जयपुर गौरी माहेश्वरी बनी विश्व की सबसे कम उम्र में कैलीग्राफी टीचर

-हाल ही में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड से नवाजी गई गौरी।

जयपुर। देखने में सुन्दर शब्दों को लिखने की कला को कैलीग्राफी कहा जाता है। भले ही शिक्षा जगत का भविष्य कम्प्यूटर पर स्थानांतरित हो जाये, मगर सुंदर लिखावट का महत्व कम नहीं होने वाला। आखिर कंप्यूटर पर लिखने में भी तो हम अपने पसंद के फॉण्ट का प्रयोग करते हैं और उसे सुंदर बनाने की कोशिश करते हैं।

कहा गया है कि भगवान कभी कभी ऐसी रचना करते हैं जिसे देखकर आँखों पर विश्वास नहीं होता। 12 वर्षीय गौरी माहेश्वरी को हाल में कैलीग्राफी कला में निपुणता हासिल करने पर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड हासिल हुआ है।

जयपुर के सेंट जेवियर स्कूल की कक्षा 7 की छात्रा गौरी को यह सम्मान 100 से अधिक कैलीग्राफी पद्धति से लिखने पर मिला है। इस सम्मान के साथ ही गौरी एशिया में सबसे कम उम्र में कैलीग्राफी कला को सिखाने का गौरव प्राप्त कर चुकी है।

एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने गौरी को यंगेस्ट ऑनलाइन कैलीग्राफी कोच के ग्रैंडमास्टर अवार्ड से सम्मानित किया। गौरी ने यह मुकाम 12 वर्ष 5 महीना 10 दिन की उम्र में हासिल किया है।

एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नॉमिनेशन में गौरी 100 लोगों को (जिसमें 7 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक कि उम्र के लोग शामिल थे) को ऑनलाइन कैलीग्राफी कोचिंग दे रही थी। अब तक गौरी 700 से अधिक स्टूडेंट्स को सीखा चुकी है।

गौरी को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस गौरवपूर्ण सम्मान पर गौरी के परिवार और फ्रेंड्स ने गौरी को बधाई दी। जयपुर की गौरी माहेश्वरी ने यह सिद्ध करके दिखाया है की प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और सीखने व सिखाने की भी कोई उम्र नहीं होती।

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गौरी पढ़ने में तो अव्वल है ही, साथ में एक बहुत अछी वक़्ता और कलाकार भी हैं। पढ़ाईं के साथ साथ गौरी ने बहुत सी कलाएँ सीखीं हैं जिसमें से कैलीग्राफी उनकी पसंदीदा कला है।

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गौरी बताती है कि महज़ बारह साल की उम्र में गौरी ने अपने दादा जी ज्ञान देव मूँदड़ा से प्रेरित होकर समाज सेवा भाव से प्राथमिक कक्षाओं के गरीब बच्चों को गणित और अंग्रेज़ी निशुल्क पढ़ाना शुरू कर दिया था।

लाक्डाउन पिरीयड में 12 मई 2020 को गौरी का जन्मदिन था और उसी दिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश को सम्बोधित अपने भाषण में आत्म निर्भर भारत की बात कही। आत्म निर्भर भारत की बात गौरी के मन में घर कर गई और उसकी प्रेरणा का सबब बन गई।

गौरी को बचपन से ही प्रत्येक कार्य पूर्ण लगन उत्साह और तन्मयता से करने की आदत है । छोटी उम्र में ही गौरी ने अपने स्कूल सेंट जेवियर स्कूल में कैलीग्राफी सीख ली थी।

इसी प्रतिभा को और निखारने और खुद आत्म निर्भर होने की चाह में गौरी ने ऑनलाइन कैलीग्राफी सिखाना शुरू कर दिया।

गौरी इतनी शालीनता धैर्य और मनमोहक तरीक़े से कैलीग्राफी सिखाने लगी की देखते ही देखते बच्चे क्या बड़े भी उससे कैलीग्राफी सीखने लगे और सभी सीखकर बहुत ख़ुश हैं।

