विवादों, भारी सुरक्षा और सी स्कीम समेत टोंक रोड को जाम करने का सबसे बड़ा कारण बना जेएलएफ शुरू

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) वैसे तो जयपुर में होने वाला सबसे बड़ा साहित्यिक मेला माना जाता है, लेकिन इस फेस्टिवल के पहले संस्करण से लेकर आज शुरू हुए 11वें संस्करण तक केवल और केवल विवादों का नाता रहा है।

वैसे तो विवादों के कारण कई हैं। यहां आने वाले विजिटर्स और फेस्टिवल में पार्टिसिपेट करने वाले कई वक्ता अपने उल्टे सीधे बयानों के कारण सुर्खियों को बटोरने का काम करते हैं। लेकिन इसके इतर भी बहुत सारे ऐसे कारण हैं, जिनके कारण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल बदनाम हो चुका है।

यूं तो बड़ी-बड़ी हस्तियां इस फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए लालायित रहते हैं, लेकिन इस आयोजन के आयोजक कर्ताओं का ध्यान हमेशा से ऐसे लोगों पर रहता है, जो लोग विवादित बयान दें और इस फेस्टिवल को किसी भी तरह से मीडिया में सुर्खियों में रखें।

इस लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ वैसे तो हमेशा से ही राजस्थान का सीटिंग मुख्यमंत्री करता है, लेकिन इसके साथ ही जिला प्रशासन और जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाथ खड़े किए जाना आम बात है।

जयपुर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक सी स्कीम स्थित डिग्गी पैलेस में आयोजित होने वाले इस फेस्टिवल को लेकर पूरे 3 दिन तक टोंक रोड जाम रहता है।

इस फेस्टिवल में विजिटर्स की संख्या जहां प्रतिदिन लाखों होती है, वहीं वाहनों के लिए पार्किंग की प्रॉपर व्यवस्था नहीं होने के कारण भी शहर जाम में फंस जाता है। खासतौर से डिग्गी पैलेस के नजदीक ही राजस्थान का सबसे बड़ा हॉस्पिटल एसएमएस अस्पताल है, जहां पर ट्रॉमा सेंटर में गंभीर अवस्था में मरीज आते हैं तो एंबुलेंस भी अटक जाती है।

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लोगों की परेशानी और वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण जयपुर लगभग ट्रैफिक जाम में फंस जाता है तो इसके साथ ही साथ स्कूल जाने वाले वाहनों और मरीजों को ले जाने वाले एंबुलेंस भी जाम में फंसने के कारण मरीजों की जान गले में अटक जाती है।

इस लिटरेचर फेस्टिवल में वक्ताओं के तौर पर बुलाई जाने वाले बॉलीवुड के लोग और राजनीति से जुड़े हुए कई नेता भी विवादित बयान देते हैं जिसके कारण उनकी खबरें मीडिया में प्रकाशित होती है प्रसारित होती है, किंतु युवा अवस्था में फेस्टिवल का हिस्सा बनने के लिए यहां आने वाले छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका जबरदस्त विपरीत असर पड़ता है।

लिटरेचर फेस्टिवल के 11वें संस्करण का उद्घाटन राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया है। उन्होंने कहा है कि संविधान में असहमति का अधिकार सबको है। उनका इशारा स्पष्ट तौर पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध की तरफ था।

विवादों के कारण जबरदस्त सुर्खियां बटोरने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इस बार भी बॉलीवुड के कई दिग्गज अभिनेता और अभिनेत्रियां शिरकत करेंगे। इसके साथ ही कॉमरेड विचारधारा से संबंध रखने वाले बहुत सारे वामपंथी नेता भी अपने विचार व्यक्त करके इस समारोह को विवादित करने का प्रयास करेंगे।