भारत की सबसे खूबसूरत महारानी मुस्लिम बनीं, दूसरे राजा के साथ ब्याही, 2200 करोड़ की मालकिन बनीं, आखिर मुफलिसी में दुनिया छोड़ दी

    रामगोपाल जाट

    भारत के आजाद होने से पहले यहां पर कई खूबसूरत महारानियां चर्चा का विषय रही हैं। जयपुर राजघराने की महारानी गायत्री देवी उनमें से एक थीं। हालांकि, अपनी सादगी और संस्कृति के लिए आज भी जयपुर की महारानी गायत्री देवी का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है।

    अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया को दीवाना बनाने वालों में भारत की एक और महारानी का नाम सामने आता है। जिन्होंने 3 बच्चे पैदा होने के बाद दूसरे महाराजा से प्यार किया, मुस्लिम धर्म ग्रहण कर के पहले पति से तलाक लिया और महाराजा प्रताप गायकवाड से शादी करके एक बच्चा पैदा किया। आखिर 2200 करोड़ की मालकिन बनीं, और आखिर में मुफलिसी के कारण दुनिया छोड़ दी।

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    महारानी सीता देवी अपने पति बड़ौदा के महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड के साथ।

    इन खूबसूरत महारानी का नाम था सीता देवी। सीतादेवी इतनी बेइंतहा खूबसूरत थी कि उनसे जो मिलता था वह मोहित हुए बिना नहीं रहता था। सीता देवी का विवाह तेलगु रियासत के एक जमीदार से हुआ था। उनके 3 बच्चे हुए, लेकिन हाई प्रोफाइल सोसाइटी में उठने बैठने के कारण उनके मुलाकात बड़ौदा के महाराजा प्रताप गायकवाड से हुई और उनको दिल दे बैठीं।

    बड़ौदा के महाराजा प्रताप गायकवाड को उस वक्त देश के सबसे अमीर राजघरानों में से माना जाता था। बेहद उच्च क्लास के लोगों के साथ उठना बैठना और हाई प्रोफाइल सोसाइटी में जीने की आदी सीता देवी को प्रताप गायकवाड से प्यार हो गया था।

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    सीतादेवी भारत की दो नंबर की सबसे खूबसूरत महिला बताई जाती थी, तब वह हाई प्रोफाइल सोसाइटी में उठती बैठती थी।

    महारानी सीता देवी इतनी आकर्षक थीं कि न केवल भारत में, बल्कि यूरोप में भी जब वह मोनाको में रहने लगे तो तहलका मच गया। इससे भी बड़ा शहर का तमाशा जब बड़ौदा के महाराजा प्रताप गायकवाड के साथ उनको प्यार हुआ, और उन्होंने मुस्लिम धर्म ग्रहण कर अपने पति को तलाक देने का फैसला किया।

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    सीता देवी का जन्म मद्रास में हुआ था। उनके पिता राव वेंकट महिपति सूर्या राव पीतमपुर छोटी तेलगु रियासत के जमीदार थे। उनका विवाह एमआर अप्पाराव बहादुर के साथ हुआ था। अप्पाराव खुद भी एक रियासत के जमीदार थे। अप्पा राव के और सीता देवी के 3 बच्चे हुए। लेकिन 3 बच्चे पैदा होने के बाद भी सीता देवी की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई।

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    यूरोप के मोनाको में रहते हुए महारानी सीता देवी अपने घर चली जिंदगी और खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हो गई थी।

    1946 में मद्रास हॉर्स रेस कोर्स में सीता देवी की मुलाकात बड़ौदा के महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड के साथ हुई। प्रताप सिंह गायकवाड की रईसी पूरे देश में प्रसिद्ध थे और जब सीता देवी के साथ उनकी मुलाकात हुई तो गायकवाड उनको दिल दे बैठे। सीतादेवी भी प्रताप सिंह गायकवाड पर फिदा हो गई।

    सीता देवी जा 3 बच्चों की मां थी वही प्रताप सिंह गायकवाड विचार बच्चों की पिता थे उनके भी एक पहले से महारानी थी। लेकिन दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे थे, इसलिए प्रताप सिंह गायकवाड ने सीता देवी के साथ किसी भी तरह से विवाह करने का फैसला कर लिया।

    सीता देवी ने अपने पति अप्पाराव को तलाक दे दिया अप्पाराव को तलाक देने से पहले उनको मुस्लिम धर्म ग्रहण करना पड़ा। क्योंकि अप्पाराव ने न केवल सीता दिल को तलाक देने से इनकार कर दिया था, बल्कि प्रताप सिंह गायकवाड को भी सीतादेवी से दूर रहने की सलाह दी थी।

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    मद्रास में जन्मी सीता देवी के तीन बच्चे थे और उसके बाद उन्होंने मुस्लिम धर्म ग्रहण करके बड़ौदा के महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड के साथ दूसरा विवाह किया था, जिनके भी चार बच्चे थे।

