Jaipur

जयपुर के बीचो बीच से गुजरने वाली करीब 47 किलोमीटर लंबी द्रव्यवती नदी जो कि कभी अमानीशाह नाला कहलाती थी, उसका सौंदर्यीकरण करने के लिए साल 2016 में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बीड़ा उठाया था।

नदी पर अब तक करीब 18 सौ करोड़ खर्च हो चुके हैं। बावजूद इसके केवल 16 किलोमीटर क्षेत्र में सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा हुआ है, जबकि 31 किलोमीटर का कार्य बाकि पड़ा है टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड नई कार्य बंद कर रखा है और जयपुर शहर के बाशिंदे नदी में पल रहे मच्छरों से परेशान है।

गौरतलब है कि जब नदी के सुंदरीकरण का कार्य प्रारंभ हुआ था, तभी तत्कालीन जेडीसी शिखर अग्रवाल ने कहा था कि नदी के दोनों तरफ अतिक्रमण कर रखी गई जमीन कोई वापस छुड़ाया जाएगा और उस पर से अधिकांश पर सार्वजनिक उपयोग में लिए जाने वाले संसाधन विकसित किए जाएंगे, जबकि अधिकांश जमीन को जेडीए नीलाम कर चुका है।

नदी के पानी को साफ करने के लिए आठ जगह पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने थे, लेकिन उनमें से केवल तीन का कार्य पूरा हो पाया है। जिनमें से निकलने वाला पानी भी गंदे पानी में डाल दिया जाता है, जिसके कारण साफ पानी करने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

उल्लेखनीय है कि 2015 में राजस्थान हाई कोर्ट के द्वारा आदेश देने के बाद एमएनआईटी के द्वारा सबसे पहले इसका सर्वे करवाया गया था, जिसमें नदी को 130 से लेकर 160 मीटर तक चौड़ा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बाद में जेडीए और टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड ने इसकी चौड़ाई को 210 मीटर तक कर दिया।

खास बात यह है कि नारगढ़ की पहाड़ियों में जिस जगह पर से नदी का उद्गम स्थल है, वहां पर आथुनीया नामक बांध हुआ करता था वह बांध अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। बांध के होने के कारण पहाड़ियों में से झरने बहते थे और जिसके चलते यह नदी 12 महीने तक बहती थी।

नदी की गंदगी मिटाने के लिए, गंदे पानी को बंद करने के लिए और अतिक्रमण हटाकर यहां पर रिवरफ्रंट बनाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। शुरुआत में द्रव्यवती नदी को गुजरात की साबरमती नदी के तर्ज पर विकसित किए जाने का प्रोजेक्ट था, किंतु अब यह राज्य में सरकार बदलने के साथ ही ठंडे बस्ते में चला गया है।

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