हार्ट की गंभीर बीमारियों के आसान बनाती ये नई वर्ल्ड क्लास तकनीकें

  • अब बिना ओपन चेस्ट सर्जरी के टावर से संभव है वॉल्व रिप्लेसमेंट
  • कैल्सिफाइड ब्लॉकेज में शॉक वेव लिथोट्रिप्सी बेहद कारगर

एक अनुमान के मुताबिक देशभर में हर साल 4.77 मिलियन लोगों की कार्डियोवस्कुलर डिजीज के कारण मृत्यु हो जाती है। अधिक उम्र या दूसरी समस्याओं के कारण जिन मरीजों की ओपन चेस्ट सर्जरी नहीं हो पाती, उनके लिए नई ट्रीटमेंट तकनीकें आ गई हैं जिससे उनका उपचार काफी आसानी हो गया है।

हार्ट के मुख्य धमनी एओर्टिक वॉल्व के सिकुड़ने की बीमारी एओर्टिक स्टेनोसिस हो या कोरोनरी आर्टरी में जमे खतरनाक कैल्सिफाइड ब्लॉकेज, इनके ट्रीटमेंट के लिए अब वर्ल्ड क्लास तकनीकें भारत में भी उपलब्ध हैं।

बिना सर्जरी के बदल जाएगा हार्ट का वॉल्व

भारत में करीब तीन लाख मरीज अधिक उम्र या अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण ओपन चेस्ट सर्जरी नहीं कराते। ऐसे में टावर तकनीक उनके लिए वरदान साबित हो सकती है। अब तक हार्ट के मुख्य वॉल्व एओर्टा के सिकुड़ने पर मरीज की बड़ी ओपन चेस्ट सर्जरी की जाती थी।

सर्जरी के कई दिनों बाद तक मरीज को रिकवर होने में समय लगता था। लेकिन अब ट्रांस कैथेटर एओर्टा वॉल्व रिप्लेसमेंट प्रोसीजर से बिना किसी चीर-फाड़ के मरीज का वॉल्व बदला जा सकता है।

इसके लिए जांघ की नस से कैथेटर के जरिए एओर्टा वॉल्व तक पहुंचा जाता है और कृत्रिम वॉल्व इंप्लांट कर दिया जाता है। सिर्फ एक से डेढ़ घंटे में यह प्रोसीजर पूरा हो जाता है और प्रोसीजर के अगले दिन वह चलने-फिरने भी लग जाता है।

ओपन सर्जरी के दौरान होने वाले सारे जोखिम इस तकनीक में बिल्कुल नहीं होते हैं और प्रक्रिया के 4-5 दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। वह जल्द ही वापस अपनी सामान्य दिनचर्या में भी लौट सकता है। जबकि ओपन चेस्ट सर्जरी के बाद मरीज को रिकवरी करने में छह महीने से एक साल तक का समय लग जाता है।

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कैल्सिफाइड ब्लॉकेज होने पर अब बायपास सर्जरी का विकल्प शॉक वेव लिथोट्रिप्सी एंजियोप्लास्टी

70 साल से अधिक उम्र के 90 प्रतिशत पुरुषों और 67 प्रतिशत महिलाओं में होने वाले हार्ट ब्लॉकेज कैल्शियम वाले होते हैं। इन ब्लॉकेज को ठीक करने के लिए अब तक बायपास सर्जरी ही एकमात्र जरिया था लेकिन इसके लिए शॉक वेव लिथोट्रिप्सी तकनीक आ गई है।

इससे जिन मरीजों में बायपास सर्जरी को सहने की क्षमता नहीं है, उनके लिए इंटरवेंशन के जरिए ही एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डाल सकते हैं। अब तक कैल्सिफाइड ब्लॉकेज वाली आर्टरी में इंटरवेंशन से स्टेंटिंग कर पाना बहुत मुश्किल होता था क्योंकि स्टेंटिंग होने के बाद भी उसके फिर से बंद होने या आर्टरी के फटने का 30 से 50 प्रतिशत तक खतरा रहता है।

शॉक वेव लिथोट्रिप्सी एक सोनोग्राफिक तकनीक है। इसमें सोनोग्राफिक वेव से कैल्शियम को तोड़ा जाता है और स्टेंट डाला जाता है। इससे आर्टरी को कोई नुकसान नहीं होता है और कैल्शियम के बारीक कण आर्टरी का ही हिस्सा बन जाते हैं। इस तकनीक से होने वाली एंजियोप्लास्टी में 45 मिनट से एक घंटा लगता है और फिर से ब्लॉकेज होने की संभावना पांच से सात प्रतिशत ही रह जाती है।

डॉ. रवींद्र सिंह राव, विशेषज्ञ, स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज, जयपुर।

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