Kisan dharana sikar rajasthan
Kisan dharana sikar rajasthan

Sandeep [email protected], Ramgopal [email protected]

कृषक प्याज़ को पैदा कर बेचने में 8 से 10 रुपए किलोग्राम खर्च करता है, और बाजार में वही प्याज़ (onion) ग्राहक को 15 रुपए किलोग्राम से अधिक कीमत पर मिलता है।

यह एक ऐसा मकड़जाल है, जिसमें कृषक (Farmer) लगातार फंसता जा रहा है। मजबूरन किसान को धरने प्रदर्शन पर आंदोलन करने पड़ते हैं। यह कहना है सीकर जिले के धौद से पूर्व विधायक (Ex MLA) और अखिल भारतीय किसान सभा (Akhil bharatiy kisan sabha) के राजस्थान अध्यक्ष कॉमरेड पेमाराम का।

प्याज की सरकारी खरीद के लिए लगातार 9 दिन से सीकर के अलावा प्याज़ की मार झेल रहे झुंझुनू, चूरू, जयपुर, नागौर के दर्जनों किसान सीकर कलेक्ट्रेट पर धरना देकर बैठे हुए हैं सरकार की तरफ से कोई बातचीत नहीं हुई है।

धरनारत किसानों ने अपनी 11 सूत्री मांगों को सीकर जिले के सभी 8 विधायकों में से 7 को एक-एक पत्र सौंप दिया है। साथ ही नहीं मिलने के कारण सीकर के विधायक राजेंद्र पारीक और सीकर जिले के सांसद सुमेधानंद सरस्वती के घर पर मांग पत्र चस्पा कर दिया है।

कॉमरेड पेमाराम राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि जब तक किसानों के उत्पादन को सरकारें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदेगी, तब तक किसान की हालत में सुधार नहीं हो सकता।

पेमाराम के मुताबिक राजस्थान की कांग्रेस वाली अशोक गहलोत सरकार और केंद्र की बीजेपी वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार कृषकों के प्रति पूरी तरह से असंवेदनशील हैं।

पूर्व विधायक कॉमरेड पेमाराम का कहना है कि दोनों सरकारों को किसानों की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है, दोनों सरकारों ने किसानों को धोखा दिया है, अन्नदाता के साथ अन्याय कर रही है।

पेमाराम का कहना है कि सरकार किसानों के प्याज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी और जिस तरह से राशन की दुकानों पर गेहूं और चीनी का वितरण किया जाता है, उस तरह से करें, ताकि अन्नदाता को अपनी लागत मिले और ग्राहक लुटने से बच सकें।

कामरेड पेमाराम के मुताबिक महाराष्ट्र के बाद देश में सबसे ज्यादा प्याज सीकर के अलावा झुंझुनू, नागौर, चूरू, और जयपुर के कुछ हिस्सों को मिलाकर पैदा किया जाता है। बावजूद इसके राज्य सरकार एमएसपी (MSP) पर इसकी खरीद नहीं करती है, जिससे किसान बर्बाद हो रहे हैं।

देखिए क्या कहते हैं अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष पेमाराम-

अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश सचिव सागर खचारिया का कहना है कि किसानों की वैसे तो अनेकानेक समस्याएं हैं, जिनको लेकर समय-समय पर सरकार को अवगत कराया जाता रहा है।

लेकिन सीकर कलेक्ट्रेट पर हमारे धरने में शामिल मुख्य रूप से 11 मांगे हैं, जिनको सरकार मानेगी तब ही धरना समाप्त होगा, अन्यथा यह धरना अनवरत चलता रहेगा। इन मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं कृषक-

-प्याज की बाजार हस्तक्षेप योजना में ₹10 किलोग्राम की दर से सरकारी खरीद शुरू हो, जिससे किसान की लागत निकल सके।

-जिन कृषकों का प्याज बिक चुका है, उन किसानों की गिरदावरी करवाकर उन्हें सरकार मुआवजा दें, जिससे वह कर्ज़े में नहीं डूबे।

-रबी की फसल की जिंसों, जैसे- चना, सरसों, जौ की समर्थन मूल्य पर खरीद करने की व्यवस्था करें, ताकि कृषक को बाजार में औने पौने दामों में नहीं बेचना बड़े।

-रसीदपुरा प्याज मंडी में को तुरंत प्रभाव से चालू करवाएं, जिससे किसान को प्याज़ बेचने के लिए बाहर जाकर किसान नहीं लुटे।

-सहकारी समितियों में व्याप्त ऋण वितरण भ्रष्टाचार और कर्जामाफी में हुई धांधलियों की जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई करो

-सभी पात्र अन्नदाताओं को सहकारी समितियों से अल्पकालीन फसली ऋण दिया जाए, कृषकों का संपूर्ण कर्जा माफ करो।

-व्यावसायिक बैंकों, ग्रामीण बैंक में केसीसी ऋण, पशुधन ऋण और ग्रामीण बैंकों सहित सभी ऋण माफ करें।

-सितंबर 2017 और फरवरी 2018 को किसानों के द्वारा अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलनों के बाद किसानों पर दर्ज हुए झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए।

-प्रदेश के सभी करीब 11 लाख बेरोजगार युवाओं को ₹3500 बेरोजगारी भत्ता देना चाहिए और उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करें।

-सभी किसानों को न्यूनतम ₹5000 मासिक वृद्धावस्था पेंशन मिले और उसको की समस्या का समाधान किया जाये।

-बछड़ों की बिक्री पर लगी सरकारी रोक को हटाया जाए।

-दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद किया जाए।

-खाद्य सुरक्षा और नरेगा योजना को मजबूत करके सभी के लिए लागू किया जाए।

दो दिन पहले इस तरह से किसानों ने सीकर में मुख्यमंत्री की शवयात्रा निकली-

हर सहकारी समिति में हुआ है कम से कम 10 लाख का घपला

धरने पर बैठे पेमाराम का कहना है कि वह कृषकों के साथ बीते 9 दिन से यहां बैठे हैं, लेकिन कोई सरकारी नुमाइंदा यहां आकर बात करने को तैयार नहीं है।

उनके मुताबिक पिछली सरकार और वर्तमान सरकार द्वारा की गई कर्जमाफी महज दिखावा है। किसानों से सहकारी समितियों ने ऋण का पैसा भी ले लिया और कर्जमाफी भी दिखा दी।

मौके पर मौजूद दो किसानों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि 1.23 लाख रुपए का कर्ज़े वाला पैसा वो बैंक को दे चुके हैं, फिर भी उनके खाते में ऋणमाफी दिखाई जा रही है। किसान कहते हैं कि उनसे बैंक वाले पैसे भी ले लेते हैं, बैंक पासबुक देते नहीं और कर्जमाफी दिखाकर घपले कर रहे हैं।

किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाले पेमाराम बताते हैं कि असल में तो सरकारों का अन्नदाता पर ध्यान है ही नहीं। इसी जगह यदि कोई कॉरपोरेट कंपनी होती तो कभी का करोड़ों रुपए कर्ज़माफ हो गया होता और किसी को पता भी नहीं चलता।

कलेक्ट्रेट पर 9 रोज़ से अपनी मांगों को लेकर बैठे किसान कहते हैं कि उनके घर आजतक कोई ऋण प्रतिनिधि नहीं आया, जबकि धरने में मौजूद दो किसानों को कर्जमाफी का फायदा भी बताया जा रहा है। कृषक बताते हैं कि कमोबेश यह स्थिति सभी सहकारी समिति में है।

Video: 8 रुपए लागत का प्याज़ 1.50 रुपए में बेचता है कृषक और ग्राहक को 15 रुपए में मिलता है... 1

यह है किसानों की रहने की व्यवस्था

27 फरवरी से सीकर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने एक छोटा सा तंबू लगा रखा है, जिसके नीचे दिन और रात में बैठे रहते हैं। किसान यहां पर अपने प्यार भरे ट्रैक्टर लेकर आए हैं, जो खड़े हुए हैं। यहीं पर उनके लिए खाना बनता है और रात में भी कृषक यहीं पर सोते हैं। दिन में उनका समर्थन करने के लिए महिला किसान भी आती हैं।

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