JNU में शैक्षणिक प्रक्रिया बहाल कराने के निर्देश, तब से बंद थी शिक्षा

जेएनयू में शैक्षणिक प्रक्रिया बहाल कराने के निर्देश

New Delhi

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (jnu) में रविवार रात हुई हिंसा पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी एक रिपोर्ट तैयार की है। जेएनयू प्रशासन ने यह रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंप दी है। वारदात वाली रात, उसके बाद हुए पूरे घटनाक्रम की यह रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव अमित खरे को सौंपी गई है।
मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने इस दौरान जेएनयू प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय में पुलिस जांच निर्बाध रूप से करवाई जाए।

जेएनयू में हुई हिंसा के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक में जेएनयू के प्रो वीसी चिंतामणि महापात्रा, रजिस्ट्रार डॉ. प्रमोद कुमार, रेक्टर राणा प्रताप सिंह व प्रॉक्टर धनंजय सिंह शामिल हुए।

बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव ने जेएनयू प्रशासन से पूछा कि आखिर कैसे विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा की इस वारदात को अंजाम दिया गया। इसपर बैठक में मौजूद अधिकारियों ने खरे को दो पेज की एक आधिकारिक रिपोर्ट सौंपी। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस औपचारिक रिपोर्ट में हिंसा, हिंसा के दौरान प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम व उसके बाद उत्पन्न हुई स्थितियों की आधिकारिक जानकारी शामिल थी।

मंत्रालय के सचिव ने जेएनयू प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालय में तुरंत शैक्षणिक गतिविधियां बहाल की जाएं, छात्रों के साथ मिलकर पुलिस जांच में सहायता करें व विश्वविद्यालय में शांति बहाल करवाई जाए।

मंत्रालय के निर्देशों का असर यह हुआ कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगले कुछ ही घंटों में शीतकालीन सत्र के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पुन: आरंभ करने का ऐलान कर दिया। मंगलवार सुबह यह प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई।

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जेएनयू प्रशासन से सोमवार शाम पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। मंत्रालय ने जेएनयू प्रशासन से यह भी पूछा है कि क्या पहले से हिंसा की आशंका थी। यदि ऐसा था तो इसके मद्देनजर प्रशासन ने क्या कदम उठाए। साथ ही हिंसा होने पर प्रशासन ने उसे रोकने के लिए क्या किया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अत्यंत चिंताजनक बताया और विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने की अपील की है। वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में हुई इस हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।