्वारा वर्ष 2012-13 खरीफ एवं रबी फसल के लिए एक अप्रेल 2012 से 31 मार्च 2013 तक किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से वितरित अल्पकालीन फसली ऋण राशि समय पर/समयपूर्व फसली ऋण का चुकारा करने वाले कृषकों से कोई ब्याज वसूल नहीं किया गया।

2012 तक तक 26.54 लाख किसानों को 11205.53 करोड़ रुपए का ऋण वितरीत किया गया था, जो लक्ष्य का 106.72 प्रतिशत थ। सरकार का गठन होते ही गहलोत ने किसानों का फसली ऋण माफ करने का ऐलान कर दिया है।

मुख्यमंत्री बीपीएल जीवन रक्षा कोष
मुख्यमंत्री बीपीएल जीवन रक्षा कोष के तहत 1 जनवरी 2009 को शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 1.61 करोड़ मरीज लाभान्वित हुए थे, तथा उन पर 170 करोड़ रुपये का व्यय हुआ था।

मुख्यमंत्री सहायता कोष से ऐसे परिवार जो बीपीएल नहीं थे, किन्तु जिनकी वार्षिक कार्य 1 लाख रुपए (60 हजार रुपए से बढ़ाकर) से कम थी, उनको असाध्य बीमारी के ईलाज के लिए खर्चे की 40 प्रतिशत राशि तथा अधिकतम 1 लाख रुपये (60 हजार रुपए से बढ़ाकर) सहायता उपलब्ध कराई गई।

1 जनवरी 2009 से सीएमआरएफ से 53070 व्यक्ति 159.08 करोड़ रुपए का व्यय पर लाभान्वित किया गया। सरकार बदलने के कारण बीपीएल जीवन रक्षा कोष के भी दिन फिरने की संभावना है।

राजीव गांधी डिजिटल विद्यार्थी योजना
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2012-13 में राज्य में स्टेट फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा में मेरिट के अनुसार, प्रथम 10-10 हजार बालक-बालिकाओं एवं प्रदेश के समस्त 35 हजार 819

राजकीय उच्च प्राथमिक व उच्चतर विद्यालयों में, आठवीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप पुरस्कार के रूप में उपलब्ध करवाए जा रहे थे। इस योजना को वसुंधरा सरकार ने बंद कर दिया था। एक बार फिर से इस योजना को अमलीजामा पहनाए जाने की संभावना हैँ

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना
मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना 2012 देश भर में पहली बार शुरू की गई थी। इस प्रकार की यह योजना देश के किसी भी राज्य में उससे पहले चालू नहीं की गई थी।

2012-13 में 48,145 विद्यार्थियों को इस योजना से लाभांवित कर 2297.74 लाख रुपए की राशि का वितरण किया गया। गहलोत सरकार द्वारा चालू की गई यह योजना यथावत है, इसको आगे बढ़ाने का काम किए जाने की उम्मीद है।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना
राज्य में 20 अप्रेल से 10 जुलाई 2013 तक विशाल पेंशन महाभियान में 48.41 लाख जरूरतमंद व्यक्तियों की पेंशन स्वीकृतियां दी गई थीं।

इस योजना के तहत पेंशन योजना को विस्तार नहीं दिया गया है, बीच में पिछली सरकार ने पेंशन को बढ़कार 500 रुपए से 750 रुपए करने का काम किया था।

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना
667 कौशल विकास केन्द्र स्थापित किए गए, इनमें से 168 कौशल विकास केन्द्र 2013 तक स्थापित किए जा चुके थे। योजना में 23000 व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जाकर 7982 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, 6274 व्यक्ति प्रशिक्षणरत थे।

पात्रता के लिए परिवार की आय सीमा 2 लाख 50 हजार रुपए की गई। 2 लाख लोगों को स्वरोजगार के लिए रोजगार किट उपलब्ध कराई गई। 10 हजार युवाओं को ड्राईविंग एवं मोटर मैकेनिक का प्रशिक्षण दिया गया। 37 निजी व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से 667 कौशल विकास केन्द्र स्थापित किए गए थे।

जिनमें से 168 कौशल विकास केन्द्र स्थापित किए जा चुके थे। 23000 व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जाकर 7982 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, 6274 व्यक्ति प्रशिक्षण दिया गया। पात्रता के लिए परिवार की आय सीमा 2 लाख 50 हजार रुपए की गई।

2 लाख लोगों को स्वरोजगार के लिए रोजगार किट उपलब्ध कराई गई। 10 हजार युवाओं को ड्राईविंग एवं मोटर मैकेनिक का प्रशिक्षण दिया गया।

अभी यह है स्थिति
आज की तारीख में इस योजना के तहत कुछ नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई कौशल विकास योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है।