राजसमंद, सहाड़ा, सुजानगढ़ की ग्राउंड रिपोर्ट: पढ़िए कौन भारी, कौन हल्का, क्या हैं मुद्दे?

रामगोपाल जाट।

राजस्थान के राजसमंद की राजसमंद विधानसभा सीट, भीलवाड़ा की सहाड़ा और चूरू की सुजानगढ़ सीट पर शनिवार को मतदान होने जा रहा है। मुख्य पार्टियां जो इन चुनावों में हिस्सा ले रही हैं उनमें भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी हैं। तीनों ही दलों के द्वारा अपनी कैपेसिटी के मुताबिक चुनाव जीतने की तैयारी की गई है।

कोरोनावायरस की वैश्विक महामारी के बावजूद सभी दलों के द्वारा राज्य सरकार द्वारा लगाई गई धारा 144 का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए जमकर प्रचार किया गया है। तीनों सीटों पर किस दल का उम्मीदवार भारी है? किस दल के प्रत्याशी की जीत की संभावना है और किस पार्टी के द्वारा उम्मीदवार पर भरोसा जताने का फायदा हुआ है और नुकसान हुआ है?

इसको लेकर हमारी टीम के द्वारा पहले राजसमंद और सहाड़ा में ग्राउंड रिपोर्ट की गई। उसके बाद गुरुवार और शुक्रवार को सुजानगढ़ में ग्राउंड रिपोर्ट कर सच्चाई जानने की कोशिश की गई है। आप भी पढ़िए पूरी रिपोर्ट- (वीडियो रिपोर्ट देखने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल @National dunia या फेसबुक पेज @National dunia पर वीजिट कर सकते हैं।)

राजसमंद में दीप्ती का खेल कटारिया ने कठिन किया!

10 अप्रैल को सबसे पहले हम सुबह करीब 5:30 बजे राजसमंद के कांकरोली पहुंचे, जहां द्वारिकाधीश मंदिर के पास वाली धर्मशाला में स्नान-ध्यान करने के बाद कांकरोली में ही लोगों से मिले। चाय के साथ कई लोगों से चर्चा की।

लोगों से मिले फीडबैक में साफ तौर पर एक ही बात समझ में आ रही थी कि इस सीट पर दिवंगत विधायक किरण माहेश्वरी के द्वारा जो कार्य किए गए थे, उसके आधार पर किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी को लोग वोट देंगे।

साथ ही कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार तनसुख बोहरा, जिनको समाजसेवी के रूप में जाना जाता है, उनके लिए भी लोगों में विश्वास है, किंतु इस बार किरण महेश्वरी का ऋण उतारने की कोशिश की जाएगी। यहां पर कचोरी वाले के पास कचोरी खाते हुए नारायण गुर्जर ने बताया कि सचिन पायलट की नाराजगी की वजह से कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो रहा है।

एक अन्य व्यक्ति प्रह्लाद ने आश्चर्यजनक रूप से मुद्दों के ऊपर बात करते हुए कहा कि पिछले 15-20 बरस से यहां तीन-चार मुद्दे ऐसे हैं, जो अभी तक भी निस्तारित नहीं हुए हैं। चुनाव के वक्त सभी दलों के प्रत्याशी आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद यहां पर कोई भी आना नहीं चाहता है।

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मुद्दों की बात की जाए तो राजसमंद झील को भरने, नहर को चोड़ी करने, सड़कों की मरम्मत करवाने और इसके साथ ही पुरानी रेल लाइन को वापस शुरू करने की बात लोग कहते हैं।

इसके बाद हम दोपहर करीब 12 बजे राजसमंद पहुंचे, जहां पर एक रिक्शा चालक ने बताया कि किरण महेश्वरी को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी बेटी दिप्ती माहेश्वरी को वोट देंगे। मुद्दों के मामले में ज्यादा चर्चा नहीं कर पाए और शायद उनको ज्यादा इंटरेस्ट भी नहीं था, किंतु राजनीतिक दलों के द्वारा जो चुनाव प्रचार किया जा रहा है, उसके ऊपर फोकस करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा यहां पर कांग्रेस के चुनाव प्रचार पर भारी पड़ रही है।