    इसके बाद सीता देवी ने अपने पति को तलाक देने के लिए मुस्लिम बनना स्वीकार कर लिया। क्योंकि मुस्लिम महिला हिंदू व्यक्ति के साथ विवाह नहीं कर सकती, इसलिए उनको आसानी से तलाक मिल गया। लेकिन इसके साथ ही प्रताप सिंह गायकवाड के साथ में दिक्कत खड़ी होगी हिंदू धर्म अधिनियम के तहत पहली पत्नी होते हुए कोई भी व्यक्ति दूसरी शादी नहीं कर सकता। इसलिए उन्होंने तत्कालीन ब्रिटिश शासन से अपील की।

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    एक राज्य के महाराजा होने के नाते ब्रिटिश शासन ने उनकी अपील स्वीकार कर ली और महाराज को दूसरा विवाह करने की छूट दे दी। हालांकि, इसके साथ ही यह सर्दी भी लगा दी कि उनका बारिश उनकी पहली पत्नी का बड़ा बेटा होगा। प्रताप सिंह गायकवाड और सीता देवी का विवाह हो गया। क्योंकि सीतादेवी हाई प्रोफाइल सोसायटी में रहने की आदी थी, इसलिए उनको यूरोप में घुमाया गया।

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    महारानी सीता देवी अपने पहले पति अप्पा राव के साथ। उनके साथ में है, उनका बड़ा बेटा।

    पूरे यूरोप में घूमने के बाद सीता देवी को रहने के लिए मोनाको पसंद आया। प्रताप सिंह गायकवाड में मोनाको में सीता देवी के लिए एक महल नुमा किला तैयार करवाया। अब सीता देवी मोनाको में रहने लगी और वहीं पर प्रताप सिंह गायकवाड भी साल में दो-चार बार जाया करते थे। प्रताप सिंह गायकवाड और सीता देवी के एक बेटा हुआ।

    प्रताप सिंह गायकवाड ने सीता देवी को अथाह मात्रा में धन दिया। बताया जाता है कि सीता देवी के पास तब 2200 करोड़ रुपए की संपत्ति मोनाको में थी। काफी खर्चीले स्वभाव की सीता देवी ने इस संपत्ति को दोनों हाथों से लूटाया। कहा जाता है कि बेहद कर चले स्वभाव के होने के कारण सीता देवी के पास कुछ ही समय में संपत्ति कम पड़ने लगी।

    इसके बाद 15 अगस्त 1947 में देश आजाद हुआ तो जब भारत में सरदार पटेल ने 565 रियासतों का एकीकरण किया तो बड़ौदा महाराजा की संपत्ति का आकलन करने के लिए प्रशासक बिठाए। लेकिन बड़ौदा के महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड के पास कोई संपत्ति नहीं मिली।

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    महारानी सीता देवी जब बड़ौदा की महारानी बनी तो उसके बाद परमानेंट यूरोप के मोनाको में रहने लगी। इस दौरान उनकी उठ बैठ हाई प्रोफाइल सोसाइटी के लोगों के साथ थी।

    सरकार ने जांच करवाई तो पता चला कि प्रताप सिंह गायकवाड़ की सारी संपत्ति सीधा देवी के पास यूरोप के मोनाको में है। यूरोप के नियमानुसार भारत सरकार सीता देवी की संपत्ति वापस लाने में नाकाम रही। हालांकि देश की आजादी के बाद भी सीता देवी के खर्च करने की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और धीरे-धीरे उनकी सारी संपत्ति नीलाम हो गई।

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    एक समय ऐसा आया जब सीता देवी को अपने गहने और महंगे जेवरात बेचने पड़े। बताया जाता है कि कर्ज के बोझ तले दबी सीता देवी के इकलौते बेटे को शराब और ड्रग्स की लत पड़ गई थी। इसके कारण बेहद खूबसूरत और आकर्षक महिला के पास धन की कमी होने लगी।

    सीता देवी ने प्रताप सिंह गायकवाड से और ध्यान देने को कहा, जिसके ऊपर से दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई। प्रताप सिंह गायकवाड और सीता देवी के बीच अनबन शुरू हुई और आखिर दोनों का 13 साल बाद ही, वर्ष 1956 में तलाक हो गया। 4 बच्चों और 13 साल में 2 पति के बावजूद सीतादेवी अकेली हो गई।

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    अपने दूसरे पति और बड़ौदा के महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड के साथ शाही अंदाज में सिगार पीते हुए सीता देवी।

    अपनी तलाकशुदा जिंदगी में भी सीता देवी ने कोई कंप्रोमाइज नहीं किया और खर्च करने की प्रवृत्ति को जारी रखा। बताया जाता है कि आखिरी दिनों में सीता देवी के ऊपर काफी कर्जा हो गया था।

    इसके बाद वर्ष 1985 में ड्रग्स की ओवरडोज लेने के कारण एक दिन सीता देवी के इकलौते बेटे की भी मौत हो गई। इसके एक साल बाद, यानी वर्ष 1986 में दुनिया की खूबसूरत महिलाओं में से एक सीतादेवी भी दुनिया छोड़ कर चली गई।