भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के दूसरे उम्मीदवार ने अशोक गहलोत और कांग्रेस की ऐसे नींद उड़ा दी है

जयपुर।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, राज्यसभा चुनाव प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली रोड पर जेडब्ल्यू नामक नई होटल में विधायकों को शिफ्ट करने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि उनके पास पूर्ण बहुमत है और उनके दोनों उम्मीदवार प्रचंड बहुमत से जीतकर राज्यसभा पहुंचेंगे।

लेकिन इसमें ही सबसे गंभीर और रोचक सवाल यह है कि जब कांग्रेस पार्टी के पास जरूरी 102 की जगह 125 विधायकों का समर्थन हासिल है तो फिर चुनाव से 10 दिन पहले पार्टी को विधायकों की बाड़ाबंदी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

इधर, सरकार गठन से लेकर अबतक उल्टे-सीधे बयानों असफलता के द्वारा राजस्थान में अपनी ही सरकार के लिए आए दिन मुसीबतें खड़ी करने वाले प्रदेश के चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा भले ही भाजपा के प्रदेश नेतृत्व, यानी डॉ. सतीश पूनियां को दोयम दर्जे का कहें, लेकिन भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने राज्यसभा चुनाव में चौथे और भाजपा के दूसरे उम्मीदवार को खड़ा करने की जो खास रणनीति अपनाई, उसने कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार की नींद उड़ाकर रख दी हैं।

राजस्थान कांग्रेस और प्रदेश सरकार में डॉ. पूनियां की रणनीति की कितनी दहशत है, इसका अंदाजा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बंधक विधायकों के साथ होटल में रातभर सोने से लगाया जा सकता है।

कितनी विचित्र बात है कि एक सरकार और उसके मुखिया राजधानी में मंत्रियों के बंगले, विधायकों के क्वार्टर छोड़कर इस तरह से एक होटल में बंद हैं। यह हालात तो तब हैं, जब राज्य विधानसभा में 200 में से 124 विधायकों का कांग्रेस को समर्थन होने का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दावा करते नहीं तक रहे हैं।

सब जानते हैं कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यसभा चुनाव में केवल राजेन्द्र गहलोत को ही अपना उम्मीदवार घोषित किया था।

राजेन्द्र गहलोत खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर से आते हैं, इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि जोधपुर के भाजपा सांसद और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की सिफारिश पर ही केंद्रीय नेतृत्व ने राजेन्द्र गहलोत के नाम पर मुहर लगी है।

भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी पता था कि राजस्थान में भाजपा के 72 विधायक हैं, इसलिए सिर्फ एक उम्मीदवार ही जीत पाएगा। वैसे भी भाजपा केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल राजस्थान में अशोक गहलोत को चुनौती देने के मूड में नहीं था, लेकिन भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने एक रणनीति के तहत नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान आखिरी समय में सख्त पर दांव खेलते हुए भाजपा की ओर से दूसरे और राज्यसभा चुनाव के चौथे उम्मीदवार के तौर पर पूर्व सांसद ओंकर सिंह लखावत को मैदान में उतार दिया।

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पूर्व सांसद लखावत की उम्मीदवारी तय करने के दौरान भी अध्यक्ष डॉ. पूनिया को अच्छी तरह पता था कि संख्याबल के मुताबिक भाजपा का एक ही उम्मीदवार जीतेगा, लेकिन डॉ. पूनिया को यह भी अनुमान था कि चौथे उम्मीदवार की वजह से खुद कांग्रेस के विधायक ही अशोक गहलोत सरकार की सांसें फूला देंगे।

पिछले चार दिन से प्रदेश में जो राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है, उससे स्प्ष्ट है कि भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनिया का अनुमान एकदम सही निकला है। कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल और नीरज दांगी की जीत में कोई संशय दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी कोरोना महामारी की आड़ लेकर अशोक गहलोत सरकार ने बिना कोई कारण बताए ही प्रदेश की सीमाओं सील करने और अनेक पाबंदियां लगाने का काम किया है, ताकि कांग्रेस और उनके दल को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक किसी भी हाल में राज्य से बाहर नहीं जा सकें।

राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव 19 जून को होने हैं, लेकिन राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी के द्वारा 10 जून से सभी विधायकों को जयपुर में एक पांच सितारा होटल में बंधक बना कर रखा गया है।

जिस तरह से 10 दिन पहले विधायकों को बंधक बनाया गया है, उससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपनी हार की संभावना को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत कितने डरे-सहमे हुए हैं।

इस बीच सियासी गलियारों में खासी चर्चा है कि यह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राजनीतिक सावचेती है, क्योंकि कथित तौर पर भाजपा वाले कांग्रेस विधायकों को 25-25 करोड़ रुपए में खरीदने के लिए जयपुर की सड़कों पर घूम रहे हैं।

निर्दलीय विधायक और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थक माने जाने वाले विधायकों के नजर आते ही भाजपा वाले 10 करोड़ रुपए एडवांस राशि के तौर पर थमा देने पर आमादा हैं।

समझा जा रहा है कि अब यदि कोई विधायक 25 करोड़ में से 10 करोड़ रुपए एडवांस रकम ले लेता है, तब 19 जून तक वो अपनी जुबान पर कायम रहते हुए कांग्रेस के बजाए भाजपा को वोट कर सकता है। शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने सभी विधायकों को लेकर एक होटल में बंद हो गए हैं।

दूसरी तरफ भाजपा को रोकने के लिए कथित तौर पर जयपुर की सड़कों पर करोड़ों रुपए नकद लेकर घूमते भाजपा नेताओं को पकडऩे के लिए राज्य सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने एसीबी में लिखित शिकायत भी दे दी है।

