सदन के फ्लोर पर फ्लॉप भाजपा सड़क पर मजबूती दिखाने का नाकाम प्रयास कर रही है!

    सदन के फ्लोर पर फ्लॉप भाजपा सड़क पर मजबूती दिखाने का नाकाम प्रयास कर रही है!
    सदन के फ्लोर पर फ्लॉप भाजपा सड़क पर मजबूती दिखाने का नाकाम प्रयास कर रही है!

    रामगोपाल जाट
    राजस्थान की भाजपा विधानसभा के भीतर फ्लोर में फ्लॉप साबित हो गई है। पार्टी के कई बड़े नेता सदन के अंदर अपनी—अपनी ढ़पली बजाते हुए नजर आते हैं। यह बात सही है कि नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़, भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां, पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी, मदन दिलावर, पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी समेत विधायक रामलाल शर्मा और अशोक लाहोटी भी सदन में अच्छा भाषण देते हैं, किंतु एक बार भी ऐसा नहीं लगा है कि भाजपा एकजुट होकर किसी मुद्दे पर सत्तापक्ष से लोहा लेने की हिमाकत करने का प्रयास भी कर रही है।

    सबसे मजेदार और भाजपा के लिए सोचनीय बात यह है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब तक एक बार भी सदन में बोलने का प्रयास नहीं कर पाए हैं। हर घटना पर ट्वीट कर सुर्खियों में रहने वालीं और 2018 में भाजपा को सत्ता से बाहर करने वाले राजे सदन में अलबत्ता तो उपस्थित ही नहीं होती हैं, बल्कि सदन में उनका एक शब्द भी नहीं बोलना भाजपा को भारी पड़ रहा है।

    नेता प्रतिपक्ष होने के नाते विधानसभा के अंदर की गतिविधि पर गुलाबचंद कटारिया ही भाजपा की लीडरशिप करते हुए सफलता या असफलता के लिए जिम्मेदार हैं, किंतु उनके खुद के भाषण के अलावा इस सत्र में कभी उन्होंने भाजपा को एकजुट करने की कोशिश भी की हो, ऐसा नहीं लगा है।

    परिवहन विभाग में करोड़ों रुपयों का घोटाला उजागर होने के बाद भी भाजपा विभाग के मंत्री प्रताप सिंह खाचरिवास का इस्तीफा नहीं ले पाई है, जबकि इतने बड़े मुद्दे पर विपक्ष मंत्री को इस्तीफा देने को मजबूर कर सकता है। जबकि मंत्री प्रताप सिंह खाचरिवास को अभी तक कोई दिक्कत होती नजर नहीं आ रही है।

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    सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि सबकुछ ‘मैनेज’ हो गया है। भाजपा के सूत्र दावा करते हैं कि प्रताप सिंह ने कटारिया से ‘आर्शीवाद’ के तौर पर बचाव मांगा है, जबकि सजातीयता के चलते राजेंद्र सिंह राठौड़ को भी दबाव में ले लिया गया है। कैलाश मेघवाल बोलते ही नहीं, लाहोटी खुद ही फंसे हुए हैं। ऐसे में खाचरिवास को कोई दिक्कत कैसे हो सकती है?

    इधर, सदन से बाहर अध्यक्ष होने के नाते सरकार से जवाब मांगने, प्रदर्शन करने, धरना देने और संबंधित विभाग के मंत्री से इस्तीफा लेने का दबाव बनाने की जिम्मेदारी सतीश पूनियां की ही है। सतीश पूनियां की अभी तक नई टीम आई नहीं है, किंतु फिर भी उन्होंने सदन के बाहर प्रदर्शन कर, राज्यपाल को ज्ञापन देकर और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाकर परेशान करने का विफल प्रयास जरुर किया है।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा सदन के भीतर और सदन के बाहर भी दो गुटों में बंटी हुई है? क्या सदन में गुलाबचंद कटारिया और सदन के बाहर भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां को अपनी पार्टी के कुछ बड़े नेताओं द्वारा फ्लॉप करने की साजिस की जा रही है?

    इतिहास इन बातों से भरा पड़ा है कि इस तरह से भ्रष्टाचार के बड़े मामले सामने आने के बाद मंत्री क्या, मुख्यमंत्रियों तक को इस्तीफा देना पड़ गया है। जबकि, एंटी क्रप्शन ब्यूरो द्वारा अवैध उगाही करते परिवहन विभाग के अधिकारियों से 1.20 करोड़ रुपए तो नकद ही पकड़ लिए हैं।

    विधानसभा का मौजूद बजट सत्र अभी 12 मार्च तक चलने का कार्यक्रम तय हो चुका है। यदि इस दौरान भी विपक्ष कुछ खास कदम उठाकर मंत्री से इस्तीफा नहीं ले पाया तो यह माना जाएगा कि संख्या बल में बड़ा होने के बाद भी विपक्ष पूरी तरह से पंगू ही है।

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