भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया (Satish Poonia) के साथ नेशनल दुनिया के रामगोपाल जाट की बातचीत के विशेष अंश-

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के द्वारा मीडिया को विज्ञापन के मामले में राजस्थान को प्रेस कौन्सिल ऑफ इंडिया ने नोटिस दिया है। संभवत यह पहली बार है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेस काउंसिल ने नोटिस दिया है। दूसरी तरफ से नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में समेत पूरे भारत में 3 करोड लोगों तक पहुंचने की बात कर रही है। इन्हीं मामलों बात करने के लिए आज हमारे साथ हैं राजस्थान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया-

सवाल: राजस्थान में पहली बार ऐसा हुआ है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री को किसी मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने नोटिस दिया है, क्या कहना है?

जवाब: मैंने देखा उनका बयान और जिस तरीके की भाषा का इस्तेमाल मुख्यमंत्री जी ने किया है, आमतौर पर बहुत लंबा राजनीतिक अनुभव है, लेकिन इस तरीके की भाषा का उपयोग, यह आश्चर्य पैदा करता है यह। प्रेस के सामने विज्ञापन तभी मिलेगा, जब चाहोगे। इस किस्म की भाषा से एक गर्वान्वित दिखती है कि मुख्यमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति सीधे सीधे तौर पर पेश कर रहा है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का इनको नोटिस दिया जाना तो अपने आप को साबित करता है कि मुख्यमंत्री जिस तरीके की भाषा बोलते हैं, किसी भी तबके में यह शोभा नहीं देता है। कोटा में बच्चों की मौत पर इसी तरीके से बोले और अब जिस तरीके की भाषा बोली, वह वास्तव में निंदा योग्य है और निश्चित रूप से राजस्थान के मुखिया को नोटिस मिलना राजस्थान का भी अपमान है।

सवाल: कोटा में बच्चों की मौत के मामले में भी अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने बीते दिनों एक असंवेदनशील बयान दिया था, उसको लेकर भी BJP में कर रही है, क्या उसमें BJP की तरफ से आगे कोई कदम उठाया जाएगा, कोई आंदोलन किया जाएगा, सरकार को घेरने का प्रयास करने की रणनीति है?

जवाब: मुझे लगता है कोटा की घटना के मामले में सरकार खुद ब खुद फंस रही है। उनके मंत्री का आचरण ऐसा है कि उसका जवाब उनके पास नहीं था और अभी भी सही तरीके से सरकार पटरी पर आ नहीं रही है। अभी मैंने कल बयान सुना, यूडीएच मंत्रीजी का अस्पताल की घोषणा करी, अपने कोटे की घोषणा करी, कोई पूछने वाला चाहिए, कितने दिनों तक 2 महीने की घटना के बाद भी उन लोगों ने एक्शन जैसी कोई चीज नहीं करी, खाली बयान बाजी की बयानबाजी में भी आपस में उलझे थे। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बच्चों की मौत पर उलझे हुए हैं। मुख्यमंत्री का इस तरीके का संवेदनहीन बयान, होती रहती है और बच्चों की मौत हो जाती है। मुझे लगता है कि जिस तरीके की भाषा वो आपस में लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, कहीं नहीं कहीं पार्टी के भीतर भी इनमें विग्रह है, लेकिन इस विग्रह का राजस्थान की जनता को नुकसान हो रहा है। कोटा की घटना के बाद बीकानेर में, जोधपुर में सब जगह हमारे लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से जाकर, वहां पर उन चीजों को पूरा देखा है, रिपोर्ट में दिए हमने, वहां पर केंद्र नेतृत्व को, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को यह सारी रिपोर्ट दे दी है और उसी के कारण एम्स की टीम आई। दिल्ली से सांसदों की, मानवाधिकार परिषद के लोग आए, कुल मिलाकर इस मामले में राजस्थान शर्मसार हुआ, लेकिन मुझे लगता है कि सरकार अभी भी नींद में है, केंद्र ने यह जरूर कहा कि उनके तरफ से जो भी सहायता होगी मोहिया जरूर करवाई जाएगी।

सवाल: राजस्थान में तीन लाख जो हेक्टेयर जमीन है, उसमे टिड्डी दल 400 करोड की फसल को नष्ट कर चुकी है। राजस्थान की सरकार ने कोई सहायता मुहैया नहीं करवाई है, जबकि मुख्यमंत्री के लिए 214 करोड रुपए क्या हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए टेंडर हो चुके हैं, क्या कहना है आपका?

