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गुरूवार, जून 4, 2020

अशोक गहलोत सरकार पूरी विफल है, इसके माथे कई कलंक पुत गए हैं: राठौड़

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रामगोपाल जाट की भाजपा के कद्दावर नेता और राजस्थान विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ के साथ विशेष बातचीत के प्रमुख अंश…

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर नोटिफिकेशन जारी हो गया है, पूरे देश में यह कानून लागू हो चुका है, दूसरी तरफ से जेएनयू में अभी तक भी विवाद थमा नहीं है। राजस्थान में कोटा से शुरू हुआ बच्चों की मौत का सिलसिला पूरे राजस्थान में फैला हुआ है। पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह से टिड्डी दल के सायें में है। इस वक्त राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान जो हैं, वो विवादों में हैं। इन्हीं सारे मुद्दों पर बात करने के लिए आज हमारे साथ है राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़, आइए बात करते हैं तमाम मुद्दों पर-

सवाल-मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कल एक बयान आया, जो पूरी तरह से संवेदनाओं से परे बताया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि बच्चों की मौत पर बैठने नहीं जाते हैं, क्या कहना है आपका बच्चों की मौत मौत नहीं होती है बड़े की मौत होती है?

राठौड़: मुख्यमंत्री का यह पहला असंवेदनशील बयान नहीं है। इस प्रकार के बयान देना उनकी आदत में शुमार हो गया। पहले उन्होंने बच्चों की मौत पर कहा कि बच्चे तो मरते ही रहते हैं। राजस्थान के प्रत्येक जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 5 से 7 बच्चे मरना कोई बड़ी बात नहीं। बच्चों की आकस्मिक मौत पर कोई बैठने नहीं जाया करते हैं, मैं समझता हूं मानवीय संवेदनाएं हमें ध्यान रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री का यह बयान निश्चित तौर पर शर्मनाक है। आज पूरा राजस्थान बच्चों की मौत से दुखी है। पश्चिमी राजस्थान टिड्डी दल के आक्रमण के कारण से किसान टिड्डी दल के साए में हैं, लाखों हेक्टेयर भूमि, सरकार के खुद के आंकड़े कह रहे हैं कि 300000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर फसल टिड्डी ने चौपट कर दी। सरकार की तंद्रा टूटी नहीं, सरकार अपनी जिम्मेदारी केंद्र सरकार चला रही है। अब मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि हम उनका गिरदावरी करवाएंगे। मैं समझता हूं कि दो दशक के बाद का हमला हमले होने की आशंका है। जब पिछली बार बजट सत्र में ही मामला उठाया था कि सरकार को केंद्रीय निरोधक दल के साथ चर्चा करके इसकी कार्ययोजना बनानी चाहिए। सरकार अबतक अलमस्त थी और किसान आज बर्बाद हो गया। मैं समझता हूं कि एक के बाद एक कोटा से सिलसिला प्रारंभ हुआ। बच्चों की मौत, एक बच्चे की किलकारी बंद होती है, दिल टूटता है। राजस्थान की सरकार बच्चों की मौत के आंकड़ों के माया जाल में फंस गई और राजनीति कर रही है। लाशों पर राजनीति कर रही है कह रहे हैं कि पिछली सरकार के समय में जो मौतें हुई थी, उससे कम होते हुई, यानी एक लाइसेंस लेना चाहते हैं कि पिछली बार जो मौतें हुईं, उससे ज्यादा मौत हो, उससे पहले तो हमें कुछ कार्रवाई करेंगे नहीं। मोदी सरकार आज मुख्यमंत्री कहते हैं कि 5 साल तक वह जनता की और जमीन की लड़ाई लड़ते रहे इसलिए सरकार सत्ता में आई और उसके बाद उनका यह बयान पर गलती एक तरह से निश्चित कर जवाब नहीं मानती है बच्चों की मौत पर आ गए नहीं आज मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री का एग्जाम दिल्ली दरबार में दोनों की हाजिरी और प्रशासन राजस्थान के लोगों में इस बात का गम है आ रही है। दर्जन से ज्यादा मामले अरे सुनो ना अपराधी पकड़े नहीं जाना मैं समझता हूं कि सरकार के मुंह पर तमाचा है यह सरकार हर मोर्चे पर विफल हो गई है आर्थिक रूप से आर्थिक आपातकाल में सरकार आ गई पंचायत राज संस्थानों को देने वाला पैसा जो उनका संवैधानिक अधिकार है, जो एक लाख से ज्यादा मामले हैं, वो पैसे सीधा ग्राम पंचायत के खाते में जाता, अट्ठारह सौ आठ करोड़ रुपया, केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश से, वो पीडी अकाउंट में सरकार ने डाल रखा है। विकास के सारे काम ठप हैं और मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री अपनी अंतर्कलह में मशगूल है। मैं समझता हूं प्रियंका गांधी आईं, दोनों ने पलक पावडे बिछा दिए, अच्छा होता प्रियंका को कहते, कोटा यहां से 4 घंटे दूरी पर है, आप शादी में आईं है पर जिन बच्चों की मौत हुई है, उन माताओं को ढांढस बंधाया जाता।

सवाल– चंडीगढ़ के खतरे में पश्चिमी राजस्थान है किसानों को राहत मुहैया नहीं करवा पाई है, जबकि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं, उनके लिए 214 करोड रुपए का हेलीकॉप्टर खरीदने के टेंडर हो चुके हैं?

