33 C
Jaipur
सोमवार, सितम्बर 28, 2020

पिता की जिम्मेदारी निभाएगी बेटी के सर की पगड़ी, चाकसू की मूलनिवासी डॉ. लीना बेनीवाल ने बांधी पिता की पगडी

- Advertisement -
- Advertisement -

-दिवंगत पिता को भी दे चुकी हैं मुखाग्नि और कंधा, सामाजिक बदलाव की पेरोकार है दोनों बहने डॉ. लीना और योशिता बेनीवाल, बेटा-बेटी के बराबरी के हक की हिमायती हैं दोनों बहनें।

मदन कोथुनियां
भारतीय समाज में पगड़ी की रस्म से अकसर बेटियों को वंचित रखा जाता है। रस्म है कि पिता के अवसान के बाद पुत्र ही पिता की पगड़ी धारण करता है, लेकिन जयपुर जिले के चाकसू कस्बे की रहने वाली डॉ. लीना बेनीवाल ने पिता के निधन के बाद पगड़ी की रस्म ऐसे निभाई और संपन्न की जैसे कोई बेटा करता है।         

डॉ. लीना ने पिता की पगड़ी अपने सिर पर बाँध कर बदलाव की एक नई इबारत लिखी है। पेशे से डाक्टर लीना कहती हैं, ” मेरा मकसद सिर्फ इतना ही है कि बेटियों को बराबरी का हक़ मिले।

मेरे पिता ने हमेशा मुझे बेटे से भी ज्यादा महत्व दिया। उनके दिल में बेटी-बेटो में कोई फर्क नहीं था। मगर उनके निधन के बाद कंधा देने से लेकर पगड़ी रस्म का सवाल आया तो मुझे लगा, मेरे दिवगंत पिता की ख्वाहिश पूरी होगी, मैं दिवंगत पिता को मुखाग्नि भी दूंगी और सामाजिक परपंरा के अनुसार पगड़ी की रस्म भी अदा करुँगी। ये सभी बेटियों के हकोंं का सम्मान है।”         

पिता की जिम्मेदारी निभाएगी बेटी के सर की पगड़ी, चाकसू की मूलनिवासी डॉ. लीना बेनीवाल ने बांधी पिता की पगडी 1

सामाजिक व धार्मिक विधि-विधान के बीच रस्मो-रिवाज के अंधेरो से निकली लीना यूंं प्रकट हुई जैसे वो बेटियों के लिए रोशनी लेकर आई हो। पिछले दिनों लीना के पिता अशोक बेनीवाल का जो कि रेलवे में अधिकारी रहे है का देहांत हो गया था और लीना व योशिता अपने पिता की दो बेटियां है।          

लिहाज़ा परिवार की ज़िम्मेदारी डॉ. लीना के कंधो पर ही रही है। मगर जब पगड़ी की रस्म का मौका आया तो सामाजिक रस्म आड़े आ गई। क्योंकि रस्मो रिवाज इस मामले में बेटो की हिमायत करते है, लेकिन लीना ने पगड़ी और बेटी के बीच सदियों से बने फासले को मिटा दिया।         

नाते रिश्तेदारों की भीड़ जमा हुई और जब पगड़ी की रस्म का अवसर आया, लीना ने प्रचलित रस्म का प्रतिकार किया और परिवर्तन की प्रतिमा बन कर खड़ी हो गई।

सामाजिक स्वीकृति के बीच लीना के माथे पिता की पगड़ी बंधी तो उसका चेहरा बदलाव की रोशनी से दमक उठा।         

डॉ. लीना कहती है कि जब मेरे पिता ने कभी भेद नहीं किया तो समाज में ये बेटियों के साथ भेदभाव होने का सवाल ही नहीं उठता ?

इनका कहना है
“अब समय भी बदल गया है। बेटिया भी घर की जिम्मेदारी निभा सकती है। पहले बेटों को ही पगड़ी रस्म का दस्तूर था, क्योंकि पगड़ी की रस्म का अर्थ है परिवार के मुखिया के निधन के बाद पगड़ी के जरिये जिम्मेदारी का अंतरण। पहले बेटियांं घर से बाहर नहीं निकलती थी, अब वे बेटो के जैसे सभी जिमेदारियो का निर्वहन करने में सक्षम है”
रूपनारायण सांवरिया, वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता
         

” मेरे पिता ने हमेशा मुझे बेटे से भी ज्यादा महत्व दिया। उन्होंने बेटी-बेटो में कोई फर्क नहीं किया। मगर उनके निधन के बाद पगड़ी दस्तूर का सवाल आया तो मुझे लगा मेरे दिवगंत पिता की ख्वाहिश पूरी होगी, मैं ही पगड़ी की रस्म अदा करुँगी। ये सभी बेटियों के हको का सम्मान है और इस इस रस्म में मेरा समाज मेरे साथ खडा है।”
डॉ.. लीना बेनीवाल (दिवंगत अशोक बेनीवाल की बेटी)

- Advertisement -
पिता की जिम्मेदारी निभाएगी बेटी के सर की पगड़ी, चाकसू की मूलनिवासी डॉ. लीना बेनीवाल ने बांधी पिता की पगडी 4
Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिआ संपादक .

Latest news

सरसों तेल में मिलावट पर 1 अक्टूबर से रोक, उपभोक्ता व किसानों को होगा फायदा

नई दिल्ली, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। उपभोक्ताओं को अब शुद्ध सरसों का तेल मिलेगा क्योंकि सरकार ने सरसों तेल में किसी अन्य तेल की मिलावट...
- Advertisement -

डेटा उपलब्ध कराने में पारदर्शिता की कमी को लेकर ममता का सरकार पर निशाना

कोलकाता, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नागरिकों को डेटा प्रदान करने में पारदर्शिता की कमी को लेकर सोमवार को...

गोवा के डीजीपी हुए कोरोना से संक्रमित

पणजी, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। गोवा के पुलिस महानिदेशक मुकेश कुमार मीणा कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए हैं। उनको यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती...

ब्यावर विधायक शंकर रावत के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता पहुंचे सीएमओ

जयपुर। ब्यावर को जिला बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इसी क्रम में आज अजमेर के ब्यावर विधानसभा से विधायक...

Related news

डूंगरपुर में आंदोलन की जड़: सामान्य वर्ग के लिये आरक्षित नहीं हैं 50 फीसदी सीटें, योग्य हो तो आरक्षित वर्ग भी हो सकता है...

जयपुर। राजस्थान के दक्षिण क्षेत्र के जिले डूंगरपुर, जिसको मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ​द्वारा तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के साथ ही नक्सलवाद पनपने का क्षेत्र...

बहुपक्षवाद और मानव जाति के साझा भाग्य के निर्माण में शक्ति डालें : भारतीय विद्वान

बीजिंग, 25 सितम्बर (आईएएनएस)। अभी कुछ दिनों पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा का वार्षिक सत्र हुआ जहां तमाम देशों के नेताओं ने वीडियो के जरिए...

जयपुर: प्रेम-प्रंसग में 23 वर्षीय छात्रा को दिन-दहाड़े चाकू मारा, फिर दागी तीन गोलियां

-युवक गिरफ्त में, फिलहाल पूछताछ जारीजयपुर। आदर्श नगर थाना इलाके में शनिवार सुबह सरेराह एक युवक ने प्रेम प्रंसग के चलते चाकू...

आतंकियों को कंधार तक छोड़ने वाले पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह का 82 की उम्र में निधन

जयपुर/बाड़मेर। अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह जसोल का आज सुबह 82 वर्ष की उम्र में निधन...
- Advertisement -