गांवों की सूरत बदलता जल

विनोद पाठक
नल खोलो और घर में पानी आने लगे, इससे बड़ा सुखद क्या हो सकता है? लेकिन, विडंबना यह है कि देश की बड़ी आबादी आजादी के 72 साल बाद भी इस सुख से वंचित है।

खासकर ग्रामीण इलाकों में पानी बड़ी चुनौती है। हमारी माताओं-बहनों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। पश्चिम राजस्थान में तो 10-10 किलोमीटर दूर से उन्हें पानी के लिए पैदल चलना पड़ता है।

जहां पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को खुले में शौच से मुक्ति का संकल्प लिया और उसे पूरा किया, वहीं दूसरे कार्यकाल में उन्होंने गांवों में हर घर नल से जल का संकल्प लिया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारे यहां 19.04 करोड़ ग्रामीण आवास हैं, जिनमें 15.81 करोड़ नल से जल से वंचित हैं।

यदि साल 2024 तक जल जीवन मिशन को साकार करना है तो हर साल 3.2 करोड़ घरों को कवर करना होगा, यानी रोज 88,000 नल कनेक्शन लगाने हैं।

पिछले साल 15 अगस्त को लाल किला से जल जीवन मिशन के ऐलान के 11 माह बाद जो तस्वीर उभर कर आई है, वो दिल को सुकून देने वाली है। इस दौरान 84.83 लाख ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन लगाए जा चुके हैं।

कोरोना महामारी के बीच अनलॉक-1 के बाद करीब 45 लाख नल कनेक्शन लगे हैं, यानी रोजाना करीब 1 लाख घरों को नल कनेक्शन लग रहे हैं। हर कनेक्शन को जिओ-टैगिंग और परिवार के मुखिया के आधार से जोड़ा जा रहा है।

जल जीवन मिशन के लिए केंद्र सरकार ने 3.60 लाख करोड़ का बजट निर्भारित किया है। चूंकि संविधान के तहत जल राज्यों का विषय है, सो योजना को उनके द्वारा पूरा किया जाना है। आधी राशि राज्यों को वहन करनी है।

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अधिकांश राज्य इस मिशन को पूरा करने में सहयोग दे रहे हैं। बिहार, गोवा, पुडुचेरी, तेलंगाना में तेजी से काम हो रहा है। इन राज्यों ने साल 2021 में हर घर नल से जल का संकल्प लिया है।

गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, मेघालय, पंजाब, सिक्किम, उत्तर प्रदेश साल 2022 में, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ 2023 में तो असम, आंध्र प्रदेश, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल ने साल 2024 में 100 प्रतिशत कवरेज की योजना बनाई है।

अच्छी बात यह है कि जल जीवन मिशन में समानता और समावेशन के सिद्धांत पर जोर दिया गया है। राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों, आकांक्षी जिलों, सूखा प्रभावित और रेगिस्तानी क्षेत्रों तथा पानी की खराब गुणवत्ता वाली बस्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जापानी इंसेफ्लाइटिस/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस (जेई/एईएस) से प्रभावित जिलों पर विशेष जोर दिया गया है, जो प्रभावित जिलों में शिशु मृत्यु की वजहों में से एक है। पांच राज्यों असम, बिहार, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 61 जेई/एईएस प्रभावित जिलों में 3.01 करोड़ घर हैं।

इनमें से 27.32 लाख (9 प्रतिशत) घरों में नल कनेक्शन हैं और शेष 2.74 करोड़ घरों (91 प्रतिशत) को ये उपलब्ध कराए जाने हैं। खराब गुणवत्ता वाले पानी से प्रभावित बस्तियों में पीने योग्य पानी की आपूर्ति सबसे पहली प्राथमिकता है, क्योंकि फ्लूरोसिस और आर्सेनिकोसिस के दुष्प्रभावों में कमी लानी है।

इसी साल दिसंबर तक आर्सेनिक और फ्लूरॉइड प्रभावित बस्तियों के सभी घरों में पाइप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी है।

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हर ग्राम सभा में पानी समिति का गठन किया जा रहा है। खास बात यह है कि पानी समिति में 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होंगी। यह समिति ही तय करेगी कि कैसे इंफ्रास्ट्रैक्चर (आधारभूत संरचना) तैयार करना है?

पानी का कितना शुल्क लेना है? समिति ही पानी की सप्लाई का प्रबंधन भी करेगी, ताकि गांव में एक उत्तरदायी और जिम्मेदार नेतृत्व तैयार किया जा सके।

पानी के रिसाइकिल और रियूज की जिम्मेदारी गांवों की स्वयं होगी। कई राज्यों ने पानी समिति के सदस्यों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया है।

जल जीवन मिशन में पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाओं के माध्यम से जलापूर्ति की निगरानी भी महत्वपूर्ण पहलू है। पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए गांवों में पांच ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया है।

इसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण गांवों में ही पानी की जांच कर सकते हैं। जल गुणवत्ता की निगरानी के तहत प्रत्येक स्रोत की साल में एक बार रासायनिक मानदंडों पर और दो बार जीवाणु संबंधी संदूषण (मानसून से पहले और बाद में) के लिए परीक्षण जाने की आवश्यकता है।

अच्छी बात यह है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण राजगीरी, प्लम्बिंग, इलेक्ट्रिकल पहलुओं, मोटर मरम्मत आदि कौशल को भी बढ़ावा दिया गया है।

कुशल, अर्ध कुशल और अकुशल कामगारों को जोड़ने की संभावनाओं को देखते हुए जल जीवन मिशन को गरीब कल्याण रोजगार योजना से जोड़ा गया है, जिसके तहत सार्वजनिक ढांचा तैयार करने के काम में प्रवासी कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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इस योजना को 6 राज्यों के 25,000 गांवों में लागू किया जा रहा है।
जहां तक बजट की बात है तो सरकार ने साल 2020-21 में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए 23,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

वर्तमान में मिशन के कार्यान्वयन के लिए राज्यों/संघ शासित राज्यों को 8,000 करोड़ का केंद्रीय कोष उपलब्ध है। इस वित्त वर्ष में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग के अनुदान का 50 प्रतिशत जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया है, जो 30,375 करोड़ के बराबर है।

इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा बीती 15 जुलाई को जारी कर दिया गया है। जिस तेजी से काम चल रहा है, उससे साफ है कि साल 2024 तक देश के हर गांव में प्रत्येक परिवार को प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी मिलने लगेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)