Jaipur

राजस्थान से एकमात्र रिक्त राज्य सभा सीट के लिए आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन लाल सैनी का 24 जून 2019 निधन होने के बाद यह सीट खाली हुई थी।

इस बीच मनमोहन सिंह के नामांकन को मीडिया कवरेज के लिए दिए जाने वाले विधानसभा पास अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, जिसके चलते रीजनल और नेशनल मीडिया कर्मी परेशान हैं।

दूसरी तरफ विधान सभा सचिवालय, चुनाव आयोग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल रहे हैं।

सामने आया है कि विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा बीते दिनों विधानसभा सत्र में स्वतंत्र पत्रकारों, साप्ताहिक अखबार, पाक्षिक अखबारों के साथ ही मासिक पत्रिकाओं के संवाददाताओं के कवरेज पास बड़ी मात्रा में कम किए गए थे।

जिसके बाद विवाद भी हुआ था और उस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने पर्ची सिस्टम चालू करके एक नई परंपरा शुरू की थी, जो एक तरह से चौराहे पर खड़े होकर दैनिक मजदूरी मांगने वाले मजदूरों के टाइप प्रकरण बन गया था।

जिन पत्रकारों के विधानसभा पास नहीं बने थे, वह पत्रकार रोजाना विधानसभा के बाहर आकर विधानसभा अध्यक्ष के पीआरओ कार्यालय में फोन कर पर्ची बनवाते थे और पर्ची विधानसभा परिसर के बाहर कर्मचारी के द्वारा देने पर ही पत्रकार दैनिक रूप से विधानसभा की कार्रवाई कवरेज कर पाते थे।

आज जबकि, राज्यसभा उपचुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए राजस्थान विधानसभा आ रहे हैं और ऐसे वक्त में पत्रकारों के कवरेज पास नहीं बनाया गया है तो इससे न केवल जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आती है, बल्कि साथ ही साथ राजस्थान में चुनाव आयोग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

इधर, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक ने भी साफ कर दिया है कि यह मामला असेंबली का है और वहीं से कवरेज पास दिए जा सकते हैं।

दूसरी तरफ विधानसभा जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय का कहना है कि पूरा मामला चुनाव आयोग के अंतर्गत है, इसलिए वहां से निर्देश मिलने पर ही कवरेज पास दिए जाने की व्यवस्था की जा सकती है, ऐसे कोई निर्देश अभी तक पीआरओ कार्यालय को नहीं मिले हैं।

सारी व्यवस्था को तीनों जिम्मेदार एक दूसरे पर जिम्मेदारियां डालने पर लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के महत्वपूर्ण नामांकन कार्यक्रम की कवरेज करने के लिए पत्रकार अपने पास बनवाने के लिए भटक रहे हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास 100 विधायक हैं, जबकि छह विधायक बहुजन समाजवादी पार्टी के हैं, जिनका कांग्रेस को समर्थन है।

दो विधायक भारतीय ट्राईबल पार्टी के हैं, दो सीपीएम के, एक विधायक आरएलडी और 12 निर्दलीय विधायक हैं, जिनका समर्थन होने का दावा कांग्रेस कर रही है।

भारतीय जनता पार्टी के पास खुद के 72 विधायक हैं, जबकि हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के 2 विधायकों का समर्थन भी बीजेपी को प्राप्त है। एक निर्दलीय विधायक का अभी तक पता नहीं है कि उसका समर्थन किसे मिलेगा।

इसके अलावा विधानसभा की 2 सीटें रिक्त चल रही है, जिनपर उपचुनाव होने हैं। कांग्रेस पार्टी की तरफ से खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरी जिम्मेदारी संभाल रखी है, जबकि नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त है।

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से आज ही विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में तय किया जाएगा कि पार्टी की तरफ से उम्मीदवार उतारा जाए या नहीं।

गौरतलब है कि वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा की 10 सीटों में से सभी 10 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था, किन्तु पार्टी के राज्यसभा सांसद और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन के बाद एक सीट खाली होने से अब इस पर उप चुनाव हो रहे हैं।

लोकसभा की तमाम 25 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। अब तक कांग्रेस पार्टी संसद में “राजस्थान से सांसद मुक्त पार्टी” है।

देखना दिलचस्प होगा की एक सीट पर कांग्रेस कब्जा कर पाती है, या भाजपा “कांग्रेस मुक्त राजस्थान संसद” रखने में कामयाब हो पाती है।

मजेदार बात यह है कि यदि मनमोहन सिंह जीत कर जाते हैं तो ऐसी पहली बार होगा कि कोई पूर्व प्रधानमंत्री राजस्थान से राज्यसभा सांसद बनने में कामयाब होगा।

जिस तरह से तीन तलाक और धारा 370 हटने के बाद देश का मिजाज बदला है, उससे भारतीय जनता पार्टी को दूसरे दलों के विधायकों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

इसी पर मंथन करने के लिए भाजपा ने आज प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के तरफ से वरिष्ठ विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के अलावा उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश के वरिष्ठ प्रवक्ता हमें विधायक सतीश पूनिया के अलावा सभी विधायक शामिल होंगे।

बैठक में विधायकों से राय ली जाएगी और उसी फीडबैक के आधार पर उम्मीदवार उतारने या नहीं उतारने का फैसला किया जाएगा। उपचुनाव के लिए मतदान 26 अगस्त को होने जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी की उम्मीद है निर्दलीय विधायकों के अलावा बहुजन समाजवादी पार्टी के छह, भारतीय ट्राईबल के दो, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दो और एक अन्य निर्दलीय विधायक पर निगाहें टिकी हुई है, जो धारा 370 के बाद भाजपा के साथ आ सकते हैं।

यदि भारतीय जनता पार्टी ने एक सीट के लिए बहुमत हासिल किया और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी, तो ऐसे में फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए परेशानियों का समय शुरू हो सकता है।

फिलहाल उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उनके गुट की तरफ से भी किसी व्यक्ति का अभी तक कोई बयान नहीं आया है, जिससे भाजपा की उम्मीदें बढ़ रही है।