राठौड़: सरकार मुख्यमंत्री के लिए हेलीकॉप्टर खरीद रही है, यह अच्छी बात है, खरीदना चाहिए, उसपर ऐतराज नहीं, पर तबाह हो गया किसान, बर्बाद हो गया किसान को टिड्डी दल को हटाने के लिए वही पुराने परंपरागत तरीके अपनाने पड़ रहे हैं, धुंवा करना, ढोल बजाना, कर्जे में किसान आ गया और सरकार की तंद्रा टूटी नहीं, सरकार केंद्र पर निर्भर हो रही है, मामला केंद्र पर टाल रही है, सरकार की कार्यवाही नाकाफी साबित हुई है, उसी कारण किसान आज खुद को लुटता हुआ महसूस कर रहा है।

सवाल: आपने पंचायती राज विभाग भी आपने देखा है, पहली बार पंचायती राज के मामले सरकार सुप्रीम कोर्ट तक ले गई है, कोई फैसला नहीं हो पा रहा है, क्या कारण लगता है?

राठौड़: पहली बार पंचायत राज संस्थानों के साथ जो मजाक बना हुआ है, 73वें संविधान संशोधन का जो लोक करण हुआ है, वह सबके सामने है, 2011 की जनगणना पर दुबारा पंचायतों का पुनर्गठन करना, आपाधापी के अंदर, आपस की खींचातानी के कारण एक के बाद एक तीन नोटिफिकेशन जारी करना, अंतिम नोटिफिकेशन जारी करने के बाद फिर एक संसोधन जारी करना, मामला उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ में गया, सरकार के आदेशों को रोका गया, फिर उच्च न्यायालय में गया, मैं समझता हूं कि पहली बार सरपंच के चुनाव, पांच के चुनाव ब्लॉक के चुनाव से पहले करवाके सरकार पिछले दरवाजे से पंचायती राज संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है, यह सर लोकतांत्रिक परंपराओं को ढहाने का काम कर रही है, इस सरकार पर यह कलंक है।

सवाल: सीएए को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक विवाद पैदा हुआ, जिसमें पुलिस की जो प्रारंभिक जांच है उसमें वामपंथी संगठन से जुड़े हुए छात्र दोषी पाए गए हैं, क्या कहना है?

राठौड़: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का नाम पूरे विश्व में है और इन दिनों जिस कालिमा के दायरे में यह विश्वविद्यालय है आज। इस विश्वविद्यालय में तर्कों के आधार पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहस चला करती थी, वहां घुसे लातें और डंडे चल रहे हैं। उनको चलाने में वह लोग हैं, उनके चेहरे बेनकाब हुए हैं जो अपने आप को वाम दलों के समर्थक मानते हैं, विचारक और चिंतक मानते हैं। उन्होंने जवाहरलाल विश्वविद्यालय के अंदर जिस प्रकार का वातावरण बनाया है, कभी तो कहते हैं भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह और उसके बाद तर्कों के बजाय लाठी उठाते हैं, मैं समझता हूं इस विश्वविद्यालय के पर कालिका लगाने का काम वाम दलों समर्थित छात्र ने किया है।

सवाल: राजस्थान के गृह मंत्री मुख्यमंत्री खुद हैं और आबकारी विभाग भी इनके पास है, राजस्थान में अपराधों की संख्या 32% बढ़ गई है, जबकि आबकारी को लेकर बीते दिनों दो-तीन उल्टी-सीधी पैसे किए गए हैं। क्या यह सही है?

राठौड़: देखिए सरकार के दो चेहरे हैं एक बार इसी सरकार ने शराबबंदी को लेकर एक मंत्रिमंडल कमेटी बना डाली और फिर यही सरकार उन तरीकों को खोज रही है किस प्रकार आबकारी राजस्व सरकार का बढ़े। उसके अतिरिक्त तौर तरीके खोजने का काम सरकार कर रही है। बार लाइसेंस के अंदर रिलैक्सेशन देने का काम कर रही है और सरकार कानून के अंदर से पूर्णत विफल हो गई है। अपराधी और पुलिस का गठजोड़ सामने आ चुका है। इस सरकार के रहते हुए ना कानून है, न कानून का राज है।

यह है राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़, जिनका स्पष्ट तौर पर कहना है कि राजस्थान में सरकार पूरी तरह से विफल हो गई है।

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Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिया संपादक .

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