सुरक्षित गर्भ समापन्न प्रत्येक महिला का मौलिक अधिकार है: नवीन जैन

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जयपुर । 
 
अन्र्तराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भ समापन्न दिवस पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को होटल ओम टॉवर में प्रतिज्ञा अभियान, एफआरएचएस, एसआरकेपीएस व स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। 
 
कार्यशाला को संबोधित करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक नवीन जैन ने कहा कि सुरक्षित गर्भ समापन्न करवाना प्रत्येक महिला का मौलिक अधिकार है। उन्होनें कहा कि सुरक्षित गर्भ समापन्न की सेवाऐं प्रत्येक महिला को उसकी मांग पर मिलनी चाहिए। 
 
जैन ने कहां कि राजस्थान में करीब 2.25 लाख गर्भवती महिलाऐं अनचाहे गर्भ का गर्भ समापन्न करवाती है विभाग के पास आने वाले आंकड़ो के अनुसार मात्र 35 फिसदी ही महिलाओं को सुरक्षित गर्भ समापन्न की सेवाऐं मिल पाती है। 
 
मिशन निदेशक ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन की तरह एमटीपी एक्ट का भी प्रभावी क्रियान्वयन करवाना जरूरी है। उन्होनें कहां कि जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक की तरह प्रत्येक जिले में एमटीपी सैल व उसके कॉर्डिनेटर की महत्ती आवश्यकता है। 
 
राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए एसएमएस मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. सुमन मित्तल ने पीसीपीएनडीटी एक्ट व एमटीपीएक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा दोनों एक्ट से भर्मित होने वाले बिदुंओं पर भी प्रकाश डाला। 
 
फोक्सी प्रतिनिधि डॉ. रितु जोशी ने सुरक्षित गर्भ समापन्न की सेवाऐं महिलाओं को मिलने से मातृ मृत्यु में कमी लाने के लिए विस्तार से प्रकाश डाला। राज्य में सुरक्षित गर्भसमापन्न में मिलने वाली सेवाओं में आ रही समस्याओं व उनके समाधान पर आईडीएफ प्रतिनिधि करूणासिंह ने जानकारी दी। 
 
सुरक्षित गर्भ समापन्न की बेहतर सेवाऐं प्रदान करने में मिडिया व स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका पर डॉ. नरेन्द्र गुप्ता,मिडिया प्रतिनिधि शिप्रा माथुर, राजन चौधरी पूर्व अध्यक्ष राज्य महिला आयोग प्रो.लाड कुमारी जैन, बृज मोहन शर्मा, सत्यदेव बारहठ व सुमित्रा चौपड़ा ने प्रकाश डाला। 
 
एफआरएचएस प्रतिनिधि पे्ररणा पुरी ने अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भ समापन्न पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में करीब 1.5 करोड़ गर्भवती महिलाओं का गर्भ समापन्न होता है जिनमें से 1.2 करोड़ महिलाऐं उपयुक्त चिकित्सय सुविधाओं के अभाव में गर्भ समापन करवाती है।
 
 जिसके कारण करीब 3500 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है । राज्य के सभी 33 जिलों से 80 स्वैच्छिक संगठनों व मिडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 
 
कार्यशाला के प्रारम्भ में एसआरकेपीएस प्रतिनिधि विजय पाण्डे ने सम्भागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाशडाला। एफआरएचएस प्रतिनिधि अरूण नायर ने कार्यशाला में उपस्थित सभी का आभार प्रकट किया।