जवाब: मुझे लगता है कि टिड्डी वाले मामले में भी राजस्थान की सरकार को जिस तरीके से अलर्ट होना चाहिए था, गुजरात के में भी टिड्डी का आक्रमण हुआ था, लेकिन वहां सरकार ने अच्छा काम किया, वहां पर वहां के किसानों को पेस्टिसाइड्स को स्प्रे के लिए दिया, ट्रैक्टरों का किराया उनको दिया और पहले से वह अच्छी तरीके से टीम लगाकर उन्होंने उस को डिफ्यूज किया। मैं जब यहां भी पहुंचा, तो मुख्यमंत्रीजी का दौरा हो चुका था, गिरदावरी की घोषणा उन्होंने करी, लेकिन अभी तक जो राज्य मंत्री हरीश चौधरी जी हैं, उनका बयान देखा वह गिरदावरी की समीक्षा कर रहे हैं। सरकार गिरदावरी की समस्या से आगे बढ़ी नहीं है, उनके पास आपदा प्रबंधन का पैसा मिलता है, उसमें सरकार की प्राथमिकता नहीं है कि सहायता उनको दे, सकते थे, लेकिन सरकार मुझे लगता नहीं कि प्राथमिकता में टिड्डी के प्रभावित किसानों को जो फैसला करना चाहिए, किसानों को राहत देनी चाहिए थी, वह भी देने वाली नहीं है।

सवाल: केरल के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 9 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर कहा है कि लागू नहीं करेंगे, राजस्थान के मुख्यमंत्री ने ऐसा कहा है, क्या लगता है आपको कटारिया जी ने दो-तीन बार बोला है गहलोत की सात पीढ़ियों को लागू करना पड़ेगा?

जवाब: हमारे देश का संविधान फेडरल स्ट्रक्चर पर है। उसमें केंद्र और राज्य सूची के अलग-अलग विषय होते हैं। यह केंद्रीय सूची का विषय था, नागरिकता की मांग कांग्रेस (Congress) ने भी की, अन्य दलों ने भी की, समय-समय पर करते हैं और बहुत बड़ी तादाद में भारत में इस तरीके के विस्थापित हैं, जिनको नागरिकता मिली है। कांग्रेस (Congress) को लगता है कि इस नागरिकता का विरोध करके, तो फैशन हो गया है कि मोदी जी का विरोध करो और अच्छी पब्लिसिटी हासिल करो। गुस्सा किस बात का है कि मोदीजी का विरोध करना कांग्रेस (Congress) का शौक है। दूसरा यह कि संवैधानिक पद पर चुना व्यक्ति यदि संसद के कानून को चुनौती देता है, तो मुझे लगता है कि उनकी नियत में खोट है और अपने आप को सबसे बड़ा माने, ऐसा संभव नहीं है, जो संसद में कानून पारित किया उनको करना ही पड़ेगा। क्योंकि हमारे संविधान में जो केंद्र की सूची का विषय को लागू करना है, यह सरकार की प्राथमिकता भी है, उनका धर्म भी है। लेकिन यहां पर पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा है, जो वह इस समय कर रहे हैं।

सवाल: सीएए (CAA) के बाद कांग्रेस (Congress) ने अफवाह फैलाई और उसके बाद देश के मुसलमानों में एक भावना जागृत हुई और उन्होंने इसका विरोध किया। BJP ने कहा 3.50 करोड़ मुसलमानों के पास हम जाएंगे, अब तक कितने लोगों के पास गए और कब तक का यह लक्ष्य है?

