Ias rajeev swarup
Ias rajeev swarup

-रीको जयपुर में 200 करोड़ के घोटाले को लेकर मुकदमा दर्ज।

राजस्थान सरकार में बेहद खास पद पर बैठे सीनियर आईएएस अधिकारी राजीव स्वरूप के खिलाफ 200 करोड़ के घोटाले के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस्तगासे के माध्यम से दर्ज की गई एफआईआर में ACS (Home) राजीव स्वरूप के अलावा आईएएस उर्मिला राजोरिया मुख्य आरोपी हैं। दोनों अधिकारी अभी राज्य सरकार के खास अफसरों में गिने जाते हैं।

दोनों सीनियर आईएएस अधिकारियों के अलावा ओम मेटल्स के निदेशक सीपी कोठारी और अन्य निदेशक को भी इस घोटाले में आरोपी बनाया गया है।

जानकारी के मुताबिक रीको के चैयरमेन के पद पर रहते हुए आईएएस राजीव स्वरूप ने ओम टावर के मालिक सीपी कोठारी व अन्य को फायदा पहुंचाया था। आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाना विश्वकर्मा में FIR दर्ज हुई है।

इस FIR के अनुसार IPC की धारा 420, 406, 409, 380, 166 और 120(B) में यह प्रकरण दर्ज हुआ है। दर्ज मुकदमें के अनुसार रीको के अधिकारी विजयपाल सिंह, एसके गुप्ता, एसके शर्मा भी इस बड़े घोटाले में शामिल थे।

बताया जा रहा है कि आईएएस राजीव स्वरूप और आईएएस उर्मिला राजोरिया द्वारा अन्य लोगों के साथ मिलकर सीकर रोड के नंबर 14 पर स्थित एक 56690 वर्गमीटर के भूखण्ड का घोटाला किया गया था। यहां पर प्लाट संख्या एसपी-818 (ll) का यह मामला है।

शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है कि सीनियर आईएएस अधिकारियों के द्वारा यह गबन कर राज्य के राजकोष को लगभाग 200 करोड़ का चूना लगाया गया है।

परिवादी सीताराम अग्रवाल का आरोप है कि इतना ही नहीं, जब इस महाघोटाले की परतें खुलने लगीं तो रीको के अधिकारियों द्वारा इस भूखंड के मूल आवंटन की फ़ाइल को भी गायब कर दिया गया।

दर्ज एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि रीको के उच्च अधिकारियों की मदद से ओम मेटल्स के द्वारा रियल स्टेट का अवैध कारोबार भी किया जा रहा है, जिसमें रीको के कई अधिकारियों की भी हिस्सेदारी है।

इस मामले में परिवादी सीताराम अग्रवाल ने इन सब के विरुद्ध कोर्ट में इस्तेगासा पेश किया था, जिसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में परिवादी सीताराम की और से हाई कोर्ट के अधिवक्ता सुनील वशिष्ठ ने कोर्ट में पैरवी की थी।

मुकदमा एसीजेएम जयपुर मेट्रो कोर्ट नम्बर 07 के आदेश पर दर्ज किया गया है। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने विश्वकर्मा थाने को आरोपित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज जांच करने के आदेश दिए थे। सीताराम अग्रवाल की ओर से कोर्ट में सभी तथ्य पेश किए गए हैं।

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