sambhar lake news and photo of bieds death
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Jaipur

जयपुर और नागौर के बीच करीब 295 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली सांभर झील में लगभग 50,000 के आसपास विदेशी और देशी मेहमान पक्षियों की मौत के मामले में स्थानीय विधायकों, सांसद और मंत्री पर एफ आई आर दर्ज हो गई है।

धरोहर बचाओ समिति के अध्यक्ष भरत शर्मा ने बताया कि सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जयपुर ग्रामीण एसपी कार्यालय में परिवार दिया गया है, जिसके बाद पुलिस ने एफ आई आर दर्ज कर ली है।

उन्होंने बताया कि तमाम देसी विदेशी मेहमान पक्षियों की मौत का तांडव जो सांभर झील में चला है, उसके लिए न केवल जयपुर जिला कलेक्टर, स्थानीय विधायक, सांसद और यहां तक कि वन पर्यावरण एवं कृषि पशुपालन मंत्री भी जिम्मेदार हैं।

आपको बता दें कि सांभर झील में अब तक करीब 72 प्रजातियों के 50,000 से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है। पूरे प्रकरण को लेकर देश विदेश में स्थानीय प्रशासन की खूब थू थू हो रही है।

समय पर पक्षियों की देखभाल और रेस्क्यू नहीं किए जाने के कारण पक्षियों की मौत की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यहां पर स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकार के पास पक्षियों की देखरेख के लिए रेस्क्यू करने और उनका उपचार करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने पर मौत का सिलसिला जारी है।

इस बीच जिला प्रशासन ने सांभर झील की करीब 1000 नमक उत्पादन करने वाली यूनिट्स पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दिया है। नमक जहरीला होने की संभावना के चलते ऐसा किया गया है।

आपको बता दें कि रोजाना करीब 500 से ज्यादा पक्षियों के शव नमक की झील में जगह-जगह बरामद हो रहे हैं। इसके साथ ही सड़ जाने और गल जाने के कारण झील के पानी में पक्षियों के पंख ही पंख दिखाई दे रहे हैं।

धरोहर बचाओ समिति की ओर से एसडीएम राजेंद्र प्रसाद कस्वा, पर्यावरण मुख्य सचिव श्रेया गुहा, सांभर साल्ट लिमिटेड के डायरेक्टर ना मालूम, जयपुर जिला कलेक्टर जगरूप सिंह यादव, फुलेरा विधायक निर्मल कुमावत, स्थानीय सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, वन मंत्री सुखराम विश्नोई, कृषि पशुपालन मत्स्य विभाग मंत्री लालचंद कटारिया, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद संभरिया, वन अधिकारी ना मालूम, झील सुरक्षा अधिकारी नाम ना मालूम आदि के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है।

दर्ज एफआइआर में धरोहर बचाओ समिति की तरफ से कहा गया है कि भारत एवं राजस्थान की प्रसिद्ध ऐतिहासिक सांभर झील में विगत कुछ दिनों से 20,000 से अधिक पक्षी एक साथ मारे गए हैं।

यह पर्यावरण के लिए बहुत घातक है एवं हानिकारक है। हजारों की संख्या में बेजुबान पक्षियों की मौत स्थानीय प्रशासनिक कर्मचारी अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि की घोर लापरवाही के कारण हुई है।

सांभर झील के क्षेत्र में जेल से संबंधित कारोबार करने वाले प्रत्येक कारोबारी एनवायरोमेंटल के प्रमाणपत्रों के बिना ही कारोबार किया जा रहा है।

इस घटना के लिए इन कारोबारियों को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। धरोहर बचाओ समिति के अध्यक्ष भरत शर्मा के मुताबिक हजारों बेजुबान पक्षियों की मौत के कारण वहां मृत पड़े पक्षपात के संपूर्ण क्षेत्र में भयानक दुर्गंध एवं महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

यह मानव जाति के लिए अत्यंत घातक है एवं जीव संरक्षण अधिनियम बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट, वाटर प्रिवेंशन एंड पोलूशन कंट्रोल एक्ट, भारतीय दंड संहिता की धाराओं का उल्लंघन है।