अम्बेडकर विवि के कुलपति डॉ. देवस्वरूप की नियुक्ति के साथ विवाद शुरू, क्या कहती है बार काउंसिल ऑफ इंडिया?

रामगोपाल जाट।

राजस्थान सरकार की अनुशंषा के बाद राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र के द्वारा 3 दिन पहले ही नियुक्त किए गए अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति डॉ देवस्वरूप की नियुक्ति के साथ ही विश्वविद्यालय की मान्यता को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है।

दरअसल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा देशभर में नए विधि विश्वविद्यालय, विधि महाविद्यालय और विधि संस्थान की मान्यता पर अगले 3 साल के लिए रोक लगा रखी है।

इसके बावजूद राज्य सरकार ने अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय में कुलपति के तौर पर डॉ. देवस्वरूप को नियुक्त कर इसी वर्ष से शैक्षणिक सत्र शुरू करने का फैसला किया है, जिसपर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक भले ही राज्य सरकार ने अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति कर शैक्षणिक सत्र शुरू करने का कार्य प्रारंभ कर दिया हो, लेकिन बीसीआई से मान्यता के बिना अगले 3 साल तक यहां अध्ययन करने वाले किसी भी छात्र की डिग्री को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता नहीं दिए जाने के कारण उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो जाएगा।

इसपर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा का कहना है कि अभी तक अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर की तरफ से बार काउंसिल ऑफ इंडिया को मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा की तरफ से 12 अगस्त 2019 को जारी किए गए पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि 12 अगस्त 2019 से अगले 3 साल तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार देश में किसी भी विधि विश्वविद्यालय, विधि महाविद्यालय और विधि संस्थान को मान्यता नहीं दी जा सकती।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मुताबिक देश भर में 1500 से अधिक ऐसे विधि संस्थान हैं, जो मान्यता के लिए आवेदन किए हुए हैं, लेकिन उनको मान्यता नहीं दी गई है। जानकारी के मुताबिक देशभर में खुले 90% से अधिक विधि संस्थान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अनुदान लेने के हकदार भी नहीं हैं।

यह भी पढ़ें :  जयपुर से नागौर तक चले बेनीवाल के रोड शो के काफिले ने ज्योति मिर्धा को चौंकाया

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार जिन विधि संस्थानों को अनुदान के लिए अयोग्य माना गया है, उनमें अधिकांश में शिक्षक, भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं का बड़ा पैमाने पर अभाव है।

इसी प्रकरण को लेकर दिल्ली के एक सांसद वेद प्रकाश शर्मा ने भी संसद में प्रकरण को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई थी कि देश में विधि संस्थान कुकरमुत्तों की तरह खुल गए हैं, जिनमें सुविधाओं का भारी अभाव है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के द्वारा जारी किए गए पत्र के मुताबिक बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 11 अगस्त 2019 को रिजुलेशन पारित कर यह पत्र जारी करते हुए 12 अगस्त 2019 से लेकर अगले 3 साल तक देश में किसी भी विधि संस्थान को मान्यता नहीं देने के निर्देश दिए थे।

इधर, राजस्थान सरकार के द्वारा अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में सचिव डॉ. देवस्वरूप को 3 दिन पहले ही अगले 3 साल के लिए कुलपति के तौर पर नियुक्ति दी गई है।

राज्य सरकार के द्वारा कुलपति नियुक्त किए जाने के बाद मंगलवार को डॉ. देवस्वरूप ने जयपुर में अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर पदभार भी ग्रहण कर लिया है।

उनका मंगलवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में जबरदस्त स्वागत हुआ है, क्योंकि पूर्व में उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति के तौर पर साल 2014 तक कार्य किया था।

जानकारी के मुताबिक नवनियुक्त कुलपति डॉ. देवस्वरूप इसी प्रकरण के समाधान को लेकर दिल्ली जाएंगे, जहां पर वो शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से मुलाकात करने वाले हैं।