सहाड़ा में कांटे की टक्कर

इसके बाद हमारी टीम करीब 3:00 बजे सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के गंगापुर में पहुंची, जहां पर केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, स्थानीय सांसद सुभाष बहेरिया, चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी और भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा इस रैली को संबोधित किया जा रहा था।

इस रैली में जगह के हिसाब से जो टेंट लगाया गया था, वह पूरी तरह से भरा हुआ था और लोगों में उत्सुकता ज्योतिरादित्य सिंधिया को सुनने की थी। खासतौर से इसलिए, क्योंकि गंगापुर शहर ज्योतिरादित्य सिंधिया की परदादी गंगाबाई के द्वारा बसाया गया बताया जाता है।

लोगों को ज्योतिरादित्य सिंधिया से खास लगाव है, लोगों की उम्मीद के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक जबरदस्त जोशीला भाषण दिया और राज्य की अशोक गहलोत सरकार से लेकर मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार पर भी जमकर बरसे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल वादों की पार्टी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी जो वादा करती है, वह करके दिखाती है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि क्यों उन्होंने कमलनाथ की सरकार गिराई थी और शिवराज सिंह की सरकार बनाई थी।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा समाप्त होने के बाद कुछ लोगों से हमने बात की। दूरदराज के भील समाज से आई कुछ महिलाओं का कहना है कि समस्याएं तो यहां पर वैसी की वैसी है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की समस्या मुख्य है, जो करीब 15 साल से जस की तस बनी हुई हैं, इसलिए उनको उम्मीद है कि इस बार जो भी कोई चुनाव जीतेगा, वह इन समस्याओं के ऊपर सबसे पहले काम करेगा।

दूसरे दिन सुबह हम सहाड़ा पंचायत समिति पहुंचे, जहां पर हमने एक मुस्लिम समुदाय के पूरे ग्रुप को एकत्रित कर सहाड़ा की स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। मुस्लिम समाज के सभी लोगों का एक स्वर में मानना है कि दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी के द्वारा बहुत अच्छा कार्य किया गया था और राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक विजनरी पॉलीटिशियन हैं, जो सभी मुद्दों को सुलझा लेंगे और यहां पर जीत कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी की ही होगी।

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इसके बाद हम गंगापुर से करीब 4 किलोमीटर पश्चिम दिशा में बसे डेलाणा गांव पहुंचे, जहां पर बस स्टैंड पर बैठे कुछ बुजुर्गों के द्वारा चुनाव पर चर्चा की जा रही थी। उनसे हमने बात की। बुजुर्ग पूरी तरह से तीनों ही दलों में विभाजित नजर आए, क्योंकि कुछ बुजुर्गों का कहना है कि हनुमान बेनीवाल भले ही कुछ नहीं कर पा रहे हों, किंतु किसानों के लिए वह व्यक्ति हमेशा खड़ा रहता है। इसलिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की तरफ भी इस बार मतदाताओं का झुकाव है।

हालांकि, सभी बुजुर्ग एक स्वर में मानते हैं कि हनुमान बेनीवाल की पार्टी यहां पर चुनाव नहीं जीत पाएगी, किंतु दोनों ही प्रमुख दलों के पसीने ला दिए गए हैं, इसलिए चुनावी मुकाबला रोचक हो रहा है। इसके साथ ही सभी बुजुर्गों का यह भी मानना है कि सहाड़ा में कोई भी उम्मीदवार जीतेगा, वह बेहद कम मार्जिन से जीतेगा और दोनों ही दलों के बीच कड़ा मुकाबला है। हमारी टीम अपना कार्य करके करीब 4:00 बजे वापस गंगापुरा से रवाना हो गई।

सुजानगढ़ में 21:20 होगी जीत-हार, बेनीवाल बड़ा फैक्टर हैं

गुरुवार को करीब 5:00 बजे हमारी टीम सुजानगढ़ के बस स्टैंड और बस अड्डे, जो कि दोनों एक साथ हैं, वहां पर पहुंची। यहां पर हमने रिक्शा चालक, ठेला चालक और अन्य दुकानदारों से बात कर चुनावी हालात जानने की कोशिश की।