बहुत सी माताएँ यह कहने लगी की गौरी को देखकर अब उनके बच्चे ज़्यादा वक़्त कैलीग्राफी करने में या कुछ क्रीएटिव करने में बिताने लगे हैं।

गौरी के एक ही बैच में सात साल की उम्र के बच्चों से लेकर साठ साल के वयस्क सब हैं। जहां हम रोज़ यह सुनते हैं की ऑनलाइन कक्षाओं में शिक्षकों को एक ही कक्षा के बच्चों को पढ़ाने में काफ़ी परेशनियाँ आती हैं वहीं एक छोटी सी बच्ची का सभी उम्र के लोगों को एकसाथ सामंजस्य से सिखाना तारीफ़ें काबिल है।

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गौरी से सीखने वाले लोग सिर्फ़ भारत के ही नहीं है बल्कि विदेशों के लोग भी गौरी से ऑनलाइन कैलीग्राफी सीख रहे हैं।
इस लाक्डाउन में समय के महत्व को समझते हुए गौरी ने जो कदम उठाया है वह वाक़ई में सभी के लिए प्रेरणादायक एवं सराहनीय है।

इससे भी अधिक प्रशंसनीय बात यह है की गौरी ने कैलीग्राफी क्लास से प्राप्त अपनी आमदनी को आर्मी वेल्फ़ेर फंड में दे दिया है।

ऑनलाइन कैलीग्राफी सिखाने में विश्व की सबसे कम उम्र वाली पहली लडकी है गौरी माहेश्वरी जिसने अपना नाम इंडिया बुक ओफ़ रेकोर्डस व एशिया बुक ओफ़ रेकोर्डस में दर्ज करवाया है।

हमें हमारी इस बेटी पर अत्यंत गर्व है। गौरी की मम्मी मीनाक्षी

गौरी की मम्मी मीनाक्षी माहेश्वरी बताती है कि गौरी शुरू से ही टेलेंटेड बच्ची रही है। जब हमने इसका एडमिशन जेवियर स्कूल के फर्स्ट क्लास में कराया तो कैलीग्राफी सिखाने वाले सर ने यह कहकर मना कर दिया कि कैलीग्राफी 6-7 क्लास स्टेंडर्ड के बच्चो के लिए है।

इतनी छोटी बच्ची कैसे कर पाएगी। पर गौरी ने हार नही मानी और कैलीग्राफी सीखी। भविष्य में एक सर्टिफ़ायड कैलीग्राफर का कोर्स करना चाहती है लेकिन गौरी समाज के उत्थान के लिए भी जागरुक है।

गौरी का कहना है आज हम जो भी है, हमें अपने समाज का ख़्याल रखना चाहिये और सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिये जागरूक रहकर सामाजिक कार्य भी करते रहना चाहिए।

भारत में कैलीग्राफर के लिए काम की कमी नहीं है. आजकल कितने ही लोग अपने शादी के कार्ड, हाथ की बनी प्रेजेंटेशन, मेमोरियल डाक्यूमेंट्स, सर्टिफिकेट, निमंत्रण-पत्र, बिज़्नेस कार्ड मेनू कार्ड्स,पोस्टर,ग्रीटिंग कार्ड्ज़, बुक कवर,लोगो, लीगल डाक्यूमेंट्स बनाने, सिरेमिक और मार्बल पर शब्दों को उकेरने के लिये कैलीग्राफर से सम्पर्क करते हैं।

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आप कैलीग्राफी टीचर बन सकते हैं, अपना ऑफिस खोलकर फ्रीलांस काम कर सकते हैं. वेडिंग प्लानर, प्रिंटिंग शॉप, पब्लिशिंग कंपनी से मिलकर काम कर सकते है। इस कला का उपयोग इंटिरीअर डिज़ाइनिंग और फ़ैशन वर्ल्ड में भी होता है।