ये हैं राजस्थान पुलिस के चमत्कारी अफसर, पढ़िए इनके कारनामे

रामगोपाल जाट। राजस्थान पुलिस के कुछ चमत्कारी अफसरों से आपको रूबरू करवाते हैं। ये ऐसे अफसर हैं, इनके ट्रांसफर, पोस्टिंग के मामले हैरान करने वाले हैं। कोई अपने कद्दावर छवि के चलते एक ही पद पर तीसरी बार पोस्टिंग पा लेता है तो कोई फील्ड का अनुभव होने के बावजूद ऐसी जगह जमा है, जहां पोस्टिंग के लिए फील्ड का अनुभव ही सबसे बड़ी प्राथमिकता माना जाता है। कुछ अधिकारी प्रमोशन हो जाने के बाद भी थाना इंचार्ज बने हुए हैं, उनके सीनियर थाने पहुंचते हैं तो दुविधा हो जाती है। दोनों की एक रैंक है। मातहत किसे बड़ा अफसर मानें। कुछ अफसर ऐसे भी हैं जो पुलिस में भर्ती के समय फिसड्डी होने के कारण नॉन फील्ड में गए, लेकिन जल्द प्रमोशन होकर टॉपर से आगे निकल गए।

चार थानों में दो-दो डीपीएसपी

जयपुर शहर के 4 थानों में चौंकाने वाले हालात हैं। शहर के चार थानों में तैनात इंस्पेक्टर पदोन्नत होकर डीएसपी बन गए। इनमें गलता गेट थाने में तैनात धर्मवीर सिंह, सिंधी कैंप थाने में जुल्फिकार अली, बस्सी थाने में शिवकुमार भारद्वाज और महेश नगर थाने में बालाराम जाट डिप्टी एसपी बनने के बावजूद बतौर थानाधिकारी काम कर रहे हैं। इन थानों में जब एरिया के एसीपी विजिट करने आते हैं तो बड़ी मुश्किल हो जाती है। एक ही थाने में दो-दो डीएसपी ब्लूकैप लगाए बैठे होते हैं, हालांकि वरिष्ठ-कनिष्ठ होते हैं।

आरएसी से आये जांबाज को सर्किल

आरएसी में सब इंस्पेक्टर भर्ती होकर कंपनी कंपाउंड के बाद प्रमोट होकर डिप्टी एसपी बने कई अफसरों को पोस्टिंग से नवाजा गया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन वर्तमान में कई अफसर फील्ड में पोस्टेड हैं, इनमें संजीव चौधरी एसीपी मानसरोवर, नीति राज सिंह सीओ, गंगरार चित्तौड़गढ़, तेज कुमार पाठक सीओ बामनवास, हितेश मेहता सीओ वल्लभनगर, उदयपुर पोस्टेड हैं, जबकि फील्ड में कद्दावर रहे कई अफसरों को पहले से ही डिप्टी कमांडेंट के पद पर नियुक्ति मिलती थी।

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आरएसी का कैडर, जयपुर सिटी में एसीपी

चमत्कारी अफसरों में टॉप पर हैं आरएसी कैडर के संजीव चौधरी। हर ऐसे में कंपनी कमांडर जैसे डीजीपी रहे भूपेंद्र यादव के करीबी बन गए। जहां भूपेंद्र यादव गए संजीव चौधरी को भी साथ ले गए। प्रमोशन पाकर डिप्टी एसपी बने और भी ऐसी पोस्टिंग मिली कि पूरा पुलिस महकमा हैरान रह गया। एसीपी मानसरोवर, इस सर्किल की ऐसी इमेज रही है कि डीजीपी तक रात को थाने का मुआयना करने पहुंचे हैं, ट्रेनिंग के दौरान सीओ लगाया जाता है। ऐसे में संजीव चौधरी की पोस्टिंग को पुलिस वाले चमत्कार से कम नहीं मानते।

भर्ती में पीछे, प्रमोशन में आगे

पुलिस में सब इंस्पेक्टर भर्ती के समय जो सबसे फिसड्डी होते हैं, उन्हें आरएसी में पोस्टिंग मिलती है। सब इंस्पेक्टर लेवल तक सिविल पुलिस व आरएसी में सीनियरिटी लिस्ट अलग-अलग होती है और ऐसे में पद कम होने की वजह से वहां करीब 5 वर्ष में ही प्रमोशन मिल जाता है, वहां का सब इंस्पेक्टर 5 वर्ष में कंपनी कमांडर बन जाता है जो पुलिस सिविल पुलिस के इंस्पेक्टर के समान होता है। इंस्पेक्टर बनते ही कंपनी कमांडर और इंस्पेक्टर की सीनियरिटी लिस्ट एक बन जाती है। ऐसे में आरएसी वाले फील्ड वालों से पहले प्रमोट होकर डीएसपी बन जाते हैं।

एक ही पोस्ट पर तीसरी बार मिली पोस्टिंग

आरपीएस ऑफिसर ज्ञान चंद यादव अभी जयपुर ग्रामीण में एडिशनल एसपी हेड क्वार्टर की पोस्ट पर हैं। उनका कामकाज प्रदेश सरकार के गृह विभाग को इतना पसंद आया कि एक ही पोस्ट पर उनकी तीसरी बार नियुक्ति करनी पड़ी। यह अपने आप में उदाहरण है। गौरतलब है कि ज्ञान चंद यादव पुलिस फोर्स जॉइन करने के बाद सीओ मानसरोवर, एडिशनल एसपी साउथ, नागौर पोस्टिंग हुई तो कुछ ही माह में जयपुर वापसी हो गई। यह पुलिसिंग में भी परफेक्ट है, जहां-जहां पोस्टर रहे कई बड़ी वारदातों हुईं, खुली भीं, चर्चा में भी रहे। लेकिन एडिशनल एसपी के एक ही पद पर तीसरी बार उनकी पोस्टिंग सबको हैरान करने वाली नियुक्ति मानी जा रही है।

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चमत्कार से कई प्रभावित

पुलिस महकमे में लंबे समय तक एडिशनल एसपी से आईपीएस में होने वाले डीसीपी भी अटकी रही थी। इसके पीछे भी चमत्कारी अफसरों को बड़ा कारण बताया जाता है। नीचे वाले अफसरों को लिस्ट में शामिल करने के चक्कर में करीब 2 वर्ष तक डीसीपी अटकने की चर्चा हो रही है। चमत्कारी अफसरों के सिर पर जिनका हाथ था, वे डिगे, तब लंबे इंतजार के बाद सीनियर ऑफिसर का भला होने की राह खुली। चमत्कारी अफसरों के प्रभावित अफसरों से इनके किस्से सुने जा सकते हैं।