नशे में डूबी राजस्थान पुलिस के ‘इलाज’ की तैयारी

रामगोपाल जाट

– भीलवाड़ा में एनडीपीएस के 4 मामलों में बड़ी धांधली के आरोप पर आईजी अजमेर ने जांच ट्रांसफर कर दूसरी जिले को सौंपी।

भीलवाड़ा जिले में एक के बाद एक दर्ज हुए एनडीपीएस एक्ट (नारकोटिक ड्रग्स एन्ड साइकॉट्रॉपिक सब्सटेंस) के 4 मामलों में बड़े खेल की खबरें एक ही व्यक्ति से पकड़ी गई। अभी हमको जहाजपुर बीगोद और मांडलगढ़ थाने में तीन अलग-अलग जगह एफआईआर दर्ज कर जब्त किया गया।

तीनों मामलों में पुलिस पर कई दिन तक जांच के नाम पर 15 दिन से अधिक संदिग्ध लोगों की अवैध सर्विलांस कर पकड़ा, फिर ले देकर छोड़ देने की शिकायत अजमेर रेंज आईजी तक पहुंच गई। आईजी ने मामले की जांच बदली है अब जिले में एनडीपीएस एक्ट के नाम पर चल रहे हैं।

खेल में शामिल पुलिस वालों की हालत खराब है। एसपी अपने दबंग इमेज का हवाला देकर सबको कह रही हैं कुछ नहीं होगा, चिंता मत करो। इधर, आईजी ने साफ किया है कि धांधली पकड़ी गई तो किसी को नहीं बख्शा जाएगा।

नशा तस्करी के मामलों की असली कहानी

एनडीपीएस एक्ट में पिछले दिनों भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर सर्किल के हनुमान नगर थाने में अवैध डोडा पोस्त से भरा ट्रक पकड़ा गया था। आरोप है कि ट्रक थाना इंचार्ज गंगाराम विश्नोई ने पकड़ा था, सीज भी उसी की मौजूदगी में हुआ, लेकिन थाने पर प्रोबेशन आरपीएस ऑफिसर के बतौर ट्रेनी थाना इंचार्ज लगे होने की आड़ में एनडीपीएस एक्ट का केस होने के बावजूद जांच गंगाराम विश्नोई को ही दे दी गई।

जबकि एनडीपीएस एक्ट में राजस्थान में प्रावधान है कि जिस थाना इलाके में केस दर्ज होगा, जांच अधिकारी दूसरे किसी थानाधिकारी को बनाया जाएगा।

यह भी पढ़ें :  Jaipur में लव जिहाद: दवा के दबाव में धर्मान्तरण, हमदर्द बन हकीमों की हुस्न पर हुकूमत

इस मामले में शिकायत मिलने पर गंगाराम विश्नोई को सस्पेंड भी कर दिया गया है। मामले में पुलिस अधीक्षक प्रीति चंद्रा की भूमिका पर सवाल हैं कि उनके होते हुए ऐसा कैसे हुआ? तीन अन्य मामले जहाजपुर, मांडलगढ़ और बीगोद थाना इलाके में दर्ज हुए थे।

कुछ माह पहले 25 लाख रुपए की अफीम पकड़े जाने के केस में अफीम जहां पकड़ी गई, उसे तीन हिस्सों में बांट कर वाहवाही लूटने के लिए जब्ती तीन अलग-अलग थाना इलाकों में दिखाई गई। जहाजपुर सर्किल, जहाजपुर थाने और मांडलगढ़ सर्किल, मांडलगढ़ में व बीगोद थाने में 3 एफआईआर दर्ज की गई।

इस मामले में शिकायत मिली कि जिस व्यक्ति को पकड़ा गया, वह फर्स्ट टाइमर है। पुराना कोई क्राइम रिकॉर्ड नहीं फिर भी करीब 20 दिन तक उसका मोबाइल अवैध रूप से सर्विलांस पर लेकर एक दर्जन से अधिक लोगों को पूछताछ के नाम पर बुला- बुलाकर छोड़ दिया गया।

भीलवाड़ा के 4 केस की जांच बदलकर अजमेर वालों को दी

आईजी ने पिछले दिनों भीलवाड़ा में दर्ज हुए 4 मामलों में जहाजपुर, दीगोद और मांडलगढ़ थानों में दर्ज 3 मामलों की जांच बदलकर अजमेर जिले के डीएसपी ब्यावर हीरालाल सैनी को और अजमेर हनुमान नगर में पहले से दर्ज डोडा पोस्ट से भरे ट्रक के मामले की जांच अजमेर सिटी डीएसपी मनोज सोनी को दे दी है। दोनों ही अक्सर इन मामलों की गहनता से जांच करने में लगे हैं।

