राजस्थान: क्रिकेट की गाड़ी में सब सेटिंग के खिलाड़ी

– राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के निर्देश पर अंडर 23 क्रिकेट ट्रायल के लिए जिला संघों ने बिना ओपन सिलेक्शन भेज दिए 2-2 प्लेयर।

रामगोपाल जाट। राजस्थान का रहने वाला कोई युवा अच्छा क्रिकेट खेलता है या कोई माता-पिता क्रिकेट में अपने बच्चे का भविष्य ढूंढ रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद चौंकाने वाली है।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन अकैडमी ग्राउंड पर अंडर 23 क्रिकेट टीम के चल रहे ट्रायल में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से जो खिलाड़ी बुलाए गए हैं, उनके ट्रायल में पारदर्शिता नहीं रखी गई है। आरसीएन ने कोई स्पेसिफिक क्राइटेरिया तय नहीं किया है। जिला संघों ने दो-दो नाम भेज दिया हैं, जिला संघों ने चहेतों के नाम भेजे हैं।

जिसमें जिले में वर्षों से क्रिकेट खेल रहे हजारों से प्लेयर की आस पर पानी फिर गया, जो इस उम्मीद में थे कि सिलेक्शन के लिए जिला स्तर पर ओपन ट्रायल में अपना दम दिखाएंगे। जिला स्तर पर 2 प्लेयर के सिलेक्शन के लिए कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

जिला संघ के पदाधिकारियों ने अपनी मर्जी से खिलाड़ियों के नाम भेज दिए। जयपुर में ट्रायल भी हो गया है। हजारों प्लेयर्स से धोखा कर सेटिंग के प्लेयर क्रिकेट टीम बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

आरसी के निर्देश में जो लिखा उसी को खिलाड़ी बता रहे हैं संदिग्ध

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ने राजस्थान में सीनियर टीम के खिलाड़ियों के लिए ट्रायल के संबंध में जिला क्रिकेट संघ उसे जो पत्र लिखा उसमें 11 व 12 दिसंबर को जयपुर के आरसीए एकेडमी ग्राउंड पर ट्रायल के लिए बुलाया गया था।

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इस पत्र में सिर्फ इतना भर लिखा कि जिलों में अधिकतम 2 खिलाड़ी के नाम भेजें, नाम ऐसे हो जो पिछले वर्ष अंडर 23 टीम में नहीं रहे हों।

खिलाड़ी को 72 घंटे पुरानी कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट लानी होगी। रंगीन कपड़ों में आना है। यह ट्रायल सिर्फ जिला संघों की तरफ से भेजी गई लिस्ट में शामिल खिलाड़ियों का ही होगा।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित होना चाहिए, साथ ही आने-जाने का खर्च खिलाड़ी को खुद उठाना होगा।

इसपर कई खिलाड़ियों ने सवाल उठा दिए हैं। खिलाड़ियों का है कि जिला स्तर से 2 नाम भेजने से पहले उनके चयन किया जाना चाहिए था और जिला स्तर पर भी दो नाम सेलेक्ट करने के लिए कोई गाइडलाइन जारी करनी चाहिए थी।

जिसमें पहले जिला स्तर पर ट्रायल के निर्देश होते तो जिले की पात्रता को पूरा कर रहे खिलाड़ियों का ट्रायल लिया जाता। उस दौरान निर्धारित मापदंडों पर खरे उतरने वाले 2-2 खिलाड़ियों के नाम भेजते दे तो पारदर्शिता रहती। अब जिलों से जो नाम आए हैं, उनका पदाधिकारियों के करीबी प्ले सोने का डाउट है।

इन सवालों के जवाब नहीं हैं

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ने जिला संघों से 2 प्लेयर के नाम मांग लिए, लेकिन उनके सिलेक्शन के लिए कोई नियम तक तय नहीं किए?

जिला संघों ने भी चयन के लिए कोई ओपन प्रोसेस फॉलो नहीं किया, यहां तक कि जिनके नाम भेजे जा रहे हैं, उनका खुलासा भी नहीं किया गया?

जिलों में सैकड़ों खिलाड़ी राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पंजीकरण करा क्रिकेट खेल रहे हैं, उन्हें अंधकार में रखकर भविष्य का फैसला कैसे हो सकता है?

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन जैसी संस्था की टीम चयन के विरोध में खिलाड़ी

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के द्वारा सिलेक्शन ट्रायल के लिए अंदर खाने ही 2 नाम तय कर भेजे जाने का खिलाड़ियों ने विरोध शुरू कर दिया है। प्रदेश भर से सैकड़ों खिलाड़ी जयपुर आकर ट्रायल के दौरान विरोध करने का प्लान कर रहे हैं। देखना यह है कि कोरोना के चलते यह विरोध परवान चढ़ पाता है या नहीं, लेकिन खिलाड़ियों में इसको लेकर जबरदस्त आक्रोश है।

खिलाड़ियों का कहना है कि आरसीए अध्यक्ष को बिना बताए नीचे के लेवल पर यह खेल चल रहा है, जिसके लिए सचिव जिम्मेदार हैं, जिला संघ के पदाधिकारियों के दबाव में खेल किया गया है।

आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत से मिलेंगे खिलाड़ी

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत हैं सभी खिलाड़ियों के प्रति बड़े संवेदनशील बताए जाते हैं। ऐसे में प्रदेश भर से स्टाइल में शामिल होने से वंचित रहे खिलाड़ी जयपुर आकर उनसे शिकायत करने का प्लान बना रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में वैभव गहलोत के अध्यक्ष बनने के बाद से राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एक्टिविटीज में तेजी से बदलाव आया है, लेकिन निचले स्तर पर खिलाड़ियों की पदाधिकारियों की गड़बड़ी से कहीं न कहीं छवि बनते बनते बिगड़ने का डर भी सताने लगा है।