तकरीबन सभी इस बात से सहमत हैं कि नामांकन पत्र की रैली के दिन तक कांग्रेस के उम्मीदवार मनोज मेघवाल आराम से जीत रहे थे, किंतु उसके बाद धीरे-धीरे भाजपा ने काफी ग्रोथ की है। यही कारण है कि अब चुनाव हनुमान बेनीवाल के द्वारा हासिल किए जाने वाले वोटों के ऊपर निर्भर हो गया है।

शाम को करीब 7:00 बजे हमने भाजपा और कांग्रेस दोनों के कार्यकर्ताओं से चर्चा की। दोनों ही दलों के कार्यकर्ता अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन बातों ही बातों में कांग्रेस के कार्यकर्ता यह मानते हैं कि उनके उम्मीदवार की जीत दिवंगत मास्टर भंवर लाल मेघवाल की जीत होगी, तो दूसरी तरफ भाजपा का मानना है कि अगर मतदाताओं ने दिवंगत विधायक के बजाए क्षेत्र के विकास की बात सोचते हुई वोट दिया तो उनकी पार्टी आराम से जीत जाएगी।

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शुक्रवार को सुबह हमारी टीम सुजानगढ़ से करीब 7—8 किलोमीटर दूर बोबासर गांव पहुंची। यहां पर गणगौर की वजह से गांव में लोगों की संख्या कम थी, किंतु कुछ युवाओं और बुजुर्गों से चर्चा करने पर साफ हुआ कि बुजुर्ग जहां भाजपा के पक्ष में बोलते हैं, वही युवा मुद्दों के ऊपर मतदान को देखते हैं।

युवाओं का कहना है कि उनके क्षेत्र में सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी होने के कारण आज भी बच्चे पढ़ने के लिए जोधपुर या जयपुर जाते हैं। इतना ही नहीं, बालिका शिक्षा काफी कमजोरी स्थिति में है और इसका सबसे बड़ा कारण है राजनीति।

हमारा अगला पड़ाव हेमसर गांव, जहां पर गांव के बीच में स्थित गोगामेडी के ऊपर करीब 15 या 20 जने ताशपत्ती खेलने और चुनाव की चर्चा में मशगूल हैं। हमारी गाड़ी के रुकते हुए उत्सुकता से देखने लगते हैं।

हमें सुजानगढ़ में ही एक पत्रकार साथी विष्णु लाटा द्वारा बताया गया था कि गांव में एक रिटायर फौजी हैं जो ज्यादा अच्छे से बात कर सकते हैं। हम गांव के अगले छोर पर पहुंचे, जहां पर बीएसएफ से रिटायर तोलाराम डूकिया ने चाय-पानी के बाद चुनाव पर चर्चा शुरू की। हम उनको को गोगामेडी के ऊपर ले आए और वहीं पर गांव के अन्य लोगों के साथ चर्चा शुरू कर दी।

सभी लोगों से बातचीत करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि स्थानीय सांसद भाजपा से हैं, यहां के प्रधान भाजपा के हैं, और अगर विधायक भी भाजपा के होंगे तो कड़ी से कड़ी जुड़ जाएगी और क्षेत्र का विकास होगा।

कुछ लोगों का यह मानना है कि राज्य की वर्तमान कांग्रेस सरकार के द्वारा अच्छा कार्य किया जा रहा है और मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने क्षेत्र का विकास किया था, इसलिए मनोज मेघवाल जीत सकते हैं। हनुमान बेनीवाल के उम्मीदवार के ऊपर जीत का दावा कोई नहीं करता।

सभी मानते हैं कि हनुमान बेनीवाल की वजह से दोनों ही दलों को भारी असमंजस की स्थिति हो रही है, दोनों ही दलों को जीत और हार भी समझ नहीं आ रही है। इसलिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जितने वोट लेगी, उसी पर जीत और हार टिकी हुई है। दोपहर करीब 3 बजे हम वापसी के लिए सुजानगड़ कस्बे की ओर रवाना हो गए।