—मंत्री खाचरिवास भी नहीं करवा पाए मेयर विष्णु लाटा और आयुक्त विजयपाल सिंह में सुलह

जयपुर। शहरी सरकार में महापौर विष्णु लाटा और आयुक्त विजयपाल सिंह के बीच चल रहे ‘युद्ध’ में अब आर-पार लड़ाई की तैयारी चल रही है।

कहा जा रहा है कि मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी दोनों के बीच चल रहे ‘युद्ध’ में समझौता कराने में नाकाम साबित हुए।

अब यह मामला सीधे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंचाए जाने की तैयारी है, ताकि भाजपा इसका फायदा नहीं उठा पाए।

निगम में कहा जा रहा है कि अधिनस्थों को उच्च पदों पर बिठाए जाने के कारण महापौर और आयुक्त में ठनी हुई है।

महापौर आरोप लगा रहे हैं कि आयुक्त लगातार उनकी अनदेखी कर रहे हैं।

दोनों के बीच बढ़ता हुआ यह विवाद परिवहन मंत्री प्रतात सिंह खाचरियावास के पास पहुंचा और खाचरियावास ने दोनों के मध्य सुलह कराने का प्रयास किया।

लेकिन खाचरियावास के प्रयासों की क्रियान्विति नहीं हो पाई। ऐसे में इस कवायद को सुलह नहीं माना जा रहा है।

निगम सूत्र बताते हैं कि मंत्री ने दोनों के मध्य सुलह कराई और तय हुआ था निगम में जिस कर निर्धारक को राजस्व अधिकारी मुख्यालय, आयोजना शाखा और उपायुक्त स्टोर का कार्य दिया गया है, उससे यह कार्य वापस ले लिया जाएगा।

सोमवार दोपहर को निगम में यह आदेश टाइप भी हो गए। सूत्रों का कहना है कि साजिश के तहत इन टाइप आदेशों को बिना आयुक्त के हस्ताक्षर के सोश्यल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

इस हरकत के बाद महापौर और वह पार्षद और चेयरमैन ज्यादा नाराज हो गए, जो कि इसकी शिकायत लेकर स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के पास पहुंच गए थे।

कहा जा रहा है कि अब महापौर और नाराज पार्षदों व चेयरमैनों ने इस मामले को मुख्यमंत्री के पास ले जाने का मन बना लिया है।

यदि आज ऊंचे पदों पर लगाए गए कनिष्ठ कार्मिकों को हटाने के आदेश जारी नहीं हुए तो नाराज जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री के पास मामले को लेकर पहुंच जाएंगे।
निगम में फिर हो जाएगी तोड़फोड़

निगम के जानकारों का कहना है कि इतने विवाद के बाद यदि सरकार अधिकारी को नहीं हटाती है तो निगम में फिर से तोड़फोड़ हो सकती है।

भाजपा प्रदेश संगठन इस विवाद पर गहरी नजर रखे हुए है, ताकि जैसे ही कोई गुंजाइश हो तो वह इसका लाभ ले सके।

जानकार कह रहे हैं कि यदि सरकार इस विवाद में अधिकारी को नहीं हटाती है तो महापौर समेत भाजपा से कांग्रेस में आए पार्षद एक बार फिर भाजपा के खेमे में कूद सकते हैं।

क्योंकि उन्हें लग रहा है कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृतव में भाजपा फिर से अच्छे परिणाम ला रही है।

भाजपा में वापसी होने पर इन्हें अच्छे पद मिल सकते हैं और इतनी तोड़फोड़ मचाने के बाद घर वापसी पर इनका राजनीतिक कद भी बढ़ जाएगा।