राजस्थान की सियासत: महाराज साहेब प्रणाम! भाईसाहब प्रणाम! हर एक कि सचिन पायलट पर निगाहें

नेशनल दुनिया, जयपुर।

मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान में भी नए सियासी समीकरणों को लेकर समय-समय पर अटकलें लगाई जाने लगती हैं, जैसे ज्योतिरादित्य सिंधियां के भाजपा में आने के बाद केन्द्र में भेजने लेकर मध्यप्रदेश में स्थिति बनती दिख रही है, उसी तरह कई बार राजस्थान में भी डिप्टी सीएम सचिन पायलट को लेकर भी स्थिति बनने के सियासी संकेत मिलते रहते हैं।


लॉकडाउन से पहले भी प्रदेश में ऐसी सियासी चर्चाएं चली थीं, जब भाजपा ने कांग्रेस के बराबर राज्यसभा चुनाव में दो प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया था।

इस चुनाव को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के मीडिया में बयान कि पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश पर हमने राज्यसभा की दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है।

कहा था, “हमें पूरी उम्मीद है कि राज्य सरकार की कार्यशैली से नाराज निर्दलीय, कांग्रेस एवं अन्य पार्टियों के कई विधायकों का समर्थन मिलने की उम्मीद है।”

लेकिन कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में राज्यसभा चुनाव टल गया और ऐसी अटकलों पर विराम सा लग गया, लेकिन अब भी फिर से सियासी चर्चाएं गरम होने लगी हैं।

जिसकी बड़ी वजह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां एवं प्रदेश के पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह का ट्विटर पर एक-दूसरे की जमकर प्रशंसा करना है और राजनीतिक विश्लेषक विश्वेन्द्र सिंह का समर्थन सचिन पायलट को मानते हैं।ऐसे में अब प्रदेश में नई सियासी सरगर्मियां फिर से जोड़ पकड़ रही हैं।

ताजा मामला यह है कि पिछले दिनों कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर आरटीडीसी पर लग रहे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से करवाने का आग्रह किया, इस पत्र को उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया।

इस पत्र को लेकर विश्वेंद्र सिंह की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने ट्विटर पर प्रशंसा कर लिखा, ‘महाराज साहेब प्रणाम, आपका यह अंदाज अच्छा है’।

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पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भी ट्विटर पर ही जवाब दिया, उन्होंने सतीश पूनियां को ट्वीट करते हुए लिखा ‘भाई साहब प्रणाम, आप जमीन से जुड़े हुए व्यक्तित्व के धनी हैं, हम सभी का लक्ष्य समाज में सरकार के माध्यम से स्वच्छता, शुचिता और उच्च मानवीय मूल्यों की स्थापना करना है, जिसके लिए हम सब प्रयासरत हैं’।


इस पत्र को लेकर इन दोनों दिग्गज नेताओं ने भले ही एक-दूसरे की तारीफ की है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे जयपुर से लेकर दिल्ली तक नये समीकरणों के तौर पर देख रहे हैं।

माना जा रहा है कि सचिन पायलट को लेकर फिर से भाजपा ने फील्डिंग शुरू कर दी है, जिसमें भाजपा के केन्दीय नेतृत्व के निर्देश पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां इस काम में पर्दे के पीछे से लगे हो सकते हैं।

जिसके लिए वे विश्वेन्द्र सिंह के माध्यम से भी सचिन पायलट को लेकर नये सियासी समीकरणों की पटकथा लिख रहे हों, और सतीश पूनियां सचिन पायलट कैंप से भी लगातार संपर्क में हो सकते हैं।

सियासी जानकार यह भी मान रहे हैं यदि सचिन पायलट भाजपा में आते हैं तो विश्वेन्द्र सिंह के भाजपा में आने की भी बड़ी संभावना बन जाती है।

इन दोनों नेताओं के साथ भरतपुर, धौलपुर, करौली, अलवर, नागौर, अजमेर और शेखावाटी के कई कांग्रेसी, एवं अन्य दलों के विधायक एवं नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

वैसे विश्वेन्द्र सिंह कई बार गहलोत सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा चुके हैं, वे खुद को मिले मंत्रालय से भी खुश नहीं नजर नहीं आ रहे हैं, जैसा उनके बयानों से लगता है।


