Jaipir news

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और उनकी ही सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अलावा देश के इतिहास में एक मात्र दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनने वाले स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर से नफरत है।

इस बात को सिद्ध किया है खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और राजस्थान की शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने। दोनों नेताओं ने समय-समय पर वीर सावरकर और आरएसएस के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है, तो इसके साथ ही सत्ता में काबिज होने के बाद सबसे पहले स्कूलों से इन तीनों नेताओं की तस्वीरें हटाने का कार्य किया है।

दिसंबर 2018 में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की सरकार राजस्थान की ताबीज होने के बाद शिक्षा मंत्री बने गोविंद सिंह डोटासरा ने सबसे पहले स्कूली शिक्षा की किताबों में से वीर सावरकर का नाम हटाने का फैसला किया। जिसके ऊपर राजस्थान की राजनीति में बढ़ाओ बार आया, लेकिन सरकार की हठधर्मिता के आगे किसी की नहीं चली।

अभी 2 दिन पहले ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने स्कूलों की किताबों में से नाम हटाने और फोटो हटाने के बाद स्कूलों में लगी वीर सावरकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीरें भी हटाने का आदेश दे दिया है।

इसको लेकर राजस्थान विधानसभा (Assembly of Rajasthan) में भाजपा (BJP) के द्वारा विरोध किया गया और साथ ही साथ राजस्थान के अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार को चेतावनी देते हुए कहा गया कि अगर महापुरुषों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव किया जाएगा, तो भाजपा (BJP) इसका जमकर विरोध करेगी और सरकार को चैन की नींद नहीं सोने देगी।

दूसरी तरफ आईबी के द्वारा राजस्थान, महाराष्ट्र और पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय और पदाधिकारियों पर अलकायदा के द्वारा हमला किए जाने की चेतावनी देने के बाद भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने राज्य में स्थित आरएसएस के कार्यालयों और पदाधिकारियों को सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई है।

इसी तरह के तमाम ऐसे मामले हैं जो यह दर्शाते हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने केवल वीर सावरकर से नफरत करते हैं, बल्कि आरएसएस और उसके लोगों से भी बेहद वैमनस्य और हीरे की भावना रखते हैं।

इतना ही नहीं, अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के साथ-साथ उनके मंत्रिमंडल में सदस्य और प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी अपने बयानों कार्य और तमाम तरह की गतिविधियों से साबित करते हैं कि उनको राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वीर सावरकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी से ईर्ष्या है।

सर्वविदित है कि राजस्थान ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बहुत बड़ा योगदान है। खासतौर से भारतीय जनता पार्टी को बनाने और उसके बाद इस दल को चरम तक पहुंचाने में आरएसएस की सबसे बड़ी भूमिका रही है।

देश की राजनीति में कांग्रेस (Congress) का एकछत्र राज हुआ था। कोई भी राजनीतिक दल आज तक कांग्रेस (Congress) को सत्ता से बेदखल नहीं कर पाया। लेकिन जब से भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ है और भाजपा (BJP) ने चरम सीमा को छूआ है, तब से लेकर आज तक कांग्रेस (Congress) पार्टी सत्ता से नहीं हो पाई है। शायद यही दर्द है जो अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और गोविंद सिंह डोटासरा को नींद नहीं आने देता है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक तरफ जहां पर दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन है, तो दूसरी तरफ आरएसएस में से ही निकली राजनीतिक पार्टी भाजपा (BJP) दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है।