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जयपुर।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान केवल 10 दिन के अंदर किसानों का सम्पूर्ण कर्जामाफ करने का ऐलान किया गया था, लेकिन 18 दिन बाद आज पहली बैठक हो रही है, वह भी किसानों की पात्रता निश्चित करने के लिए।

राज्य सरकार द्वारा मंत्रीमंडल के गठन से पहले ही मुख्यमंत्री द्वारा कर्जमाफी का ऐलान किया गया था, लेकिन अभी तक उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कर्जमाफी के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया गया था। उस कमेटी की आज पहली बैठक हो रही है।

इस बैठक में कर्जमाफी के दायरे में आने वाले किसानों की पात्रता तय की जाएगी। यह वह बिंदु जिसको लेकर घोषणा के साथ जोड़कर सरकार ने अपना दामन बचाया था।

कमेटी में कृषिमंत्री लालचंद कटारिया, सहकारिता मंत्री अंजना उदयलाल, उच्च शिक्षा मंत्री भंवरसिंह भाटी और वन मंत्री सुखराम विश्नोई हैं, जबकि सीएम के सलाहकार गोविंद शर्मा भी बैठक में उपस्थित हो रहे हैं।

दरअसल, राज्य सरकार ने एलान किया था कि राज्य के सहकारिता विभाग से लिया गया फसली अल्पकालीन कर्ज, जबकि राष्ट्रीय बैंकों से लिए गए कर्ज के कारण डिफॉलटर हो चुके किसानों का ब्याज और पैनल्टी का 2 लाख रुपए तक का लोन माफ किया जाएगा।

सरकार ने 18 हजार करोड़ रुपए का कर्जमाफ करने का दावा किया था। इसके साथ ही सरकार ने पात्रता वाले किसानों का नाम भी जोड़ा है। इन्हीं पात्र किसानों की पात्रता निर्धारित करने के लिए यह कमेटी बनाई गई है।

यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण के दो दिन में कर्जमाफी का ऐलान करने वाली सरकार ने आज 5 जनवरी, यानी 18 दिन बाद भी एक किसान का कर्जा माफ नहीं किया गया है।

जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार रैलियों के दौरान कहा था कि 10 दिन के भीतर सभी किसानों का लोन माफ कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कर्ज से परेशान राजसंद, झालावाड, श्रीगंगानगर, जोधपुर में चार किसानों ने अब तक आत्महत्या कर ली है।

आपको बता दें कि राज्य में 59 लाख से ज्यादा किसानों के उपर 99 हजार का कर्जा है, जबकि पिछली सरकार ने 8174 करोड़ का कर्जामाफ किया था।