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मंगलवार, सितम्बर 22, 2020

अरविंद केजरीवाल को तीसरी बार जिताने वाले प्रशांत किशोर क्या “फैडरल फ्रंट” ( संघीय मोर्चे) की दाई-माई बनेंगे?

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नई दिल्ली।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली शानदार सफलता के बाद एक व्यक्ति एक ऐसे व्यक्ति का उल्लेख करना जरूरी है, जिसे इस सफलता का लगभग उतना ही श्रेय मिल रहा है, जितना अरविंद केजरीवाल को और यह उल्लेखनीय व्यक्ति हैं प्रशांत किशोर।

प्रशांत किशोर के प्रशंसक उनकी जबर्दस्त प्रशंसा करते हुए उन्हें एक रणनीतिकार तथा चुनाव का जादूगर कहते हैं। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर के बिना आम आदमी पार्टी 62 सीटें हरगिज़ नहीं जीत सकती थी।

उनके प्रशासन के अनुसार यह किशोर की विशेष रणनीति ही तो थी, जिसने अमित शाह के शक्तिशाली चुनावी तंत्र को चतुराई से मात देने में केजरीवाल की मदद की। कुछ ऐसे आलोचक हैं और बाल की खाल निकालने वाले भी हैं जो उन्हें कंप्यूटर ज्ञान के एक ऐसे सेल्समैन की के ज्यादा कुछ नहीं मानते जो प्रचार एवं दुष्प्रचार की कला में पारंगत हैं।

उनकी नजर में वे एक ऐसे पब्लिक रिलेशंस एजेंट मात्र हैं, जो चिकनी चुपड़ी तथा बहुत बड़े बजट के विज्ञापनों के जरिए ग्राहक की मोहक तथा प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक मार्केटिंग तकनीकों का को काम में लेते हैं।

वह जो कुछ भी हैं या नहीं हैं, लेकिन एक चीज तो पक्की है कि इस घड़ी प्रशांत किशोर की जबरदस्त मांग है। प्रत्येक मुख्यमंत्री उनकी सेवाएं खरीदना चाहता है। इनमें शामिल हुआ नवीनतम नाम आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगमोहन रेड्डी का है।

वहां के स्थानीय अखबार अपने मुखपृष्ठ पर खबर छाप रहे हैं “मुख्यमंत्री ने किशोर के साथ एकांत में मीटिंग करते हुए” अखबारों की सुर्खियां ने। कथित रूप से ऐसे स्तब्धकारी अनुमान की गुंजाइश पैदा कर दी है कि कोई जबरदस्त उठापटक वाली राजनीतिक घटना घट सकती है।

बताया जा रहा है कि इस प्रकार की आशा एवं अपेक्षा के आसार चेन्नई से लेकर कोलकाता तक कई राज्यों की राजधानियां में दिख रही हैं। यही कारण है कि प्रशांत किशोर की सेवाएं द्रमुक के एम. के. स्टालिन तथा तृणमूल की ममता बनर्जी ने भी ले रखी हैं।

ऐसी भी अफवाह है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री भी किशोर की जादुई प्रभाव में आ गए हैं तथा उनकी सलाह के पर के चंद्रशेखर राव अपना तटस्थ राजनीतिक मुद्रा को छोड़ कर देते तथा पूरी ताकत के साथ उछलकर भाजपा विरोधी तथा कांग्रेस विरोधी गाड़ी पर सवार होने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में ऐसी सुगबुगाहट है कि पूरे देश की क्षेत्रीय पार्टियों के शीर्ष नेतागण प्रशांत किशोर की नई महत्वाकांक्षी योजना के अनुरूप अपनी रणनीतियां फिर से तैयार कर रहे हैं तथा अपने विकल्पों पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

गंभीर आर्थिक गिरावट राष्ट्रव्यापी असंतोष और मोदी मॉडल पर घटते विश्वास को देखते हुए क्षेत्रीय दलों में यह धारणा रही है कि फेडरल फ्रंट संघीय मोर्चा के लिए यह एकदम सही समय है।

यह आइडिया नया नहीं है, बल्कि प्रशांत किशोर को ऐसे आदमी के रूप में देखा जा रहा है जो इस विचार को मूर्त रूप दे सकते हैं। वे स्वयं को गैर राजनीतिक मिडिलमैन के रूप में प्रस्तुत करने की महत्वाकांक्षा छिपा भी नहीं पा रहे हैं। वे खुद को ऐसा व्यक्ति बता रहे हैं जो एक ऐसा राजनीतिक गठबंधन कर सकता है, जो एक ताकतवर राष्ट्रीय करने की सामर्थ्य रखता है।

ब्लूप्रिंट के अनुसार प्रशांत की योजना अगले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के मुकाबले प्रधानमंत्री के संभावित चेहरे के रूप में अरविंद केजरीवाल को प्रस्तुत करने की है। अधिकांश विश्लेषकों की राय में आगामी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले हो सकते हैं।

कम से कम कुछ क्षेत्रीय दलों को नेता देश की बिगड़ती सामाजिक राजनीतिक माहौल को देखते हुए मध्यावधि चुनाव की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। इनमें से कुछ अस्थाई तौर पर अरविंद केजरीवाल को आम आदमी पार्टी के लिए राष्ट्रीय नेता के रूप में प्रस्तुत करने के खिलाफ नहीं है, अभी शुरुआती दौर में है।

पर यह उस रणनीति का भाग है, जिसके तहत प्रशांत किशोर को ने वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से बात की है।

उन्होंने सलाह दी है कि वे किनारे पर ना बैठे रहें, बल्कि नागरिकता संशोधन कानून एवं राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण पर विरोध दर्ज करवा कर अपनी पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि बनाएं।

कहा जा रहा है कि, चूंकि प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसलिए उनकी सलाह पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

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अरविंद केजरीवाल को तीसरी बार जिताने वाले प्रशांत किशोर क्या "फैडरल फ्रंट" ( संघीय मोर्चे) की दाई-माई बनेंगे? 3
Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिआ संपादक .

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