अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ का 17 जून को विरोध दिवस, प्रदेश के सभी चिकित्सालयों में आपातकालीन सेवाओं,एम एल सी व पोस्टमार्टम को छोड़ कर सभी गैर आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार।

Jaipur news.

पश्चिम बंगाल के कोलकाता के नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज में हिंसक भीड़ द्वारा चिकित्सक पर बेरहमी से हमले तथा राज्य के अस्पतालों में चिकित्सको के साथ हो रही हिंसक घटनाओ के विरोध में 17 जून को प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल बंद रहेंगे।

सभी रेजिडेंट और प्राइवेट चिकित्सक कार्य बहिष्कार पर रहेंगे। यह जानकरी अरिस्दा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी तथा निजी चिकित्सको की एसोसियशन के डॉ v.k. जैन ने आज जयपुर के प्रेस क्लब में हुई आपात प्रेस वार्ता में दी।

डॉ अजय चौधरी ने बताया की 17 जून को प्रदेश के सभी चिकित्सालयों में आपातकालीन सेवाओं, एम एल सी व पोस्टमार्टम को छोड़ कर सभी गैर आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देशभर में विभिन्न चिकित्सा संघठनो द्वारा शुक्रवार 14 जून 2019 को काला दिवस मनाया गया जिसमे राजस्थान के सेवारत चिकित्सक और रेज़िडेंट्स भी शामिल थे।

अरिसदा पश्चिम बंगाल में डॉक्टर के खिलाफ हिंसा की घोर निंदा करता है और चिकित्सकों को सुरक्षा प्रदान करने व सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की माँग करता है।साथ ही इस सम्बंध में एक प्रभावी क़ानून बनाने की माँग करता है।

राज्य के चिकित्सकों के 2017 के आंदोलन की प्रमुख माँगो में भी यह एक थी, किंतु आज तक प्रभावी कार्यवाही नहीं हुयी है, जिसके कारण राज्य के चिकित्सालयों में आए दिन चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों पर हिंसा कारित की जा रही है।

अस्पतालों में सुरक्षा और संरक्षा का अभाव बहुत चिंता का विषय है और इस पर तुरन्त संज्ञान लेने की आवश्यकता है।

मजबूत कानून लाने का आग्रह

डॉ चौधरी ने बताया की अरिसदा ने डॉक्टर और हेल्थकेयर प्रतिष्ठानों पर हिंसा के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति (Zero Tolerance Policy घोषित की है।

वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन ने भी हेल्थकेयर प्रतिष्ठान पर हिंसा के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है और इस खतरे के खिलाफ मजबूत कानून लाने का आग्रह किया है।

अस्पताल पर हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय कानून को तत्काल लाया जााहिए, अस्पताल की हिंसा के लिए न्यूनतम 12 वर्षो की सजा का प्रावधान होना चाहिए साथ ही यह सुनिश्चित हो कि मामला भी उन्ही प्रवधानो के अंतर्गत दर्ज किया जाए। हिंसा की इन घटनाओं की जिम्मेदारी तय होयह भी व्यवस्था की जाये।

केंद्रीय कानून की मांग

अरिसदा प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने डॉक्टर और अस्पताल पर हिंसा के खिलाफ केंद्रीय अधिनियम की मांग करते हुए कहा की

झुंझुनू प्रकरण को पुलिस कर रही है दबाने की कोशिश

अखिल राजस्थान सेवारत चिकिसक संघ द्व रविवार को की गई आपात प्रेस वार्ता संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ लक्ष्मण सिंह ओला ने बताया कि कोलकाता के नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज में चिक साथियों पर हुए जानलेवा हमले के जैसी ही घटना झन्झुनु के bdk के अस्पताल में चिकित्सको के हुई थी।

जिसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है, चिकित्सको द्वारा पुलिस में मामला दर्ज कराने के बाद पुलिस मामले को दबा रही है।

ऐसी घटना की पुनरावर्ती नहीं हो और दोसियो के खिलाफ सख्त करवाई की मांग को लेकर भी संघ द्वारा कल सोमवार 17 जून को एक दिन के लिए राज्य के सभी चिकित्सालयों में आपातकालीन सेवाओं, एम एल सी व पोस्टमार्टम को छोड़ कर सभी गैर आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

चिकित्सा सुरक्षा बल गठित करे सरकार

डॉ चौधरी ने औद्योगिक सुरक्षा बल की तरह चिकित्सालयों की सुरक्षा के लिए एक अलग “चिकित्सा सुरक्षा बल” गठित करने की माँग सरकार से करता है।

राज्य के चिकित्सकों के 2017 के आंदोलन की प्रमुख माँगो में भी यह एक थी किंतु आज तक प्रभावी कार्यवाही नहीं हुयी है जिसके कारण राज्य के चिकित्सालयों में आए दिन चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों पर हिंसा कारित की जा रही है।

रेजिडेंट चिकित्सको ने भी किया बहिष्कार का एलान

इस दौरान रेजिडेंट चिकित्सको की एसोसिएसन के डॉ विजय चौधरी ने बताया की प्रदेश के सभी रेजिडेंट चिकित्सक सोमवार को सुबह 8 बजे से मंगलवार के सुबह 8 बजे तक कार्य बहिस्कार पर रहेंगे

प्रेस वार्ता में ये थे मौजूद

प्रेस वार्ता मे अखिल राजस्थान सेवारत संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ,वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ लक्ष्मण सिंह ओला, राज्य सचिव डॉ वी पी मीणा,डॉ मनीष चौधरी व प्रवक्ता डॉ ज्योत्स्ना रँगा मौजूद थे।

साथ ही IMA के महासचिव डॉ वी के जैन , उपाध्यक्ष डॉ महेश पोद्दार, मीडिया प्रभारी डॉ संजीव गुप्ता व जयपुर मेडिकल ऐसोशिएसन के डॉ तरुण पाटनी एवं जार्ड अध्यक्ष डॉ विजय चौधरी,जार्ड सचिव डॉ विकास भी इस इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित रहे।