hanuman beniwal jyoti mirdha nagaur
hanuman beniwal jyoti mirdha nagaur

नागौर।
राजस्थान की जिस सीट को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता है, वह है नागौर की लोकसभा सीट। यहां पर कांग्रेस की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल आमने—सामने हैं।

ज्योति मिर्धा की मानें तो हनुमान बेनीवाल उनके दादा के यहां ड्राइवर का काम करते थे, उनकी सभाओं में दरियां बिछाने का काम करते थे। यह बातें खुद ज्योति मिर्धा ने नागौर के खींवसर में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कही थीं।

नागौर की सीट वैसे तो राजस्थान की राजनीति की प्रयोगशाला कहा जाता है, लेकिन जब से यहां पर हनुमान बेनीवाल का प्रादुर्भाव हुआ है, तभी से मिर्धा परिवार की राजनीति हासिए पर चली गई है।

एक समय ऐसा था जब पूरे राजस्थान की राजनीति ही मारवाड़ की राजनीति के इर्द गिर्द घूमती थी। कांग्रेस का भी इस सीट को बढ़ माना जाता है। यहां पर हुए 16 लोकसभा चुनाव में से 11 अकेली कांग्रेस ने जीती हैं।

जबकि 7 बार ज्योति मिर्धा के दादा नाथूराम मिर्धा यहां से सांसद रहे हैं। साल 1971 से लेकर 1998 तक लगातार उन्होंने यहां से सांसद का चुनाव जीता है। एक बार उन्हीं के परिवार के भानू प्रताप मिर्धा और एक बार ज्योति ​मिर्धा भी सांसद रही हैं। हालांकि, भानूप्रताप मिर्धा ने भाजपा से चुनाव लड़ा था।

अब एक बार फिर से ज्योति मिर्धा अपने दादा के नाम पर चुनाव मैदान में हैं, तो लगातार दूसरी बार हनुमान बेनीवाल सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में करीब 1.5 लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे। और यही कारण था कि ज्योति मिर्धा को हार का मुंह देखना पड़ा।

अब हनुमान बेनीवाल को लेकर ज्योति मिर्धा कह रही हैं कि वह उनके दादा, यानी नाथूराम मिर्धा के यहां पर ड्राइवर बनकर काम करता था, जबकि चुनावी सभाओं में दरियां बिछाया करता था।

ज्योति मिर्धा की यह बात हनुमान बेनीवाल को इतनी नागवार गुजरी है कि उन्होंने ज्योति मिर्धा को हमेशा के लिए यहां से विदा करने का मानस बना ​लिया है। बेनीवाल कह रहे हैं कि जिस व्यक्ति का लोगों के पास फोन नंबर नहीं हो, जिसका पता किसी को मालूम नहीं हो, ऐसे व्यक्ति को इस बार चुनरी ओढ़ाकर हमेशा के लिए विदा करना है।

गौरतलब है कि ज्योति मिर्धा नागौर की हैं, जबकि उनकी शादी हरियाणा में हुई है। उनका खुद का इंडिया बुल्स के नाम से बड़ा कारोबार है। शायद यही कारण है कि वह बीते पांच साल में अधिकांश समय गुड़गांव ही रही हैं।

मतदान 6 मई को है और परिणाम 23 मई को आएगा। उसके बाद ही तय होगा कि ज्योति मिर्धा चुनरी ओढ़कर ससुराल जाती हैं, या जीतकर संसद? बहरहाल, दोनों के बीच मुकाबला कांटे का बताया जा रहा है।