कौन हैं राकेश टिकैत, जो मोदी-योगी सरकार पर पड़ रहे हैं भारी?

जयपुर। केंद्र सरकार के द्वारा जून में बनाया गया तीन कृषि कानूनों (Farmer law) के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ एक और नाम जो आंदोलन (kisan andolan) में प्रमुखता से उभरा है, वह है भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत (Rakesh tikait)।

आंदोलन तेजी से गाजीपुर का बॉर्डर (Gajipur border) के ऊपर चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में बढ़ता जा रहा है तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में अब तक 2 महापंचायत हो चुकी है, जिनमें हजारों लोग जुट चुके हैं। चौधरी राकेश टिकैत के समर्थन में किसान एकजुट हो रहे हैं। इधर सरकार ने कहा है कि जो बातें उन्होंने कही है उन पर वह आज भी कायम है।

जिस संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत हैं, उसकी भारतीय किसान यूनियन एक ऐसा किसान संगठन है, जिसकी पहचान पूरे देश में है। इस संगठन का गठन साल 1987 में चौधरी राकेश टिकैत के पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने की थी, इसके आज राकेश टिकैत के बड़े भाई चौधरी नरेश सिंह टिकैत अध्यक्ष हैं।

कहा जाता है कि व्यवहारिक तौर पर यूनियन से जुड़े फैसले नरेश के बजाए राकेश टिकैत ही लेते हैं। राकेश टिकैत बड़े किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे नम्बर के बेटे हैं। ये चार भाई हैं।

चौधरी राकेश टिकैत अभी किसानों के उस कोर ग्रुप में शामिल हैं जो कृषि संशोधन बिल पर लगातार सरकार से बात कर रही है। 11 दौर की केंद्र सरकार से मुलाकात करने वाले किसान नेताओं टीम में चौधरी राकेश टिकैत भी शामिल थे।

पिछले दिनों 26 जनवरी के मौके पर जो उपद्रव हुआ, उससे पहले जो ट्रैक्टर परेड आयोजित होने जा रही थी, उसमें भी भारतीय किसान यूनियन का प्रतिनिधित्व चौधरी राकेश टिकैत ही कर रहे थे।

जानिए कौन हैं राकेश टिकैत

राकेश टिकैत की पहचान ऐसे व्यवहारिक किसान नेता की है, जो धरना-प्रदर्शनों के साथ-साथ किसानों के व्यवहारिक फायदों की बात करते हैं। किसान मसीहा महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे बेटे राकेश टिकैत के पास इस स्काई भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता की कमान है। यह संगठन उत्तर प्रदेश, उत्तर भारत के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है और बड़ा प्रभाव रखता है।

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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव मे 4 जून 1969 को हुआ था। राकेश टिकैत साल 1992 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नौकरी करते थे।

राकेश टिकैत ने मेरठ यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की हुई है। किन्तु 1993-1994 में दिल्ली के लालकिले पर स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में चल रहे किसानों के आंदोलन के कारण सरकार का आंदोलन खत्म कराने का जैसे ही दबाव पड़ने लगा, उसी समय राकेश टिकैत ने दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी।

पुलिस की नौकरी छोड़ किसानों की लड़ाई में लिया हिस्सा

1994 के समय दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ राकेश टिकैत ने पूरी तरह से भारतीय किसान यूनियन के साथ किसानों की लड़ाई में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत का कैंसर से निधन होने के बाद राकेश टिकैत ने पूरी तरह भारतीय किसान यूनियन की कमान संभाल ली।

दरअसल, चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत बालियान खाप से आते थे और जब महेंद्र सिंह टिकैत का स्वर्गवास हुआ, तब अपने बड़े बेटे चौधरी नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया। क्योंकि खाप पंचायत के नियमों के अनुसार बड़ा बेटा ही मुखिया हो सकता है। फिर भी व्यवहारिक तौर पर भारतीय किसान यूनियन की कमान राकेश टिकैत के हाथ में है। यूनियन के सभी प्रमुख फैसले चौधरी राकेश टिकैत ही लेते हैं।

नौकरी छोड़ने के बाद शुरू में चौधरी राकेश टिकैत की संगठन क्षमता को देखते हुए उन्हें भारतीय किसान यूनियन का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया था, जिसको वो आज तक बखूभी निभा रहे हैं।

बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी से हुई शादी

चौधरी राकेश टिकैत की शादी सन 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी से हुई थी, इनके एक पुत्र चरण सिंह, दो पुत्री सीमा और ज्योति हैं।टिकैत के सभी बच्चों की शादी हो चुकी है।