अब तक होता है यह रहा है कि एनडीपीएस एक्ट के मामले में जिस थाना इलाके में केस पकड़ा जाता है, उसकी जांच दूसरे थाने में 34 से करवाई जाती है, लेकिन अजमेर रेंज में एक-दो नहीं, बल्कि कई मामलों की जांच के नाम पर बड़ा खेल चलने की शिकायत मिली थी। यह मामला पूरे राजस्थान पुलिस की चर्चा का विषय बना हुआ है, जल्द पोल खुलने वाली है।

यह भी पढ़ें :  राष्ट्रवादी प्रखर वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने पाताललोक और अनुष्का शर्मा की उधेड़ी बखियां

बड़लियास थाना इंचार्ज की भूमिका संदिग्ध, जांच में आ सकती है आंच

इस पूरे प्रकरण में सबसे संदिग्ध भूमिका बड़लियास थाना इंचार्ज सुरजीत ठोलिया की है बताई जा रही है। उनके पास मांडलगढ़ थाने में दर्ज 25 किलो अफीम पकड़े जाने के केस की जांच की थी। शिकायत कर फाइल आईजी ऑफिस मंगवा कर जांच के लिए ब्यावर सीईओ को दे दी गई।

दो अन्य मामलों की जांच कोटडी और शाहपुरा थाना इंचार्ज कर रहे थे, उनसे भी मामले की फाइल वापस मंगाकर ब्यावर सीओ को जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।

चर्चा है कि ठोलिया ने ही एनडीपीएस के मामले में इन्वेस्टिगेशन के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से उठाया और पूछताछ करने के बाद छोड़ा। हालांकि, सुरजीत ठोलिया का कहना है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। इस मामले में ठोलिया की भूमिका की जांच भी की जा रही है।

प्रीति चंद्रा भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक

भीलवाड़ा में दबंग अंदाज वाली महिला आईपीएस प्रीति चंद्रा पुलिस अधीक्षक लगी हुई हैं। उनके होते भी एनडीपीएस है जैसे गंभीर अपराध में इस तरह की धांधली पुलिस अफसरों की मॉनिटरिंग पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंच चुका है।

अजमेर आईजी ने एनडीपीएस एक्ट मामले में बदल दी जांच

अजमेर रेंज आईजी हवा सिंह घुमरिया का कहना है कि भीलवाड़ा में एनडीपीएस एक्ट के मामले की इन्वेस्टीगेशन में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थी अब जांच बदल दी गई है अगर कोई दोषी है तो बचेगा नहीं चाहे पुलिस अधिकारी हो चाहे कोई और।

यह भी पढ़ें :  प्रदेश के चिकित्सा मंत्री एक बार फिर खुद की पीठ थपथपा रहे हैं

इन दिनों चर्चा में पुलिस के किस्से

राजस्थान पुलिस में क्राइम कंट्रोल बदमाशों की धरपकड़ से ज्यादा ऑफिसर से लेकर इंस्पेक्टर तक की करतूतों के किस्से खूब चर्चा में है यह मैं अजमेर रेंज से ट्रांसफर होकर जयपुर में आए आरबीएस अफसर से लेकर इंस्पेक्टर तक के चार पुलिस अधिकारियों की चौकड़ी की चर्चा हो या फिर भीलवाड़ा में एक महिला अधिकारी और इंस्पेक्टर की अच्छी ट्यूनिंग की चर्चा हो जयपुर में एक महिला इंस्पेक्टर की पुलिस महकमे में दबंग इमेज की बात हो या फिर मिजाज कुर्सी के दम पर टिकी हुई कुछ अफसरों को नए डीजीपी साहब के आने के बाद टेंशन में होने की चर्चाएं हो प्रदेश के 6 जिलों में तो बजरी का अवेध परिवहन पुलिस के लिए सबसे बड़ी टेंशन बन गई है बजरी माफिया को पुलिस ने भाव देखकर ऐसा माहौल बना दिया है जैसे कि वे बजरी माफिया नहीं होकर चंदन तस्कर वीरप्पन वन्यजीव तस्कर संसार चंद या फिर कोई हथियार या नशा तस्कर हो इन सब को ठीक करने के लिए पुलिसिंग में सुधार की जरूरत है।