मध्यप्रदेश की तरह आने वाले दिनों में राजस्थान में यदि नये सियासी समीकरण बनते हैं और सचिन पायलट कैंप भाजपा में शामिल होता है तो ऐसी स्थिति बन सकती है कि सचिन पायलट को भाजपा केन्द्र में मंत्री बनाने का ऑफर दे सकती है।

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या फिर राजस्थान में डिप्टी सीएम के साथ कई अहम मंत्रालय एवं इनके समर्थक विधायकों को भी मंत्रालय देने का समझौता हो सकता है।

अगर सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए भाजपा केन्द्रीय आलाकमान के सामने मांग रखते हैं तो शायद ही भाजपा इसके लिए तैयार होगी, क्योंकि भाजपा के प्रदेश में एक करोड़ से अधिक सदस्य हैं।

मजबूत काडर पार्टी का यहां तैयार हो चुका है और ऐसी सियासी चर्चाएं प्रदेशभर में हैं कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व राजस्थान में संघनिष्ठ डॉ. सतीश पूनियां के जरिए नया नेतृत्व तैयार करने का मन बना चुका है।

कुछ महीने पहले ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए सतीश पूनियां ने लॉकडाउन अवधि में भी प्रदेशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से करवाए जा रहे राहत कार्यों को लेकर भाजपा को एक मजबूत सामाजिक संगठन की शक्ल देने में भी सफलता हासिल कर ली है।

जिसको लेकर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार माना जा रहा है कि पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व भी खुश नजर आ रहा है।

वैसे संघ पृष्ठभूमि से आने वाले सतीश पूनियां के लिए राह आसान नहीं है, भले ही पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व इनको पूरी तरह सपोर्ट कर रहा हो, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इनकी धुर विरोधी मानी जाती हैं।

जिनके बारे में यह चर्चाएं खूब चलती हैं वे प्रदेश में पूनियां को सियासी नुकसान पहुंचाने की हर कोशिश में लगी हैं, इसको लेकर उन्होंने विधानसभा उपचुनाव से लेकर निकाय चुनाव तक खूब सियासी अडचनें डालने की कोशिश की, जो पूरी प्रदेश की जनता को पता है।

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भले ही वे इन दिनों दिल्ली में क्यों ना हों पर फोन के जरिए अपने गुट के नेताओं से प्रदेश की सियासी नब्ज टटोलती रहती हैं।

पूनियां के लिए यह एक सकारात्मक पहलू हो सकता है कि प्रदेश के ज्यादातर भाजपा विधायक, सांसद एवं प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके नेतृत्व को स्वीकार करने लगे हैं।

भले ही राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री वी सतीश, प्रदेश के पार्टी प्रभारी अविनाश खन्ना, प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर पूनियां के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं।

भले ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता राजेन्द्र राठौड़ भी उनके कुशल संगठन नेतृत्व क्षमता को समर्थन के साथ स्वीकार करते हों, लेकिन पूनियां के लिए राह आसान नहीं है।

प्रदेश में कांग्रेस की गहलोत सरकार से मुकाबला करने के साथ पूनियां का मुकाबला पार्टी में हाशिये पर कर दी गईं वसुंधरा राजे एवं उनके गुट से भी है, भले ही खुलकर ना सही, लेकिन अंदरूनी तौर पर जो चल रहा है, वो मीडिया के माध्यम से समय-समय पर बाहर आ ही जाता है।

यह पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के सामने भी चुनौती है कि किस तरह प्रदेश में वे सतीश पूनियां के नेतृत्व को मजबूत करने में ढाल बनकर खड़ा रहे।


प्रदेश में नए सियासी समीकरणों की जब बात चलती है तो सतीश पूनियां, सचिन पायलट दो बड़े किरदार सुर्खियों में आते हैं अब तीसरे किरदार के रूप में विश्वेन्द्र सिंह भी सामने आ रहे हैं।

देखना होगा कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व सचिन पायलट को लेकर क्या नई सियासी चाल चलता है, सचिन पायलट राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहेंगे या केन्द्र में जाएंगे?

यह सब भविष्य बताएगा, और यह भी भविष्य बताएगा कि इन सियासी चर्चाओं में से कितनी हकीकत निकलती हैं या सिर्फ चर्चाएं ही बनकर रह जाएंगी।