जवाब: मुझे लगता है कि इस मामले में क्योंकि कांग्रेस (Congress) ने गुमराह किया और मुख्यमंत्री जी कहते थे की आवश्यकता क्यों पड़ी, तो आवश्यकता इसलिए थी कि कांग्रेस (Congress) ने गुमराह किया और यहां के किसी भी धर्म के व्यक्ति को यह भरोसा दिलाने के लिए कि उनकी नागरिकता किसी भी कीमत पर ले ली जाएगी, यह नागरिकता देने का प्रश्न और अनेक सरकारों में अनेक अवसरों पर अनेक देशों के जो भी विस्थापित थे, उनको नागरिकता दी, इंदिरा गांधी के समय युगांडा से विस्थापित हुए जिनको नागरिकता मिली, श्रीलंका से बड़ी तादाद में लाखों की तादाद में मुस्लिम बिरादरी के लोग थे, जिनको भारत की नागरिकता मिली है। अदनान सामी जैसे हुनरमंद गायक थे, उन्होंने भारत की नागरिकता इसलिए ली कि उनको लगता था कि उनकी कला का सम्मान भी होगा, सुरक्षित महसूस होंगे। तो मुझे लगता है कि जो जन जागरण का हमारा काम है, जो भोलेभाले लोग हैं, कम पढ़े लिखे लोग हैं, कांग्रेस (Congress) पार्टी वोट बैंक के लिए जिस तरीके से गुमराह करती है तो मुझे लगता है कि उनमें जन जागरण की जरूरत थी। धीरे-धीरे लोग समझ रहे हैं, लेकिन हमने मिस कॉल के जरिए भी और जनसंपर्क अभियान को जारी रखा, अभियान चलेगा और मुझे लगता है कि लोग इस विषय को समझेंगे।

सवाल: राजस्थान की सरकार ने 2 लाख किसानों का कर्ज माफ करने का दावा किया था, लेकिन सहकारिता के माध्यम से किसानों को मिलने वाला ऋण इस बार लक्ष्य से केवल 30% तक पहुंचा है। क्या लगता है राज्य सरकार इस मामले में विफल है?

जवाब: नंबर वन तो किसानों के साथ जो धोखा सरकार ने किया, उसूलों से किया जन घोषणा पत्र में पूरे कर्ज माफी की बात कही, अभी तक वह स्पष्ट नहीं कर पा रहे कितने किसानों का कितना कर्जा माफ हुआ। विधानसभा के पटल पर अनेक विधायकों ने प्रश्न पूछा, गोल गोल करके जवाब जरूर आता है तो लेकिन किसानों को ऋण समय पर बांटना चाहिए था। लोगों की बुवाई का समय था वह पूरा निकल गया, आधा समय निकल गया तब तक लोगों को लोन मिला, उसका नतीजा यह हुआ कि कई किसान ऋण नहीं मिलने से फसल बीमा से भी वंचित हो गए। एक बड़ी दोहरी मार किसान को पड़ी। मुझे लगता है कि राजस्थान सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता है, वह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है।

सवाल: राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच लंबे समय से शीतयुद्ध चल रहा है, क्या लगता है आपको राजस्थान के विकास से राजस्थान का विकास प्रभावित हो रहा है?

जवाब: मैं पहले भी कह चुका हूं कि इस राजस्थान में कांग्रेस (Congress) पार्टी की सरकार की बुनियाद, जो एक किस्म से दो ध्रुवों के साथ शुरू हुई। यहां पर सचिन पायलट (Sachin Pilot)जी का आगमन किसी सत्संग के लिए नहीं हुआ था, मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा के नाते हुआ था। अशोक गहलोत (Ashok Gehlot)जी बन गए, क्योंकि उनके अपने लोग दिल्ली में हैं, जो लॉबिंग की स्ट्रांग। अशोक जी को तो लगता है कुर्सी चली जाएगी, सचिन जी को लगता है कुर्सी मिल जाएगी। इस जद्दोजहद में इनकी बयानबाजी के बीच राजस्थान की जनता का नुकसान हो रहा है।

यह हैं भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया, जिनका कहना है कि राजस्थान में दो ध्रुवों की सरकार चल रही है, जो पूरी तरह से विफल है।