model raped in rajasthan
model raped in rajasthan (File photo)

—पागल और काटखाने वाले कुत्तों को भी नहीं पकड़ा जा रहा

जयपुर। शहर में एक बार फिर से आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा है। मालवीय नगर में चार-पांच लोगों को कुत्तों के काटने के बाद निगम की टीमें हरकत में आई है और कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की गई है, लेकिन इस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगने लगे हैं।

कुछ दिनों में यह कार्रवाई बंद हो जाएगी और उसके बाद फिर से शहर में कुत्तों का आतंक शुरू हो जाएगा।

कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आड़ लेकर नगर निगम की पशुधन शाखा कामचोरी में लगी हुई है।

शहरों में बढ़ती कुत्तों की जनसंख्या के लिए केंद्र सरकार के एक प्रोग्राम के तहत कुत्तों को पकड़ कर उनका बधियाकरण किया जाता है, ताकि कुत्तों की जनसंख्या बेतहाशा नहीं बढ़ पाए।

इस प्रोजेक्ट पर ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे रखा है कि कुत्तों को जिस जगह से पकड़ा जाए, बधियाकरण के बाद उन्हें फिर उसी जगह पर ही छोड़ा जाए।

निगम सूत्रों का कहना है कि इसी आदेश की आड़ लेकर निगम कुत्तों को पकड़ने में कोताही बरत रहा है।

यह आदेश सिर्फ बधियाकरण करने के लिए पकड़े गए कुत्तों पर लागू होता है, जबकि निगम की पशुधन शाखा इसकी आड़ लेकर रेबीज से ग्रस्त या फिर लोगों व अन्य जानवरों को काटने वाले कुत्तों को पकड़ने से भी गुरेज करती है।

रेबीज से ग्रस्त कुछ कुत्तों को पकड़ा जाता है, क्योंकि उनकी कुछ समय बाद मौत हो जाती है, लेकिन काटने वाले कुत्तों को नहीं पकड़ा जाता है। काटने वाले कुत्तों की निगम को शिकायतें मिलती रहती है।

यदि निगम काटने वाले कुत्तों की शिकायतों पर कार्रवाई करे और उन्हें पकड़ कर श्वान घर में रखे, उनके खाने-पीने की पुख्ता व्यवस्था करे, तो कुछ ही दिनों में कुत्तों के व्यवहार में परिवर्तन आ जाएगा और उन्हें फिर से आजाद किया जा सकता है।

गर्मी के मौसम में जानवर तनाव में रहते हैं और इसीलिए वह छेड़ने पर काटने जैसी हरकत करते हैं। बच्चों के छेड़ने पर कु त्ते आक्रामक हो जाते हैं।

कुत्ते अकसर 6 से 9 और 9 से 12 एज ग्रुप के बच्चों को ज्यादा काटते हैं। ऐसे में निगम को चाहिए कि वह काटने वाले कुत्तों को पकड़े और मौसम बदलने तक उन्हें अपने श्वानघरों में रखे।

कुत्तों के नार्मल होने के बाद उन्हें फिर से शहर में छोड़ा जा सकता है।

डॉ. महेंद्र सिंह कच्छावा, प्रदेश प्रभारी, एनीमल वेलफेयर बोर्ड आॅफ इंडिया व वन एवं वन्य जीवों के अधिवक्ता