स्वामी विवेकानंद: जब भारत के नौजवान ने अमेरिकियों को मंत्रमुग्ध कर दिया था

    swami vivekanand
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    भारत की तरफ से हिंदू धर्म के प्रतिनिधि के तौर पर शिकांगो पहुंचे विवेकानंद को बोलने के लिए अन्य धर्म नेताओं की तरह केवल कुछ मिनट मिले थे, लेकिन कहा जाता है कि उनके पहले शब्द से ही मंत्रमुग्ध हो चुके अमेरिकी ढाई घंटे तक सुनते रहे, लेकिन कोई टस से मस नहीं हुआ।

    पहली बार किसी अन्य देश का, अन्य धर्म का प्रतिनिधि शिकांगो धर्म संसद में भाईयों—बहनों के संबोधन के द्वारा शुरुआत कर रहा था। जैसे ही मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनाों बोलना शुरु किया, तो लाखों की तादात में मौजूद भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा स्टेडिमय गुंजायमान कर दिया।

    यह शख्स से भारत समेत पूरी दुनिया को धर्म का सीधे और सरल शब्दों में अर्थ समझाने वाले स्वामी विवेकानंद। अपनी कम उम्र में दुनियाभर के नौजवानों को अपना मुरीद बना गए स्वामी विवेकानंद की 12 जनवरी को जयंती है।

    12 जनवरी 1863 में कोलकत्ता में जन्मे स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। हालांकि, उनकी उम्र अधिक नहीं रही और महज 39 साल में इनका स्वर्गवास हो गया था। किंतु अपनी कम आयु में ही दुनिया को अपना दीवाना बनाने वाले विवेकानंद को आज भी युवा अपना आदर्श मानते हैं।

    भारत में स्वामी विवेकानंद को एक देशभक्त संन्यासी के रूप में माना जाता है। उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश की सरकारें युवाओं के लिए कई बड़े आयोजन करती है।

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