राजस्थान पुलिस के अफसरों में टेरेटरी बनाने का ट्रेंड, सीनियर IPS और जूनियर IPS के बीच बढ़ रहा विवाद

रामगोपाल जाट। राजस्थान पुलिस के आईपीएस अफसरों में वन्यजीवों की तरह टेरिटरी बनाने का नया ट्रेन चल रहा है। भीलवाड़ा में अजमेर रेंज आईजी ने एनडीपीएस एक्ट के 4 मामलों की जांच बदल दी। पुलिस अधीक्षक का कहना है कि आईजी जानबूझकर उनके जिले में खामियां ढूंढने की फिराक में हैं। दूसरा मामला जयपुर रेंज का है।

जयपुर रेंज के दौसा जिले में पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी एक तबादला लिस्ट पर आईजी ने आपत्ति जताते हुए तबादला आदेश बदल दिया। अजमेर रेंज में भी आईजी और पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

उदयपुर और भरतपुर रेंज में भी इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भरतपुर में पिछले दिनों डीआईजी का करप्शन मामले में नाम आने के बाद अधिकारियों में आपसी सामंजस्य की कमी से मुश्किल आ रही है। उदयपुर रेंज में भी आईजी से एक पुलिस अधीक्षक की परेशानी है, कई दिनों से बातचीत तक बंद है।

एक आईजी ने एनडीपीएस मामले में बदल दी, जांच दूसरे ने बदले एससी के आर्डर

एनडीपीएस के 4 मामलों की जांच बदलने के लेकर आईजी अजमेर और पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा में ठन गई है। आईजी ने मामलों की जांच दूसरे जिले को दे दी है। आईजी का कहना है कि शिकायत मिली थी। पुलिस अधीक्षक का तर्क है कि पुलिस मुख्यालय के पास जांच के लिए कई एजेंसियां हैं, एसओजी या क्राइम ब्रांच कहीं से भी जांच करा ली जाए, सब कुछ नियम कानून के कायदे में रखकर किया गया है।

आईजी और एसपी के बीच सामंजस्य की पुलिस इनकी सबसे बेहतर बात कही जाती है। उन्हीं ने एक दूसरे के काम पर विश्वास नहीं हो तो उन पुलिस जिलों में क्राइम कंट्रोल और कानून व्यवस्था की स्थिति को काबू करना मुश्किल होता है। अजमेर रेंज में, और वो भी भीलवाड़ा जिला हो तो बात ही और अहम हो जाती है।

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पिछले दिनों जयपुर रेंज में भी आईजी और दोसा पुलिस अधीक्षक के तकरार चर्चित रही है। चुनाव से पहले पुलिस अधीक्षक ने थाना इंचार्ज की तबादला सूची जारी कर दी थी। आईजी ने तबादला सूची निरस्त कर दी, दोनों में ठन गई है। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा की जांच बदलने के नाम पर फाइलों में खेल के आरोप लगे विजिलेंस ने जांच चल रही है।

व्हाट्सएप कॉल पर रेप के आरोपी से 25 लाख रुपए मांगने की ऑडियो रिकॉर्डिंग ने भी राजस्थान पुलिस की छवि को दागदार किया है विवाद थमा नहीं है। पीएचक्यू की विजिलेंस विंग जांच कर रही है। देखना है कि विजिलेंस की जांच की आंच कहां तक पहुंची है, लेकिन इस विवाद के बाद से दोसा पुलिस अधीक्षक कार्यालय और रेंज कार्यालय के बीच दूरियां बढ़ गई हैं।

नेताओं की शह पर लौटे दागी अफसर

पता चला है कि पूर्व डीजीपी ने दागी आईपीएस अफसरों को नॉन फील्ड करने का निर्णय लेते हुए बकायदा सूची बनाकर सरकार को सौंपी थी, मगर बहुमत के नंबर गेम में फंसी अशोक गहलोत की सरकार ने विधायकों की नाराजगी के डर से ऐसे अफसरों के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

