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जयपुर।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में हुए विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा राजस्थान में किसानों का संपूर्ण कर्जामाफ करने का वादा धराशाही हो गया।

आज शासन सचिवालय में राजस्थान कैबिनेट सब कमेटी की मीटिंग के बाद पत्रकारों से बात करते हुए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि प्रदेश के आत्महत्या कर चुके किसानों का संपूर्ण कर्जामाफ किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कर्जमाफी के लिए प्रदेश के पात्र किसानों के निर्धारण से संबंधित 10 जनवरी को एक बार फिर मीटिंग होगी, जिसमें कर्जामाफी के लिए पात्र किसानों की पात्रता निश्चित की जाएगी।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि प्रदेश के जिन किसानों का कर्जामाफ किया जाएगा, उसके बाद प्रदेश के ऊपर पड़ने वाले आर्थिक बाहर को किस तरह उबरा जाएगा और उसकी पूर्ति राजस्व वसूली से कैसे की जाएगी। कमेटी ने सम्पूर्ण कर्जमाफी पर भी चर्चा की है।

संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण के 2 दिन के भीतर ही प्रदेश के किसानों के कर्ज माफी की घोषणा कर चुकी है, जिसको लोकसभा चुनाव से पहले अमलीजामा पहनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेश के उन किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ किया जाएगा जो आत्महत्या कर चुके हैं, और इस कार्य को मार्च के महीने तक पूरा किए जाने की संभावना है।

आपको बता दें कि राजस्थान सरकार ने सहकारिता विभाग से जिन किसानों ने फसली अल्पकालीन ऋण लिया है, उनका संपूर्ण ऋण माफ करने राष्ट्रीयकृत और प्रादेशिक बैंक को से लिए गए जो किसान डिफॉल्टर हो चुके हैं, उनका 2 लाख रुपए तक का कर्जा माफ करने की घोषणा की थी।

इससे पहले राजस्थान में विभिन्न चुनावी सभा में बोलते हुए कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी, उनके बाद वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने किसानों के संपूर्ण कर्ज़े को माफ करने का वादा किया था।

इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह भी दावा किया था कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने के 10 दिन के भीतर-भीतर किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ कर दिया जाएगा, लेकिन आज मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के 20 दिन बाद कैबिनेट सब कमेटी की पहली मीटिंग, वह भी केवल कर्जमाफी के दायरे में आने वाले किसानों की पात्रता निर्धारित करने के लिए हुई है।

सहकारिता विभाग के सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान में प्रदेश सरकार के द्वारा की गई कर्ज माफी की घोषणा को पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतारा जा सकेगा, इसका कारण राज्य सरकार के ऊपर आर्थिक बोझ बताया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार पिछले साल ही सहकारिता विभाग से लिए गए किसानों के ₹50000 तक के ऋण माफी की थी, जिससे राज्य सरकार पर 8174 करोड रुपए का भार पड़ा था।

बताया जाता है कि उस ऋण माफी के दौरान राज्य सरकार ने करीब 5500 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्जा लिया था। ऐसी स्थिति में राजस्थान सरकार को रिजर्व बैंक की तरफ से और कर्जा दिए जाने की संभावना बेहद कम है।