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डॉ. पूनिया ने चौथे उम्मीदवार की जो रणनीति अपनाई, उससे राजस्थान में राजनीतिक खासा और रोचक तमाशा देखने को मिल रहा है। अब यह बात एकदम तय मानकर चलिए की 19 जून तक राजस्थान की उठक-बैठक करती राजनीति में कई नजारे देखने को मिलेंगे। 

दूसरी ओर एक चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस अध्यक्ष पायलट के साथ पार्टी के 40 विधायक चले गए हैं। कांग्रेस और गहलोत सरकार के राजनीतिक तमाशे की जो खबर 12 जून को एक अन्य अखबार में प्रकाशित हुई है, उसमें लिखा है कि जयुपर के दिल्ली रोड स्थित होटल शिव विलास से 30 से 40 विधायक डिप्टी सीएम सचिन पायलट और पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह के साथ बाहर निकल गए।

30-40 विधायकों के एक साथ बाहर निकल जाने पर होटल में 60-70 विधायक ही रह गए। खबर में यह भी लिखा है कि होटल में 11 जून को शाम पांच बजे विधायकों की बैठे होनी थी, लेकिन इस बैठक का समय बार-बार बदला गया।

इसके बाद देर रात राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव वेणुगोपाल होटल में आए, तब सीएम गहलोत, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, पर्यवेक्षक रणदीप सुरजेवाला आदि के साथ बैठक हुई। यानि देर रात हुई बैठक में भी सचिन पायलट उपस्थित नहीं थे। 

अब एक और रोचक कहानी सामने आई है, जिस तरह से एसओजी और सीआईडी को भारतीय जनता पार्टी के पीछे लगाने का अप्रत्यक्ष रूप से दावा किया जा रहा है, उसको भी प्रत्यक्ष रूप से एसओजी की ओर से कांग्रेस पार्टी, 13 निर्दलीयों और उनका समर्थन करने वाली छोटी पार्टियों के विधायकों को ही डराने के लिए सक्रिय जाना माना जा रहा है।

इस बात में कोई दोराय नहीं है कि 2 उम्मीदवारों के लिए कांग्रेस पार्टी को केवल 102 विधायकों का समर्थन चाहिए, लेकिन कांग्रेस के पास 124 विधायकों का समर्थन होने के बाद भी जिस तरह से अपने विधायकों, निर्दलीयों और छोटे दलों के विधायकों को होटल में बंद करने और भारी पुलिस जाब्ता लगाए जाने का कार्य किया गया है, उससे स्पष्ट है कि भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया के द्वारा पूरी कांग्रेस और राज्य की सरकार को अपनी मुट्ठी में पकड़ने का कार्य सफलतापूर्वक कर लिया गया है।

राज्यसभा चुनाव के दौरान ऐसा पहली बार हो रहा है राज्य सरकार के मुख्य सचेतक की खुद पुलिस को पत्र लिखकर राज्य के विधायकों और विपक्षी पार्टी के द्वारा उनके एमएलए की खरीद-फरोख्त किए जाने का आरोप लगाते हुए उनके ऊपर सख्त कार्रवाई किए जाने की शिकायत की गई है।

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जिस तरह की राजनीति के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जाने जाते हैं, उसमें सेंधमारी करने का पहला प्रयास खुद कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के द्वारा किया गया और अब इस प्रकरण को देखने के बाद स्पष्ट तौर पर महसूस हो गया है कि आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले सहज और सरल दिखाई देते डॉ सतीश पूनिया ने केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा उनको अध्यक्ष बनाये जाने के निर्णय को सही साबित करते हुए विपक्ष की भूमिका अदा कर कांग्रेस सरकार को बाड़ाबंदी जैसे उल्टे-सीधे कार्य करने के लिए मजबूर कर दिया है।

यह बात बिल्कुल सही है कि भारतीय जनता पार्टी के पास केवल 72 विधायकों का समर्थन है, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायक भी भाजपा के समर्थन में हैं। लेकिन 124 या 125 विधायकों के साथ प्रचंड बहुमत में होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिस तरह से डरे-सहमे हुए हैं, तो उसका कारण एकमात्र डॉ सतीश पूनिया की चौथा उम्मीदवार बनाये जाने की यह खास रणनीति ही है।

एक और बात का यहां पर जिक्र करना बेहद आवश्यक है, जिसके तहत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा और कांग्रेस के द्वारा भारतीय जनता पार्टी को गलत बताया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि भाजपा ने तीन राज्यसभा सीटों पर चौथा उम्मीदवार क्यों उतारा है?

आपको बता दें कि संविधान के दायरे में रहते हुए ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना चौथा उम्मीदवार तय किया है। इससे पहले भी देश में सैकड़ों बार ऐसा हो चुका है, जब एक सीट पर दो, 2 सीट पर 3, 3 सीट पर 4 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमाते रहे हैं।

दूसरी तरफ खरीद-फरोख्त के कांग्रेस पार्टी के आरोपों को सिरे से दरकिनार करते हुए भाजपा के अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि अगर अंतरात्मा की आवाज से कोई भी विधायक भाजपा के उम्मीदवार के पक्ष में वोट करता है तो पार्टी उनका स्वागत करेगी। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि राजस्थान का कोई भी विधायक बिकाऊ नहीं है।

उल्टा मीडिया से बात करते हुए सतीश पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सवाल दागते हुए पूछा है कि वह अपनी पार्टी के विधायकों के बिकने का आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन क्या एक विधायक के तौर पर खुद गहलोत 35 करोड रुपए में बिकने को तैयार हैं?