यह भी पढ़ें :  अशोक गहलोत: अपने ही राजनीतिक गुरू की सियासी हत्या कर संभाली थी प्रदेश की कमान

डॉ. देवस्वरूप का कहना है कि सभी कार्य नियमानुसार किए जाएंगे और इसी सत्र से एकेडमिक सेशन शुरू किया जाएगा। इसको लेकर सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं।

उनके मुताबिक बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी मान्यता लेकर विवि स्थापना से लेकर शैक्षणिक सत्र तक सारे कार्य विधि और बीसीआई के नियमानुसार किए जाएंगे। मान्यता के लिए जल्द ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया को आवेदन किया जाएगा।

इस मामले को लेकर राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में एक विधायक के द्वारा सरकार से सवाल भी किए गए हैं। विधानसभा में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार से पूछा गया है कि-

1. भारतीय विधिक परिषद, यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा लिए गए निर्णय, जिसकी सूचना चेयरमैन बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा 12 अगस्त 2019 को जारी कर देश में विधि के नए संस्थान खोलने पर 3 वर्षों से रोक लगा दी है, इस पर राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने क्या कार्रवाई की है?

2. विधि परिषद के इस निर्णय के होते हुए अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली विधि की डिग्री को विधि परिषद से कैसे मान्यता प्राप्त की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी भी दी जाए?

3. क्या उच्च शिक्षा विभाग या अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर ने विधि परिषद परिषद के नियम 2008 के नियम 14 के तहत विधि की डिग्री की मान्यता प्राप्त कर ली है, तो विधि परिषद द्वारा जारी मान्यता का पत्र सदन के पटल पर रखा जाए, अगर अभी तक नहीं की है तो क्या 12 अगस्त 2019 से पूर्व मान्यता हेतु आवेदन विधि परिषद को कर दिया गया है?

4. अगर उच्च शिक्षा विभाग या अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन विधि परिषद को नहीं किया तो 3 वर्षों तक विश्वविद्यालय की विधि की डिग्री को मान्यता नहीं होने के कारण विधि के छात्रों के भविष्य को बर्बाद होने से कैसे बचाया जायेगा?

यह भी पढ़ें :  राज्य में सत्ता परिवर्तन का ड़र यहां तक पहुंचा

5. क्या राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबद्ध सरकारी व गैर सरकारी विधि महाविद्यालय को इन सभी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से हटाकर अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाएगा?

6. निधि परिषद के निर्णय 12 अगस्त 2019 के होते हुए विश्वविद्यालय को मान्यता नहीं मिली होने के कारण महाविद्यालय के छात्रों की विधि की डिग्री मान्य कैसे होगी?

7. जब विधि के संस्थान या विधि के सेंटर की परिभाषा में 2008 के नियमों के नियम 2 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय भी सम्मिलित है और विधि परिषद का 12 अगस्त 2019 का निर्णय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय एवं सभी विधिक शिक्षण केंद्र पर लागू होते हैं, तो क्या राज्य की गैर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अंबेडकर विश्वविद्यालय विधि परिषद के निर्णय नहीं होगी?

8. कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, मेडिकल विश्वविद्यालय और संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उन्हें संबंधित विषय विशेषज्ञ लोगों को नियुक्त किया जाता है, तो अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय में विधि के विशेषज्ञ को नियुक्त नहीं कर राज्य सरकार ने विधिक शिक्षा एवं विधि विशेषज्ञों को हतोत्साहित करने का कदम क्यों उठाया है?

9. देश की सभी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विधि के विशेषज्ञों को ही कुलपति नियुक्त किया गया है, तो अंबेडकर विश्वविद्यालय में ऐसा क्यों नहीं किया गया है?

10. अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के अधिनियम में वर्णित विश्वविद्यालय के उद्देश्यों के तहत विधि शिक्षा एवं विधि शोध कार्य करवाए जाने के प्रावधान हैं, इन प्रावधानों की पूर्ति एवं गैर विधि विषय के कुलपति द्वारा करना असंभव प्रतीत होता है, क्या सरकार ने इस पर विचार किया है?