नई दिल्ली।

दुनिया भर में लोगों को जवान से बुड्ढा करने का काम कर रहा है। एक android.app तेजी से वायरल हो रहा है। इसको अब तक करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं।

यह ऐप एंड्राइड प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर दोनों जगह पर उपलब्ध है। रूस की कंपनी द्वारा बनाया गया यह है, लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि इसको इंस्टॉल नहीं करना चाहिए और उसको यूज नहीं करना चाहिए। आप किसी भी उम्र के व्यक्ति हो आपकी उम्र 50 साल 60 साल 70 साल और 80 साल दिखाकर यह आपकी फ्यूचर की तस्वीर बनाई दिखा दे, लेकिन आपका पर्सनल डाटा तेजी से चोरी कर रहा है। देखिए वीडियो और पहचानिए खतरे

इस ऐप को यूज करने के बाद जैसे ही आप फोटो अपलोड करते हैं तो आप की फोटो के साथ आपके मोबाइल फोन में उपलब्ध कांटेक्ट नंबर, ईमेल आईडी फोटोस, वीडियोस समस्त समेत समस्त जानकारी चुरा ली जाती है। इसका आपको पता भी नहीं चलता है।

एप की बात की जाए तो यह रसिया की एक कंपनी के द्वारा बनाया गया है और 2017 में स्कोर एंड्राइड प्ले स्टोर पर अपलोड किया गया था, हालांकि यह पॉपुलर नहीं हुआ और इसके बाद इसको 18 जुलाई 2019 को यानी 3 दिन पहले ही फेशएप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपडेट किया गया है।

आपको बता दें कि इस ऐप को रूस की एक कंपनी ने वायरलेस लैब में बनाया था जिसके संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी यारोलव गोंशरोव माइक्रोसॉफ्ट में काम कर चुके हैं। रूस से होने के कारण इस ऐप को यूज करने के खतरे की बात भी ज्यादा बताई जा रही है।

शाहरुख खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन, विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी समेत देश दुनिया की जानी-मानी हस्तियों द्वारा इस ऐप को यूज किया जा रहा है, लेकिन इसका खतरा शायद यूजर्स को मालूम नहीं है।

इस एप्लीकेशन से डाटा प्राइवेसी और सुरक्षा की बात करने वाले तमाम लोगों को चिंता में अवश्य डाल दिया है। विश्व का सबसे शक्तिशाली देश माना जाने वाला अमेरिका भी इस एप से घबराया हुआ है।

बीते दिनों डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने अपने मोबाइल से इस ऐप को हटाने और एफबीआई से जांच करवाने की मांग की थी। बताया जाता है कि अमेरिका इस एप से इसलिए डरा हुआ है क्योंकि यह रशियन है।

रशिया और अमेरिका के बीच में हमेशा तनातनी रहती है, जिसके कारण अमेरिकी लोग हमेशा रूस को शंका की दृष्टि से देखते हैं।

अमेरिका रूस पर उसके चुनाव के दौरान भी इंटरनेट के द्वारा राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के आरोप लगाता रहा है।

आपके मोबाइल एप्स में जो जो डाटा, निजी जानकारी है उसको खतरा काफी पहले से फेसबुक और गूगल जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां से भी रहा है, जो हमारी निजी जानकारी को उपयोग कर चुकी है।

इसी के चलते फेसबुक पर बीते दिनों अमेरिका ने 34 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था।

बीते दिनों इंटरनेशनल कंप्यूटर साइंस इंस्टीट्यूट ने गूगल के प्ले स्टोर से 88 हजार मोबाइल एप्लीकेशंस पर रिसर्च करने के बाद यह नतीजा निकाला कि 1325 एप्लीकेशंस ऐसी है जो आपकी इजाजत के बिना यानी आप की अनुमति के बिना ही आपका सारा डाटा चुरा रहे हैं।

यह एप्लीकेशन आपके मोबाइल के एसडी कार्ड में मौजूद फाइल्स तक पहुंच जाते हैं। प्ले स्टोर पर करीब 27 लाख ऐप्स होने की जानकारी सामने आई है। जिनमें से 88 हजार की जांच के बाद यह नतीजा सामने आया है।

यह एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मतलब कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर की इंसान की तरह सोचने और समझने की क्षमता को कहा जाता है।

विश्व के कई देश इस पर काम कर रहे हैं। फेशियल रिकॉग्नाइजेशन मतलब चेहरे को पहचानने की क्षमता भी इसी का एक हिस्सा है। इन दिनों मोबाइल से लेकर एयरपोर्ट तक में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

फेस आपके चेहरे का डाटा एकत्रित करता है और इसीलिए इसके बारे में चिंता जताई जा रही है। फेशएप की बात की जाए तो अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लोग इसको प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके हैं।

दुनिया के 121 देशों में एप्पल स्टोर पर फेशएप्प एप पहले पायदान पर बना हुआ है। 12.5 लाख से ज्यादा इंस्टाग्राम पोस्ट है जो इस ऐप के माध्यम से की गई है।

इस ऐप को लेकर हर घंटे 22000 से ज्यादा ट्वीट्स रहे हैं, जोकि उम्र के चैलेंज और फेशएप से जुड़े हुए हैं। भारत की बात की जाए तो 97% तक लोगों की रुचि फेशएप में गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक बताई जा रही है।

फेशएप के डाटा चुराने की बात की जाए एप डाउनलोड करने के बाद 250 तरह की अनुमति हमसे लेता है, जिसकी हम ऐप को डाउनलोड करते वक्त परवाह नहीं करते हैं और बिना सोचे समझे अनुमति दे देते हैं।