उसके बाद मंत्री और विधायकों की डिजाइन से 4-5 दागी आईपीएस फिर से फिर भी लौट आएंगे। सूचीबद्ध ऐसे अफसर फील्ड में आने से राठौड़ी पर उतर आए हैं। अजमेर रेंज में एक आईपीएस में अवैध बजरी व डोडा पोस्त के परिवहन रूट पर अपने चहेते अधिकारी तैनात किए हैं। यह आईपीएस एक राज्य मंत्री विधायक व खान कारोबारी के साथ खुद के कारोबार को फैलाने में लगा है।

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प्रतापगढ़ का हाल भी आजकल ऐसा ही है

उदयपुर रेंज में भी बॉर्डर एरिया के एक पुलिस अधीक्षक से आईजी की ठनी हुई है, लेकिन आईजी प्रमोशन की दौड़ में है अपनी छवि के प्रति सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस अधीक्षक कई बार बदतमीजी कर चुके हैं, लेकिन आईजी उन्हें हर बार छोड़ रहे हैं।

भरतपुर रेंज का हाल भी कुछ ऐसा ही है। जयपुर और जोधपुर कमिश्नरेट में फिलहाल शांति है, लेकिन इनमें एक कमिश्नर के डीजीपी से प्रॉपर ट्यूनिंग नहीं है ऐसे में वे दूसरे डीजी को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। राजस्थान पुलिस का मुख्यालय अब एक बिल्डिंग में जरूर चलता है, लेकिन वहां कई अफसरों का एक दूसरे के कमरे में आना-जाना तक नहीं है। पुलिस अवसरी एक दूसरे की पोल खोलने की फिराक में हैं।

बजरी के खेल में बड़े-बड़े नाम

राजस्थान में बजरी माफिया और पुलिस का गठजोड़ जगजाहिर हो चुका है। पुलिस मुख्यालय की विजिलेंस टीम का प्रेशर है। जयपुर कमिश्नरेट में तो 15 पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिर चुकी है। कई को थाने से हटाकर लाइन भेजा जा चुका है, लेकिन फिर भी राजस्थान के 5 जिले से बजरी माफिया सक्रिय हैं।

इन जिलों में कहीं पुलिस अधीक्षक तो कहीं आईजी का आशीर्वाद प्राप्त थानाधिकारी बजरी माफिया को संरक्षण दे रहे हैं। कुछ जिलों में तो लगता है कि माइनिंग डिपार्टमेंट के अधिकारी कर्मचारी पंगु हैं, वहां सब कुछ पुलिस के हाथ में है।

बजरी के ट्रक ट्रॉली जप्त करने से लेकर एफआईआर दर्ज कराने निगरानी रखने का काम तक पुलिस पर कर रही है। इन जिलों के बारे में शीर्ष अधिकारियों को सब पता है, कई बार वार्निंग दी जा चुकी है, लेकिन नीचे वाले हैं कि मानते ही नहीं। जयपुर तक हर दिन सैकड़ों ट्रक-ट्रैक्टर बजरी पहुंच रही है।

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नशा तस्करी में पुलिस एस्कॉर्ट के आरोप

अजमेर और उदयपुर रेंज में तो कुछ पुलिसवालों पर नशा तस्करों को एस्कॉर्ट करने की चर्चा है, इससे पुलिस मुख्यालय तक पहुंच चुके हैं। पिछले डीजीपी के कार्यकाल में एक डीएसपी को नशा तस्करों से सांठगांठ के चलते पुलिस सेवा से बाहर करने की तैयारी हो गई थी, लेकिन फिर नशा तस्करों के रूट पर ही पोस्टिंग दे दी गई।

ऐसे दबंगों के आगे सीनियर अधिकारियों के झुकने की वजह पॉलीटिकल प्रेशर के अलावा अधिकारियों के साथ सांठगांठ भी है। ऐसे में देखना है कि कब तक इन अफसरों की दबंगई चलती रहेगी।