विवादों का अड्डा बने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में शुरू हुई धमाचौकड़ी, CAA बड़ा मुद्दा

ashok gehlot sachin pilot
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-लोकतंत्र के अंदर आवाज नहीं दबाना चाहिए: गहलोत

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF), यानी जेएलएफ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल वैसे तो विवादों का सबसे बड़ा अड्डा है, जहां पर बीते 11 बरस से हर साल कोई न कोई विवाद सामने आ ही जाता है।

किंतु इस बार सबसे बड़ा विवाद होगा ‘नागरिकता संशोधन कानून’, ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’, ‘समान नागरिक संहिता’, ‘तीन तलाक’, ‘धारा 370’ और इसके साथ ही कथित तौर पर देश में मौजूद ‘धार्मिक असहिष्णुता।’

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का गुरूवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुभारंभ किया। फेस्टिवल में आने वाले लाखों विजिटर्स की सुरक्षा के लिहाज से फेस्टिवल के एंट्रेंस गेट पर फेस डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए है।

फेस्टिवल के डेकोरेशन की थीम राजस्थानी रंग, परंपराएं और पर्व-त्यौहार पर आधारित है। बता दें कि पहली सेफ्टी लेयर में 300 से 500 पुलिसकर्मी और ऑफिसर्स तैनात किए गए हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मीडिया से रूबरू हुए उन्होंने कहा कि साहित्य महाकुंभ राजस्थान की पहचान बन चुका है।

उन्होंने कहा कि आज देश में जो हालात है वो आजादी के वक्त के बाद पहली बार ऐसे हालात बने हैं। इस महाकुंभ के माध्यम से साहित्कार अपनी बात बेबाकी से कहेंगे और उनको एक प्लेटफार्म मिलेगा और मन की बात कहेंगे।

इस साहित्य के महाकुंभ के माध्यम से हो सकता है भारत सरकार में बैठे लोगों की भी भावना पहुंचे, वहां तक की देश क्या चाहता है और हो सकता है कि कोई नहीं शुरूआत हो।

उन्होंने कहा कि उम्मीद करता हूं कि पूरे दुनिया के साहित्कार आएंगे और देश के हालातों पर चर्चा करेंगे, हो सकता है उनके माध्यम से कोई संदेश जाए और देश के काम आए।

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सीएम गहलोत ने कहा कि राजस्थान के अंदर में भी राजस्थान के साहित्कारों के लिए अलग से फेस्टिवल का आयोजन करने का निश्चय किया है।

गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र के अंदर आवाज नहीं दबाना चाहिए, असहमति को लोकतंत्र में स्वस्थ परम्परा माननी चाहिए, असहमति को अगर राजद्रोह के नाम से पहचान दोगे तो वह लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।