अर्थशास्त्री के विचार: चीन एवं भारत के मध्य व्यापारिक सम्बन्ध का भविष्य

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चीन के पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने भारत में घर का क़र्ज़ बांटने वाली सबसे बडी ग़ैर बैंकिंग संस्था, हाउसिंग डेवेलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी 0.8 प्रतिशत से बढ़ा कर 1.01 फ़ीसदी कर ली है।

तब से भारत सरकार ने चीन की तरफ से होने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को रोकने के लिए कदम उठा लिए है। इसके अंतर्गत चीन की तरफ से आने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से पूर्व भारत सरकार की अनुमति आवश्यक कर दी गई है।

इससे पूर्व यह अनुमति केवल पाकिस्तान एवं बांग्लादेश को लेनी होती थी। चीन की तरफ से भारत को इस कदम का विरोध किया गया है और यह दलील दी गई कि कि यह विश्व व्यापार संगठन के निर्देशों के विरुद्ध है।

भारत से पूर्व यूरोपीय संघ ने भी कोरोना संकट के मध्य वहां की कंपनियों में बढ़ती चीनी हिस्सेदारी को रोकने के लिए इसी प्रकार चीनी प्रत्यक्ष निवेश को रोकने के लिए उपाय किये है।

भारत को चीन का निर्यात पिछले साल 2.1 प्रतिशत बढ़कर 515.63 बिलियन युआन हो गया, जबकि भारत का चीन से आयात 0.2% घटकर 123.89 बिलियन युआन हो गया।

2019 में भारत के लिए व्यापार घाटा डॉलर 391.74 बिलियन युआन था। भारत–चीन में भारत का व्यापार घाटा 2018 में 56.77 बिलियन डॉलर हो गया। व्यापार में गिरावट के लिए दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने मंदी को जिम्मेदार ठहराया गया था।

भारत काफी समय से चीन से उसके आईटी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र खोलने की मांग कर रहा है, ताकि वह अपना निर्यात बढ़ा सके।

चीन की बाइटडांस के स्वामित्व वाला टिकटॉक, पहले से ही यूट्यूब को पछाड़ते हुए भारत में सबसे लोकप्रिय ऐप में से एक बन चुका है। चीन के मोबाईल हैंडसेट का भारत में 72 प्रतिशत मार्केट शेयर है।

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भारत में शियोमी हैंडसेट का बाजार अब सैमसंग स्मार्टफोन्स से ज्यादा हैं। हुआवेई राउटर व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

जिन कंपनियों के प्रमुख चीनी निवेश हैं, उनमें बिग बास्केट, बायजू, डेल्ही, ड्रीम 11, फ्लिपकार्ट, हाइक, मेकमायट्रिप, ओला, ओयो, पेटीएम, पेटीएम मॉल, पॉलिसीबाजार, क्विकर, रिविगो, स्नैपडील, स्विगी, उडान, जोमाटो आदि।

चीन के आलीबाबा एवं टेंसेंट कम्पनी पहले से भारत में भारी विनियोग के लिए जाने जाते है जो भारत की कई स्टार्टअप में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।

भारत में स्नेपडील में चीन की कंपनियों के 700 मिलियन डॉलर, पेटियम में 550 मिलियन डॉलर, ओला में 500 मिलियन डॉलर, स्वीगी में 500 मिलियन डॉलर, बिग बास्केट में 250 मिलियन डॉलर, जोमेटो में 200 मिलियन डॉलर हिस्सेदारी है।

इसके अलावा भारत में टिकटोक, लाइकी, यूसी ब्राउसर, हेलो, शेयरइट प्रमुख चीन की एप्लिकेशन हैं, जो भारत में उपयोग होती हैं। जूम एप्लीकेशन में भी भारत सरकार की तरफ से दिशानिर्देश आने की बाद इसके उपयोग में कमी हुई है।

अब तक, भारत सरकार ने चीन को कोरोनोवायरस या उसके प्रचार के लिए दोषी नहीं ठहराया है। चीन ने यह कहकर भारत को लुभाने की कोशिश की है कि वह “महामारी की रोकथाम और नियंत्रण और निदान और उपचार में अपने अनुभव को साझा करने के लिए तैयार है।”

महामारी में चीन की भूमिका से चीन-भारतीय संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। यदि चीन चाहता तो महामारी के विस्तार को समय पर रोका जा सकता था।

चीन ने ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को वुहान वायरस के बारे में चिंताएं बढ़ाने से रोक दिया था। डब्ल्यूएचओ अपने महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घिबेयियस के साथ चीन के “पारदर्शिता” के लिए उसकी प्रशंसा की।

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यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान महानिदेशक 2017 में चीन के समर्थन के द्वारा ही इस पद पर आये थे। हालांकि, भारत अब तक राष्ट्रीय लॉकडाउन के साथ देश के भीतर कोरोनोवायरस के अधिक प्रसार को नियंत्रित करने में कामयाब रहा है, किन्तु इसी के साथ अर्थव्यवस्था को नुकसान भी हो रहा है और यह संभव है कि भविष्य में भारत की जनता चीन को इस नुकसान के लिए दोषी ठहराएगी।

हालांकि, भारत द्वारा चीन को आधिकारिक रूप से दोष देने की संभावना नहीं है। पड़ोसी देशों खासकर चीन से आने वाले निवेश पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फैसले से स्टार्ट अप सेगमेंट पर असर पड़ सकता है।

चीनी निवेशकों ने पहले ही भारत के शीर्ष 30 यूनिकॉर्न में से 18 में प्रमुख हिस्सेदारी ले ली है। भारतीय स्टार्टअप, जो विदेशी उद्यम पूंजी पर निर्भर हैं एवं 1 बिलियन डॉलर से अधिक विदेशी वित्त से पोषित हों, वह यूनिकॉर्न कहलाते हैं।

भविष्य में में यह भी देखना होगा कि चीनी की बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी हुआवेई पर भारत सरकार की क्या रणनीति होती है, क्योकि अमेरिकी सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया है।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को अमेरिका निर्यात के लिए प्रतिबंध मुक्त करके भारत ने अमरीकी मित्रता को और मजबूत किया है, किन्तु अमेरिका हुआवेई की 5जी तकनीक को प्रतिबंधित करना चाहता है।

आज अमेरिका एवं चीन के मध्य चल रहे विवाद के कारण कई विदेशी विनिर्माण कम्पनियां चीन से पलायन की तैयारी कर चुकी हैं, वह भी भारत की तरफ देख रही हैं, क्योकि भारत सरकार ने निगम कर को घटा दिया है एवं यहां श्रम बहुतायत में उपलब्ध है।

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विदेशी विनिर्माण कम्पनीयों के श्रम कानून के सन्दर्भ में कुछ शंकाएं अवश्य हैं। इस कारण भारत सरकार को विदेशी विनिर्माण कम्पनीयों को भारत में आकर्षित करने हेतु प्रयास जरुर करने चाहिए, ताकि कोरोना महामारी के बाद भारतविनिर्माण के हब के रूप में विश्व में उभरे।

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डॉ. सुरेन्द्र कुलश्रेष्ठ
सहायक आचार्य, अर्थशास्त्र, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा