राजस्थान महाविद्यालय के चित्रकला विभाग में एक दिवसीय चित्रकला का आयोजन

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स्थानीय विभागाध्यक्ष डॉ जगदीश प्रसाद मीणा ने एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करवायी, जिसमें व्याख्यान और डेमोस्ट्रेशन देने के लिए दो वरिष्ठ चित्रकार विजय कुमार सोमंची (गुंटूर,आंध्र प्रदेश) और डॉ विजय एम ढोरे (हैदराबाद) को आमंत्रित किया गया….

जिन्होंने महाविद्यालय में उपस्थित होकर “समकालीन कला में प्रयोगधर्मिता के नये आयाम” विषय पर दोनों कलाकारों ने अपने-2 विचार साझा किए और अपनी-2 कला का प्रदर्शन किया।

दोनों कलाकारों का कॉलेज के प्राचार्य प्रोफ़ेसर कृष्ण गोपाल शर्मा द्वारा प्रतीक चिन्ह और पुष्प माला द्वारा स्वागत किया गया। साथ ही चित्रकला विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. तनूजा सिंह, कॉलेज के वॉइस प्रिंसिपल डॉ आई. यू. खान और डॉ लोकेश जैन के द्वारा भी स्वागत किया गया।

प्राचार्य ने उद्घाटन सत्र में कहा कि ऐसा कला का भव्य आयोजन और इतने बड़े कलाकार का महाविद्यालय में आकर व्याख्यान और डेमो देना महाविद्यालय के लिए गर्व की बात है। साथ ही चित्रकला विभाग के शिक्षक डॉ अमिता राज गोयल और डॉ कृष्णा महावर भी उपस्थित थे।

डॉ विजय एम ढोरे कला क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से कार्यरत है और केंद्रीय हिंदी संस्थान हैदराबाद में कार्यरत है ! पिछले 30 वर्षों में देश विदेश में 50 से ज्यादा समूहों चित्र प्रदर्शनी और 15 एकल चित्र प्रदर्शनी लगा चुके हैं !

और समय-समय पर जो ढोरे जी को देश की सभी अकादमिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है… हर समय प्रयोगधर्मिता से जुड़ा रहना और कार्य करना ही इनकी प्रमुख विशेषता है!

इन्होंने अपने पेंटिंग के बैकग्राउंड में एक्रेलिक रंग में टेक्चर्स का प्रयोग करते हुए राजस्थान के ऐतिहासिक महलों के खंडरो को अपनी पेंटिंग में सर्जनात्मक रुप से संयोजित किया… पेंटिंग में सर्जनात्मक दृश्य रुप बहुत ही सुंदर बन पड़ा है !

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इसी प्रकार दूसरे कलाकार विजय कुमार सोमंची जो मूल रूप से गुंटूर के रहने वाले हैं लेकिन वर्तमान में हैदराबाद और अधिकतर यूएसए में रहते हैं..!

यह कला के क्षेत्र में लगभग 40 वर्षों से कार्यरत रहे हैं और भारतीय कलाजगत में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं… इन्होने अपने चित्रों की लगभग 70 से अधिक समूह प्रदर्शनी और 15 से अधिक एकल चित्र प्रदर्शनी लगा चुके हैं !

पिछले चार वर्षों से अन्नपूर्णा मल्टीमीडिया एवं फिल्म संस्थान में विजिटर प्रोफ़ेसर के तौर पर अध्यापन कार्य कर रहे है… और समय-समय पर कला जगत की गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं !

कॉलेज में अपनी पेंटिंग में हिमालय की पर्वत श्रेणी को ओयल कलर में दृश्य चित्र के रूप में बहुत ही सुंदर बनाकर अपकी कला का प्रदर्शन किया!

राजस्थान महाविद्यालय के चित्र कला विषय के विद्यार्थी दोनों कलाकारों के समकालीन कला पर व्याख्यान और अपनी अपनी कला तकनीक में बनाई पेंटिंग से लाभांवित हुए।