जयपुर/भोपाल।

कांग्रेस पार्टी द्वारा खुद की सरकार बनने पर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ करने का वादा आज सरकार बनने के साथ ही अमल में लाया गया है।

कांग्रेस पार्टी की तरफ से आज राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अल्बर्ट हॉल के सामने सुबह 11:00 बजे पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

उसके बाद दोपहर में कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। दोपहर बाद छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री ने अपने पद की शपथ ली।

सबसे जरूरी और कांग्रेस पार्टी द्वारा किया गया सबसे बड़ा वादा, किसान कर्जमाफी का पूरा करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 1 घंटे के भीतर फाइल साइन कर दी।

मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने अधिकारियों से किसान कर्ज माफी की फाइल मंगवाई और मध्य प्रदेश के किसानों का राष्ट्रीकृत और सहकारी बैंकों से लिया गया 2 लाख रुपये तक का अल्पकालीन फसली ऋण माफ करने की फ़ाइल पर हस्ताक्षर कर दिए।

अब इसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के ऊपर अपने-अपने राज्यों में कर्जा माफ करने का दबाव बन गया है।

संभावना है कि जल्द ही इन दोनों राज्यों में भी कांग्रेस पार्टी की सरकारें भी अपने अपने राज्य के किसानों का 2-2 लाख रुपये तक का कर्जा माफ कर देगी।

तीनों राज्यों में यदि इसी तरह से किसान कर्ज माफी को अमल में लाया जाता है तो यह देश के इतिहास में पहली बार होगा, जब इतने बड़े पैमाने पर किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों का कर्जा माफ करने को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा है, “एक का कर्जामाफ, दो भी करने जा रहे हैं।” यह हैं मुख्य बिंदु-

  • कमलनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही इसकी मियाद के पहले ही दिन कर्जमाफी पर काम शुरू हुआ।

  • कर्जमाफी की कवायद चुनाव परिणाम आने के बाद से ही शुरू हो गई थी।

  • प्रदेश सरकार के आला अधिकारियों ने प्रदेश के सभी जिलों से किसानों पर कितना कर्ज है इसके आंकड़े मंगाना शुरू कर दिया था।

  • मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने भी कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों से इसकी तैयारी के बारे में पूछा है।

  • बताया जा रहा है कि कर्ज माफी जून 2009 के बाद के कर्जदार किसानों की होगी।

-हालांकि, कर्जमाफी की पात्रता और मापदंड के लिए बनाई गई कमेटियां ही तय करेंगी कि किस किसान का कर्ज माफ होगा किसका नहीं।

  • ये कमेटियां राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक गठित की जाएंगी, इनकी रिपोर्ट के बाद कर्जमाफी के प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।

  • कर्ज माफी जून 2009 के बाद के कर्जदार किसानों की होगी। इसमें लगभग 33 लाख किसानों को फायदा होगा।

  • बताया जा रहा है कि इससे लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार सरकार पर आएगा।

  • इसमें 56 हजार करोड़ रुपये का कर्ज 41 लाख किसानों ने लिया है।

  • वहीं, लगभग 15 हजार करोड़ रुपये डूबत कर्ज (एनपीए) है।

  • कर्ज माफी के लिए फिलहाल जिस फॉर्मूले पर मंथन हो रहा है, उसमें डूबत कर्ज को माफ करने के साथ नियमित कर्ज पर लगभग 25 हजार रुपये प्रोत्साहन दिया जाएगा।

  • किसानों द्वारा ट्रैक्टर व कुआं सहित अन्य उपकरणों के लिए कर्ज लिया गया है तो उसे कर्ज माफी के दायरे में नहीं लिया जाएगा।

  • सिर्फ खेती के लिए उठाए कर्ज पर माफी मिलेगी।

  • इसमें भी यदि किसान ने दो या तीन बैंक से कर्ज ले रखा है तो सिर्फ सहकारी बैंक का कर्ज माफ होगा।

  • कर्ज माफी कुल दो लाख रुपये तक ही होगी।

  • इसके लिए पहले किसान को कालातीत बकाया राशि बैंक को वापस लौटानी होगी।

  • हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री बनने और उनके साथ होने वाली बैठक में होगा।