आईपीएस पंकज चौधरी ने मीडिया की कार्यशैली को बताया गैरजिम्मेदाराना

जयपुर। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार और वर्तमान अशोक गहलोत सरकार की मिलीभगत करके एक होनहार आईपीएस पंकज चौधरी को बर्खास्त करने का काम किया गया था।

करीब 1 साल पहले हुए आदेश के बाद आईपीएस पंकज चौधरी वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गठबंधन होने का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन आज आईपीएस पंकज चौधरी ने राज्य और देश के मीडिया को भी सवालों के घेरे में लिया है।

उन्होंने एक पोस्ट लिखकर मीडिया से, खास तौर से इलेक्ट्रॉनिक टीवी चैनल से पूछा है कि क्या देश में केवल राजनीतिक खबरें ही सब कुछ है? क्या युवाओं, गरीब, किसान, मजदूर और आम जनता के प्रति मीडिया की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है?

आप भी पढ़िए आईपीएस का लेख-

“राजनीतिक खबरें परोसने व देश के युवा पीढ़ी पर मीडिया विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक के पड़ रहे व्यापक नकारात्मक प्रभाव बाबत

जैसा विदित है पिछले काफ़ी समय से लगभग-लगभग सभी मीडिया हाउस अपनी खबरों में राजनीति को सबसे ज़्यादा समय दे रहे हैं या यूँ कहें अधिकांश टीवी चैनल पर सिर्फ़ राजनीतिक चर्चा हो रही है जो देश के करोड़ों युवा व न्यू जेनरेशन के लिए ठीक नहीं है।

हाल यूथ को रोज़गार चाहिए, भारत के यूथ को मोटिवेशन चाहिए, यूथ को कैरीअर को लेकर मार्गदर्शन चाहिए। पर जिस प्रकार से समस्त मीडिया का अधिकांश समय सकारात्मक पहल की बजाय व्यर्थ की बहस में ज़ाया हो रहा है।

इसका दुष्परिणाम यह है को अधिकांश लोगों ने टीवी देखना बंद कर दिया है। मेरे जैसा व्यक्ति भी पिछले 1 वर्ष से टीवी से दूरी बना चुका है।

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आज कोरोना काल में जब स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय सभी बंद है, शिक्षा -दीक्षा सब बुरी तरह प्रभावित है, ऑनलाइन क्लास से छोटे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, ऐसे वक्त में मीडिया एक देशव्यापी पहल करते हुए शिक्षा के आयाम को गति व दिशा दे सकता है।

इसके लिए सामाजिक सरोकार व देश के बेहतर भविष्य के लिए राजनीतिक चर्चा का समय कम करते हुए यूथ पर ध्यान दें, और टीवी के माध्यम से एजुकेशन पर कम से कम प्रतिदिन 6 घंटे समय दें, जबतक कोरोना आपदा से देश को राहत नहीं मिल जाती या यूँ कहें 2020 के अंत तक टीवी को देश के करोड़ों बच्चों के लिए केंद्रित हो जाना चाहिए।

क्योंकि मेरा मानना है आज का यूथ ही देश का भविष्य है, सो ज़ाहिर सी बात है समस्त राजनीतिक दलों, समस्त मीडिया हाउस, समस्त लोकतांत्रिक स्तंभों को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए और मीडिया को लेकर एक व्यापक मार्गदर्शन विशेषकर अगले 6 माह के लिए अवश्य जारी करना चाहिए।

मेरा व मेरे जैसे विचार रखने वाले लोगों की भी यही सोच है कि समस्त मीडिया के लिए ये समय अपनी छवि को सुधारने का भी है, क्योंकि प्रायः देखा जा रहा है की देश की जनता द्वारा मीडिया को अब गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

लोगों के मन में ये बात बैठ गयी है कि जो कुछ भी हम देख या सुन रहे हैं, सब कुछ पैड (paid) है और ख़रीदा जा चुका है और एक ख़ास अजेंडा के तहत चीजें परोसी जा रही हैं।

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एक IPS अधिकारी होने के नाते जैसे मुझे यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि पुलिस की छवि देश में बेहतर नहीं है, इसमें आमूलचूल परिवर्तन व व्यापक बदलाव की ज़रूरत है।

ठीक इसी प्रकार अब मीडिया को पब्लिक के लिए विशेषकर यूथ के लिए फ़ोकस होना चाहिए और यूथ को अपने कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी और आकर्षित करना चाहिए।”