फेसबुक और गूगल जैसी नामी कंपनियां भी इस तरह के एप्स बनाने में शामिल है। आईटी एक्सपर्ट के और एथिकल हैकर दिलीप सोनी बताते हैं कि जब भी हम कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं तो एक प्रकार से उसका कॉन्ट्रैक्ट डिजिटल साइन कर लेते हैं।

बहुत सारे ऐप्स आप की लोकेशन, कांटेक्ट नंबर, एसएमएस, ईमेल आईडी, फोटोज, वीडियोस यूज करने की अनुमति चाहते हैं। खास बात यह है कि फोटो आपको आपके s.m.s. देखने की जरूरत नहीं है, फिर भी यह अनुमति लेता है।

नई बात सामने आई है कि गूगल अलेक्सा और सीरी से भी हम जो बातें कर रहे हैं, वे कंपनियां हमारे पास सुरक्षित डाटा को चुरा रही है और विश्लेषण के लिए थर्ड पार्टी को बेच रही है।

डाटा एक्ट की बात की जाए तो कोई भी विदेशी एप भारत में किसी भी मोबाइल यूजर की प्राइवेसी का उल्लंघन करते हैं तो उस पर लगाम लगाने के लिए कोई खास कानून नहीं है।

साल 2019 में चुनाव के वक्त सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि भारत को पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल की बेहद आवश्यकता है। इस बिल पर पिछले 15 सालों से लगातार काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसका ड्राफ्ट तैयार नहीं हुआ है।

रविशंकर प्रसाद ने बताया था कि जो एप्स डाटा चोरी करते हैं, उन्हीं के लिए यह एक चलाने की आवश्यकता है। एग्जांपल के तौर पर फेस है फोटोस का इस्तेमाल करके आप का बुढ़ापा दिखाने का काम कर सकता है, इसके अलावा अगर किसी भी तरह की कोई चोरी करता है तो वह क्राइम की श्रेणी में आता है।

साइबर एक्सपर्ट दिलीप सोनी बताते हैं कि फेसबुक यूजर्स को फेस ऐप के माध्यम से होने वाले नुकसान से सावधान रहना होगा। एंड्रॉयड एप यूजर अपने मोबाइल फोन की सेटिंग में एप्लीकेशन मैनेजर पर जाकर एप को दी गई परमिशन देख सकते हैं और उसको तुरंत प्रभाव से बंद कर दें।

दिलीप सोनी के मुताबिक फेस है प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार यह आपकी प्रत्येक तस्वीर को कभी भी कैसे भी और कहीं भी इस्तेमाल कर सकता है। आपके कांटेक्ट नंबर भेज सकता है, थर्ड पार्टी को इस्तेमाल के लिए दे सकता है।

आपके वीडियोस की काट छांट करके उसको भी बेच सकता है। इसके द्वारा आपकी प्राइवेसी गलत हाथों में जा सकती है। आपकी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। आपकी निजी जानकारी विज्ञापन दाताओं को दी जा सकती है।

फेसबुक के जरिए यदि आप लॉगइन हैं तो फेशएप आपका ईमेल और कॉन्टैक्ट्स हासिल कर लेता है। क्योंकि फेसएप्प रूस की कंपनी है और उसका ऑफिस अमेरिका में भी है।

इसलिए आपके कांटेक्ट, फोटोस, वीडियोस जानकारी दुरुपयोग के लिए कोई कानूनी कार्रवाई करना भी मुश्किल है। फिलहाल भारत में डाटा प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है।

आपको याद हो तो पिछले साल फेसबुक ने 10 ईयर चैलेंज के रूप में 10 साल पुरानी फोटोस शेयर करने को कहा था। इन तस्वीरों को पेंटिंग जैसा बनाने के लिए प्रिज्मा एप को वायरल किया गया था।

साइबर एक्सपर्ट दिलीप सोनी बताते हैं कि इस तरह विश्व के करोड़ों लोगों की फोटोस एकत्रित की गई और उनको थर्ड पार्टी को भेज दिया गया।

टेक कंपनियां चेहरा पहचानने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्निक के माध्यम से एक्यूरेट करने में इस्तेमाल कर सकती है। विश्व के कई देशों में फेस रिकॉग्नाइजेशन तकनीक जैसी एप्स तेजी से इस्तेमाल की जा रही है।

भारत में कई एयरपोर्ट पर चेहरा को ही बोर्डिंग पास मानकर प्रवेश देने की शुरुआत हो चुकी है। इसके कारण एआई से यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधार कार्ड की फोटो कॉपी हो जाती है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा पिछले दिनों बेस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करने के लिए एक टेंडर निकाला गया था।

कुछ शोधकर्ता बताते हैं कि हाई रेजिलेशन तस्वीरों और अन्य कई तरीकों से फेशियल रिकॉग्नाइजेशन यानी कि चेहरा पहचानने की तकनीक को दिखाकर आपको मूर्ख बनाया जा रहा है।

पिछले दिनों लंदन की पुलिस के द्वारा फैसियल रिकॉग्निशन टेक्निक 80% से भी ज्यादा बार नाकाम साबित हो चुकी है। विश्व के कई देशों की पुलिस करने वालों को पकड़ने के लिए इस टेक्निक का इस्तेमाल कर रही है।

इस तकनीक के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा डाटा चोरी कर उसका गलत इस्तेमाल करने की बात सामने आई है।

एप्प बनाने वाली कंपनियां आपकी फोटोज, वीडियोस, डाटा चुरा कर लाखों-करोड़ों रुपयों में बेच रही है। दिलीप सोनी बताते हैं कि हमारे चेहरे से जुड़ा हुआ प्रत्येक डाटा सरकार तक सीमित रहे, तब तक तो ठीक है, किंतु फेशएप जैसी प्राइवेट कंपनी अगर इसको एकत्रित कर लेती है, तो यह बेहद खतरनाक है।