जयपुर।
राजस्थान सहकारिता विभाग के द्वारा दिया जा रहा कृषि ऋण जाति पूछकर दिया जा रहा है। इसकी शिकायत करने के बाद भी कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए उच्च अधिकारियों के सिर पर जूं तक नहीं रैंग रही है।

सबसे पहले शिकायत टोंक जिले से की गई। इससे पहले कभी इस तरह की शिकायत नहीं आ रही थी, किंतु इस बार जब राज्य सरकार ने फिर से किसानों को लोन देने का फैसला किया, तो अधिकारियों ने एक तरह से ‘शक्ल देखकर तिलकर निकालने’ का काम शुरू कर दिया।

सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने बताया कि इस मामले की उनको जानकारी नहीं है। उनको बताया गया तो कहा कि वह इस बात की पूरी जानकारी लेकर संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई करेंगे।

बता दें कि राज्य सरकार द्वारा किसान कर्जमाफी करने के बाद प्रदेश के कृषकों को अप्रेल के बजाए अब जुलाई में लोन दिया जा रहा है, जो काफी देर हो गई है। फिर भी अधिकारियों के द्वारा जाति पूछकर लोन देना कहीं भी पहला मामला है।

मामला राज्य सरकार के मंत्री उदयलाल आंजना तक पहुंच चुका है, फिर से यदि किसानों की जाति पूछकर ऋण देने का सिलसिला नहीं थमता है तो राजस्थान सरकार की बहुत बड़ी नाकामयाबी होगी।

फिलहाल किसानों को लक्ष्य के मुकाबले काफी कम लोन दिया जा रहा है और इसी को लेकर भी विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिये हैं। अहम सवाल यह भी है कि ऐसे क्या कारण है कि किसानों को बार बार लोन लेना पड़ता है?