डॉ. पूनियां के नेतृत्व में पंचायत समिति चुनाव में भी भगवा लहराया

Satish Poonia BJP
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जयपुर।

राजस्थान के 21 जिलों में चार चरणों में हुए पंचायत समिति चुनाव के मतदान का परिणाम मंगलवार को आ गया है। परिणाम में एक बार फिर से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया के नेतृत्व में प्रदेश भर में भगवा लहराया है। इससे पहले सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस की सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के आरोपों को झेलते हुए छह नगर निगम के चुनाव में भी दो निगम के चुनाव में बुरी तरह से हार हुई थी। 6 में से चार नगर निगम में भले ही कांग्रेस पार्टी के द्वारा अपने महापौर बना लिए गए हों, लेकिन इनमें से भी दो नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस में कड़ी टक्कर हुई थी।

भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा अक्टूबर 2019 में डॉ सतीश पूनिया को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके बाद दिसंबर 2019 में उनकी विधिवत निर्वाचन हुआ, तब से लेकर अब तक उनके नेतृत्व में राजस्थान भाजपा इकाई संघ पृष्ठभूमि के लोगों को साथ लेकर तमाम राजनीतिक ऊंचाइयों को छूने का काम कर रही है।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि संघ पृष्ठभूमि के लोगों को साथ रखने की वजह से भाजपा शहर, कस्बों और गांवों में ढाणियों तक पहुंच बनाने में कामयाब रही है और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया इस चीज को अच्छे से जानते हैं कि आरएसएस की बिना भाजपा का ज्यादा वजूद नहीं है, ऐसे में लगातार संघ से जुड़े हुए लोगों को संगठन में सक्रिय करने के साथ ही निगम के चुनाव और पंचायत समिति के चुनाव में भी आगे रखने का काम कर रहे हैं।

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मंगलवार को पंचायत समिति चुनाव परिणाम से स्पष्ट है कि राजस्थान में कांग्रेस की सत्तारूढ़ पार्टी से ठेठ गांव तक काफी निराशा हैं, जिस तरह से 10 दिन में किसान कर्ज माफी का वादा कांग्रेस पार्टी के द्वारा दिसंबर 2018 की चुनाव से पहले किया गया था, वह पूरा नहीं होने की वजह से जनता का कांग्रेस से मोहभंग हो गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अध्यक्ष डॉ. पूनिया के नेतृत्व में भाजपा के लिए लोग ग्रामीण क्षेत्र तक भगवा लहराने के लिए वोट कर रहे हैं।

वैसे भी माना जाता है कि राजस्थान में भाजपा नेतृत्व ने करीब 8-9 साल के लंबे समय बाद ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया गया है, जो संघ पृष्ठभूमि से हैं और वसुंधरा खेमे के बाहर से हैं। बहरहाल, भारतीय जनता पार्टी पंचायत समिति चुनाव परिणाम को लेकर खासी उत्साहित है और माना जा रहा है कि अगर जनवरी-फरवरी में कोरोना की वैक्सीन आने के बाद प्रदेश में हालात अनुकूल हुए तो राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ भाजपा सड़कों पर उतर कर बड़े आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार कर रही है।

पंचायत समिति के चुनाव परिणाम का असर 3 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर भी पड़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन इसके साथ ही अशोक गहलोत के नेतृत्व को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो रहे हैं।

आपको बता दें कि पंचायत समिति की कुल 4371 में से 4051 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके है। इनमें से 1836 में भाजपा(BJP), 1718 में कांग्रेस और 422 में निर्दलीय ने जीत दर्ज की है। आरएलपी(RLP) ने 56, सीपीआईएम(CPIM) ने 16 व बसपा (BSP) ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके अलावा जिला परिषद की 636 सीटों में से 598 के नतीजे घोषित हो चुके है। जिनमे भाजपा ने 323, कांग्रेस ने 246, निर्दलीय ने 17, आरएलपी ने 10 व सीपीआईएम ने 2 पर जीत हासिल की है।