जोधपुर/जयपुर।

एक ज़माने में राजस्थान की राजनीति की धुरी बने रहने वाले परसराम मदेरणा की पोती दिव्या मदेरणा को कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत और कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट विधानसभा चुनाव हराना चाहते हैं।

क्या परसराम मदेरणा की पोती दिव्या को हराने में लगे हैं गहलोत-पायलट? 1

यह बात भले ही हजम नहीं हो, किन्तु यही सत्य है। यह बात बीते चार दिन से जोधपुर की गली गली में फेल चुकी है। हमारे रिपोर्टर हरसहाय सैनी ने इसको लेकर ओसियां की उस विधानसभा में टोह ली, जहां से दिव्या मदेरणा चुनाव लड़ रहीं हैं।

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ओसियां में अब तक न अशोक गहलोत और सचिन पायलट का नहीं जाना न केवल स्थानीय लोगों को कचोट रहा है, बल्कि मदेरणा परिवार के समर्थक भी काफी गुस्सा है।

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शहरी इलाकों में दिव्या मदेरणा को जिताने के लिए युवा उतावला नहीं है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मदेरणा के नाम से ही युवाओं के चेहरे के भाव बदल जाते हैं। रेवंतराम को इस बात का भी मलाल है कि अशोक गहलोत ने पॉवर में होने पर भी महिपाल मदेरणा की मदद नहीं कि।

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दिव्या मदेरणा को टिकट मिलने के बाद बेहद खुश होने वाली 67 वर्षीय रुकमा कहतीं हैं कि जब बड़े बड़े नेता परसराम मदेरणा के यहां ढोक देने आते थे, तब अशोक गहलोत को मिलने के लिए इंतजार करना पड़ता था।

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रुकमा आगे बताती हैं कि जब गहलोत दिव्या मदेरणा के लिए वोट मांगने नहीं आते हैं, तो साफ समझ में आता है कि महिपाल मदेरणा की तब मदद क्यों नहीं कि गई।

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गेवती देवी इसको भंवरी देवी के साथ हुए कांड से जोड़कर देखतीं हैं। गेवती कहती हैं, यह बात सत्य है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना ज्यादा है, लेकिन कांग्रेस की ऐसी सरकार किस काम की है, जिसमें मदेरणा साब का परिवार का सदस्य ही नहीं है।

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गांव के 75 साल के हड़मान राम को मदेरणा के नाम से बोल उठते हैं। उनका कहना है कि परसराम मदेरणा के परिवार में दो महिलाओं को चुनाव मैदान में झोंक रखा है, लेकिन गहलोत को लेकर उनमें भी बेहद गुस्सा हैं।

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दिव्या मदेरणा भले ही इस बारे में कुछ नहीं बोल रहीं हैं, लेकिन वह पूरी ताकत से प्रचार में जुटी हुईं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अशोक गहलोत यदि ओसियां आते तो शायद मामला उलटा पड़ता और इससे दिव्या को ही नुकसान होता।

पिछले चुनाव में दिव्या मदेरणा की मां लीला मदेरणा चुनाव हार चुकी हैं, मगर लोग उस हार को मोदी की आंधी के रूप में देखते हैं। इस बार इस मामले में दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला बराबर का हो गया है।

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सचिन पायलट के नहीं आने पर हड़मान राम कहते हैं कि उनका इस इलाके में कोई मतलब ही नहीं है, वह अगर यहां पर भी प्रचार करते तो भी कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।

भैराराम को लोग सीधा और सुलभ मानते हैं, किन्तु मदेरणा परिवार की लाडली के पक्ष में हित साफ दिखाई देता है। इस बीच दिव्या का प्रचार साफ दिखता है कि चुनाव जीतने के प्रति वह पूरी तरह से आश्वस्त हैं।

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हर गांव, कस्बे को नाप चुकीं दिव्या अपनी जीत के प्रति कॉन्फिडेंट हैं, लेकिन उनके समर्थकों में गहलोत-पायलट के प्रति गुस्सा भी खूब है। दिव्या मदेरणा लगातार दो बार जिला परिषद की सदस्य रह चुकीं हैं।

चाहे जो हो, लेकिन अशोक गहलोत और सचिन पायलट के ओसियां नहीं आने का असर भाजपा के लिए मुफीद हो गया है। किंतु फिर भी बड़े नेता नहीं आने से मदेरणा परिवार के साथ अन्याय ही मान रहे हैं।

बहरहाल, ओसियां का चुनाव रोचक हो गया है, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में कांग्रेस के बड़े नेताओं के प्रति काफी गुस्सा है। यदि बुधवार को भी कोई नेता यहां नहीं आता है तो समझ लीजिए कि मदेरणा परिवार इतिहास का हिस्सा हो जाएंगे।