10 शिक्षा मंत्री दे रहे हैं राजस्थान में परीक्षा-

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-राजनीति की पाठशाला में कईयों की परीक्षा होनी है।

जयपुर।

परीक्षा को लेकर इन दिनों स्टूडेंट की भांति प्रदेश के कई 10 शिक्षा मंत्री भी तैयारी कर रहे हैं। इनकी परीक्षा 7 दिसम्बर को होगी, और रिजल्ट 11 दिसंबर को आना है।

क्या रहा है राजनीति की पाठशाला में शिक्षा मंत्रियों का इतिहास? किस तरह करते हैं तैयारी? और कैसा होती परीक्षा? देखिये हमारी यह खास रिपोर्ट-

प्रदेश में इन दिनों सियासत की पाठशाला चल रही है, जिसमें राजनीति के दिग्गज क्लास ले रहे हैं। इनकी क्लास लग रही है और इस क्लास में प्रदेश के शिक्षामंत्रियों की बडी परीक्षा भी होनी है, जिनका निर्णय जनता करने जा रही है।

यूं तो शिक्षामंत्रियों की कार्यशैली का ग्राफ स्टूडेंट के रिजल्ट पर निर्भर करता है, लेकिन सियासत की रणभेदी में इस समय ये शिक्षा मंत्री जनता से राजनीति सीख रहे हैं।

वैसे राजनीतिक गलियारों में शिक्षा मंत्री का अहम रोल रहता है, क्योंकि प्रदेश के हर परिवार से सीधा जुडाव इन मंत्रियों का रहता है।

यहीं कारण है कि चुनावों के दौरान शिक्षा मंत्री की चुनावी सीट का रिजल्ट हर कोई जानना चाहता है, या यूं कहे सभी की निगाहें उस सीट पर होती है। 1993 से लेकर अब तक अगर बात की जाए तो सूबे में शिक्षा मंत्री के सीट के रिजल्ट काफी दिलचस्प रहे हैं।

दिलचस्प इसलिए, क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनावों में बीजेपी सरकार में रहे शिक्षा मंत्री तो चुनावों में जीत का सेहरा बांधते हैं। जबकि कांग्रेस के शिक्षा मंत्री अपनी सीट बचाने की कवायद में दिखते हैं।

सियासती पाठशाला में मौजूदा समय में 2294 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन इस समर में शिक्षा मंत्रियों की सीट पर भी रोचक मुकाबला है।

हालांकि जीत के दावे हर तरफ हो रहे है, लेकिन अक्सर देखने में आया है कि इस मुकाबले में भाजपा राज में रहे शिक्षा मंत्री जीत के मुहाने तक ज्यादा पहुंचे है।

पिछली सरकारों में शिक्षामंत्री के हार जीत के रिपोर्ट कार्ड से उनकी हालत साफ नजर आता है। पिछले चार विधानसभा चुनावों को देखे तो कांग्रेस के शिक्षा मंत्रियों की परफोर्मेंस खराब रही है।

कांग्रेस के 5 में से केवल एक शिक्षामंत्री बीडी कल्ला को 2003 में जीत नसीब हुई। 2013 के चुनाव में कांग्रेस के शिक्षामंत्री मोदी लहर के सामने ढेर होते दिखे, जिनमें बृजकिशोर शर्मा, बी डी कल्ला, नसीम अख्तर, भंवरलाल मेघवाल, दयाराम परमार शामिल हैं।

मौजूदा चुनाव में पूर्व शिक्षा बृजकिशोर शर्मा टिकट बचाने में भी कामयाब नहीं हुए, लेकिन कल्ला, अख्तर, मेघवाल, परमार चुनावी मैदान में हैं। वर्तमान बीजेपी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा विभाग को तीन मंत्रियों ने संभाला है। कालीचरण सराफ,,, वासुदेव देवनानी और किरण माहेश्वरी चुनावी मैदान में हैं।

तो 1993 में शिक्षामंत्री रहे गुलाबचंद कटारिया चुनाव लड रहे हैं। साथ ही घनश्याम तिवाड़ी भाजपा खेमे से शिक्षामंत्री रहे, लेकिन अब भारत वाहिनी से चुनावी ताल ठोक रहे हैं।

यह है शिक्षा मंत्रियों का चुनावी इतिहास-

-1993 – 1998 तक गुलाबचंद कटारिया रहे शिक्षामंत्री।
-1998 के चुनाव में बड़ी सादड़ी जीते, प्रकाशचंद को हराया
-1998 – 2003 तक कांग्रेस सरकार में बीडी कल्ला रहे शिक्षा मंत्री।
-2003 के चुनाव में जीते, नंदलाल व्यास को हराया।
-1998 में सी पी जोशी रहे शिक्षामंत्री।
-2003 में जोशी को मिली जीत।
1998 में अब्दुल अजीज थे शिक्षाराज्य मंत्री, लेकिन 2003 के चुनाव में टिकट ही कट गया।
-2003 – 2007 तक घनश्याम तिवाड़ी शिक्षामंत्री थे।
-2007- 2008 तक कालीचरण सराफ शिक्षामंत्री रहे।
-2004 से 2008 तक वासुदेव देवनानी शिक्षा राज्यमंत्री रहे।
-2008 विधानसभा तीनों को जीत मिली।
-2008 – 2011 तक भंवर लाल मेघवाल शिक्षामंत्री रहे।
-2011 -2013 तक बृजकिशोर शर्मा शिक्षामंत्री बने।
-2011 – 2013 तक नसीम अख्तर शिक्षाराज्य मंत्री बनीं।
-2011 में शिक्षा मंत्री दयाराम परमार रहे।
(2013 के चुनाव में चारों को मिली हार)

-2013 – 2016 तक कालीचरण सराफ शिक्षामंत्री और उच्च शिक्षामंत्री रहे।
-2014 – 2018 तक वासुदेव देवनानी शिक्षाराज्य मंत्री हैं।
-2016- 2018 तक किरण माहेश्वरी उच्च शिक्षामंत्री हैं।
(2018 विधानसभा चुनाव में तीनों को मिली टिकट मिले हैं।)

शिक्षामंत्रियों की परीक्षा में कौन होगा पास !

भाजपा खेमे में चार शिक्षामंत्री अभी मौजूदा उम्मीदवारों में शामिल हैं। वासुदेव देवनानी, किरण माहेश्वरी, कालीचरण सराफ, गुलाबचंद कटारिया। 2003 से 2007 तक भाजपा सरकार में शिक्षा मंत्री रहे घनश्याम तिवाडी भारत वाहिनी से चुनावी मैदान में हैं।

तो वहीं कांग्रेस खेमे से 5 चेहरे शामिल हैं। बीडी कल्ला, सीपी जोशी, भंवरलाल मेघवाल, दयाराम परनाम, नसीम अख्तर परीक्षा में शामिल हैं।

अक्सर परीक्षा के रिजल्ट को बेहतर बनाने के तौर तरीके सीखाने वाले नेता अब सियासत के भंवर में हैं। अब देखना होगा कि इस परीक्षा में कौन शिक्षामंत्री अपनी जीत का पताका फहराएगा।