बता दें, भारतीय किसान यूनियन की नींव 1987 में उस समय रखी गई थी, जब बिजली के दाम को लेकर किसानों ने शामली जनपद के करमुखेड़ी में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन किया था। जिसमें दो किसान जयपाल और अकबर पुलिस की गोली लगने से मारे गए थे।

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उसके बाद भारतीय किसान यूनियन नाम से किसानों की आवाज उठाने के लिए संगठन बनाया गया था, जिसका अध्यक्ष स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को बनाया गया था। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का 15 मई 2011 को लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। इसके बाद इनके बड़े बेटे चौधरी नरेश टिकैत को पगड़ी पहनाकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई थी।

चौधरी राकेश टिकैत ने दो बार राजनीति में भी आने की कोशिश कर चुके हैं। पहली बार टिकैत ने साल 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, मगर हार गए। उसके बाद चौधरी राकेश टिकैत ने वर्ष 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें भी उनको सफलता नहीं मिली।

उनको दोनों ही चुनाव में इनको हार का सामना करना पड़ा था, किन्तु किसानों का उनपर भरोसा उतना ही है, जितना उनके पिता पर था। भारतीय किसान यूनियन के नेता रहे स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के पुत्र राकेश टिकैत टिकट कुल चार भाई हैं, जिनमें सबसे बड़े नरेश टिकैत हैं, जोकि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

राकेश टिकैत बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। इसके अलावा राकेश टिकैत के दो अन्य भाई हैं। उत्तर प्रदेश से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता, आलोक वर्मा ने नेशनल दुनिया से बातचीत में जानकारी साझा करते हुए बताया कि चौधरी राकेश टिकैत से छोटे एवं तीसरे स्थान पर उनके भाई चौधरी सुरेंद्र टिकैत मेरठ की एक शुगर मिल में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं।

सबसे छोटे भाई चौधरी नरेंद्र खेती का काम करते हैं। वर्मा आगे बताते हैं कि वर्ष 1985 में राकेश दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। इसी दौरान उनके पिता चौधरी महेंद्र टिकैत द्वारा दिल्ली के लालकिले पर डंकल प्रस्ताव हेतु आंदोलन चलाया गया था, जिसमें सरकार द्वारा चौधरी राकेश टिकैत के ऊपर दबाव डाला गया कि वह अपने पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को समझाएं और किसान आंदोलन को खत्म कराएं।

तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा राकेश के ऊपर दबाव बनाने के कारण साल 1993-1994 में चौधरी राकेश टिकैत ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद से किसानों के लिए सक्रिय काम करते हुए अपने पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के साथ काम करना शुरू किया। राकेश टिकैत वर्ष 1997 में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए।

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किसानों के हक की लड़ाई लड़ते रहने के कारण चौधरी राकेश टिकैत अबतक 44 बार जेल की यात्रा भी कर चुके हैं। बीकेयू के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता आलोक वर्मा यह भी बताते हैं कि मध्यप्रदेश में एक समय किसान के भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ उनको 39 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था।

उसके बाद दिल्ली में लोकसभा के बाहर किसानों के गन्ना मूल्य बढ़ाने के लिए केंद्र की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, और वहीं पर सैंकड़ों क्विंटल गन्ना को जला दिया था, जिसकी वजह से चौधरी राकेश टिकैत को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

इसी तरह से बाजरे के मूल्य बढ़ाने के लिए सरकार से मांग चौधरी राकेश टिकैत ने राजस्थान में भी किसानों के हित में बाजरे के मूल्य बढ़ाने के लिए सरकार से मांग की थी। सरकार द्वारा मांग न मानने पर चौधरी राकेश टिकैत ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जिस वजह से उन्हें जयपुर जेल में जाना पड़ा था।

आलोक वर्मा कहते हैं कि राजस्थान सरकार ने बाजरे के मूल्य को किसानों के लिए बढ़ा दिया था। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह ने साल 2014 में अमरोहा से राकेश टिकैत को लोकसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाया था।

बीते दो माह से लगातार सरकार से बातचीत कर रहे भारतीय किसान यूनियन का मानना है कि गेंद सरकार के पाले में है और सरकार को ही तय करना है कि आंदोलन खत्म होगा या फिर अनवरत चलता रहेगा, अगर सरकार ने तीनों कानून वापस नहीं लिए तो इस आंदोलन के खत्म होने की संभावना नहीं है।

इस बीच एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि किसानों की समस्या का समाधान केवल एक फोन कॉल की दूरी पर है। जिसके बाद चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने कहा कि वह ना तो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ हैं, न भाजपा के खिलाफ हैं और न ही उनकी नीतियों के खिलाफ हैं, केवल इन टैंकसी कानूनों के खिलाफ हैं।