भोपाल।

सरकार बनने के साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री कमलनाथ के द्वारा प्रदेश के किसानों का दो-दो तक का कर्जा माफ करने का ऐलान किया गया है।

मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा जारी किए गए पहले ऑर्डर में कहा गया है कि प्रदेश के किसानों का 2 लाख तक का कर्जा माफ किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि यह कृषि के लिए लिया गया अल्पकालिक ऋण होगा।

हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कर्जा माफ करने का ऐलान किया गया है लेकिन इसके साथ ही कई तरह के क्लोज लगा दिए गए हैं। जिसके चलते प्रदेश के किसानों को बेहद कम लाभ मिलेगा।

कृषि के जानकारों के मुताबिक यह मध्य प्रदेश की नई नवेली सरकार के द्वारा बहुत बड़ा छलावा साबित होने की संभावना जताई जा रही है। यह क्लोज हैं, जो ऋण माफी का फायदा छीन रहे हैं-

-केवल अल्पकालिक ऋण माफ होंगे, मतलब यह हुआ कि पुराना कोई लोन माफ नहीं होगा। जिसके नहीं चुका पाने के कारण किसानों की जमीनें बैंकों द्वारा कुर्क की जाती है और जिनके दबाव में ही किसान आत्महत्या करते हैं।

-31 मार्च 2018 से पहले के ही लोन माफ किये जायेंगे, जबकि अल्पकालिक ऋण केवल 6 माह के लिए दिए जाते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि 9 माह पहले बकाया रहे कितने किसानों को इस ऋणमाफी का लाभ मिलेगा?

-केवल कृषि ऋण माफ होंगे, ट्रैक्टर-ट्रॉली और कुवां खुदाई-बंधाई के लोन माफ नहीं होंगे। जबकि मोटा लोन इनका ही होता है।

-किसान को अधिकांश कर्ज़ा तभी मिलता है, जब वह पुराना ऋण चुकता कर देता है। ऐसे में यह कर्जमाफी कारगर साबित नहीं होगी।

-सबसे बड़ी बात यह है कि मध्यप्रदेश में अधिकतर किसानों का लोन ही 31 मार्च 2018 के बाद के हैं, ऐसे में क्या सरकार ने किसानों के साथ धोखा नहीं किया है।

-एक से अधिक बैंकों से लोन होगा तो केवल सहकारिता का ऋण ही माफ होगा, जबकि किसानों को सहकारिता से 2 लाख तक का लोन मिलता ही नहीं है।

-मोटे तौर पर बेहद न्यूनतम संख्या में किसान फसली ऋण लेते हैं, किसानों का अधिकांश ऋण ही किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का होता है।

-सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ऋण माफी का एलान किया है, लेकिन बजट प्रोविजन का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। यह राज्य के खजाने को हजम नहीं हो रहा है।

-पात्र किसानों का जिक्र किया गया है, जो बेहद बड़ा और पेचीदा सवाल है कि पात्रता कैसे तय की जाएगी।

-सिर्फ लघु अवधि के लोन माफ होंगे, जबकि 75% से ज्यादा किसान मध्यम और दीर्घ अवधि के लिए लोन लेते हैं।

-अभी इस फैसले को कैबिनेट से भी अप्रूव्ड करवाना है। यदि किसी मंत्री ने इसपर ऑब्जशन (इसकी संभावना बेहद कम है) किया तो राह कठिन हो जाएगी।

-राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बीते साल ही इस तरह का ऋण माफ कर चुकीं हैं। जबकि अधिकांश ऋण इसी केटेगिरी में आता है।